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निर्मला सीतारमण: कांग्रेस समर्थक परिवार की बहू, जिसने विरोधी दल से शुरू की राजनीति, रचे कई इतिहास

रक्षा मंत्री रहते बालाकोट एयर स्टाइक हो या वित्त मंत्री रहते अनेक रिकॉर्ड तोड़ने की कहानी, निर्मला सीतारमण ने निर्णयों ने भारतीय राजनीति में एक नई लकीर खींची है। ठीक उसी तरह जैसे कांग्रेस समर्थक परिवार से निकलकर उन्होंने 2008 में भाजपा का दामन थामा और यहां से सीधे इतिहास बनाना शुरू कर दिया।

निर्मला सीतारमण: कांग्रेस समर्थक परिवार की बहू, जिसने विरोधी दल से शुरू की राजनीति, रचे कई इतिहास
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नई दिल्ली। रक्षा मंत्री रहते बालाकोट एयर स्टाइक हो या वित्त मंत्री रहते अनेक रिकॉर्ड तोड़ने की कहानी, निर्मला सीतारमण ने निर्णयों ने भारतीय राजनीति में एक नई लकीर खींची है। ठीक उसी तरह जैसे कांग्रेस समर्थक परिवार से निकलकर उन्होंने 2008 में भाजपा का दामन थामा और यहां से सीधे इतिहास बनाना शुरू कर दिया।

18 अगस्त 1959 को तमिलनाडु के मदुरै में जन्मी निर्मला सीतारमण का बचपन राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बीता क्योंकि उनके पिता रेलवे में काम करते थे, जिस कारण उनका स्थान बदलता रहता था। उन्होंने तिरुचिरापल्ली के सीतालक्ष्मी रामासामी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए की डिग्री हासिल की। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में निर्मला सीतारमण का ग्लोबलाइजेशन पसंदीदा विषय था।

समाचार लेखों में जिक्र मिलता है कि निर्मला सीतारमण का परिवार कांग्रेस समर्थक था और उनकी शादी, जिस परिवार में हुई थी, वह परिवार भी कांग्रेस समर्थक था। हालांकि, जब निर्मला सीतारमण को अपने राजनीतिक करियर के बारे में फैसला लेना था, तो उन्होंने 2008 में भाजपा को चुना। इस पार्टी में वे तेजी से आगे बढ़ीं।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उन्हें 2003 में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की सदस्य बनाया। वह 2005 तक एनसीडब्ल्यू की सदस्य रहीं। निर्मला सीतारमण एनसीडब्ल्यू सदस्य के तौर पर सुषमा स्वराज के संपर्क में आईं, जिन्होंने भाजपा में उनके नाम की सिफारिश की। एक साल बाद उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा को चुन लिया।

2010 में जब नितिन गडकरी पार्टी के अध्यक्ष थे, तब निर्मला सीतारमण को प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई। निर्मला उस प्रवक्ता टीम का हिस्सा थीं, जिसके प्रमुख रविशंकर प्रसाद थे। उन्होंने हर स्थिति में भाजपा का बचाव किया। 2014 के चुनावों में भाजपा की शानदार जीत के बाद निर्मला सीतारमण को स्वतंत्र प्रभार के साथ वाणिज्य मंत्रालय में राज्य मंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया था।

सितंबर 2017 में निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाया गया। इंदिरा गांधी के बाद वह भारत की दूसरी महिला रक्षा मंत्री बनीं। इंदिरा गांधी ने दो बार इस पद पर कार्य किया था।

रक्षा मंत्री के रूप में सीतारमण को रक्षा क्षेत्र में खरीद से संबंधित निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने देश के सामने मौजूद विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक 'कार्य योजना' तैयार करने के लिए एक रक्षा योजना समिति का गठन किया। रक्षा मंत्री के रूप में बालाकोट एयर स्ट्राइक के समय की रणनीति तय करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

दिलचस्प बात यह है कि जेएनयू कैंपस में 'राष्ट्र-विरोधी' नारेबाजी की घटनाओं के बाद उस समय वाइस-चांसलर एम. जगदीश कुमार ने सरकार को पत्र लिखकर यूनिवर्सिटी के छात्रों में राष्ट्रवाद की भावना जगाने के लिए एक आर्मी टैंक की मांग की थी। तब, जेएनयू की ही एक पूर्व छात्रा यानी निर्मला सीतारमण देश की रक्षा मंत्री थीं।

दूसरी बार, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनीं तो देश को भी निर्मला सीतारमण के रूप में पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री मिलीं, जो वर्तमान में भी इस पद पर काबिज हैं।

वित्त मंत्री के तौर पर सीतारमण के नाम कुछ दिलचस्प रिकॉर्ड दर्ज हैं। इंदिरा गांधी के पास अतिरिक्त प्रभार था लेकिन निर्मला सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री हैं। उन्होंने लगातार नौ बार केंद्रीय बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा, 1 फरवरी 2020 को उन्होंने 2 घंटे 42 मिनट का सबसे लंबा बजट भाषण दिया था। सिर्फ यही नहीं, साल 2019 में बजट दस्तावेजों के लिए पारंपरिक लाल 'बही-खाता' की शुरुआत करने का श्रेय निर्मला सीतारमण को जाता है।



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