नासिक से हरियाणा, जयपुर होते हुए सीकर पहुंचा NEET पेपर! कई राज्यों तक फैली जांच ने बढ़ाई चिंता
जांच एजेंसियों की शुरुआती पड़ताल में जो रूट सामने आया है, उसने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है। सूत्रों के मुताबिक कथित पेपर सबसे पहले नासिक से बाहर निकला। इसके बाद यह हरियाणा पहुंचा और वहां से जयपुर होते हुए जमवारामगढ़ और सीकर तक पहुंचाया गया।

नई दिल्ली: NEET UG 2026 Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 अब केवल पेपर लीक का मामला नहीं रह गई है। जांच एजेंसियों को शक है कि इसके पीछे कई राज्यों में फैला एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। राजस्थान, बिहार, हरियाणा, दिल्ली, केरल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड तक फैली जांच में ऐसे संकेत मिले हैं, जिन्होंने एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, कथित पेपर लीक की पूरी चेन बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित की जा रही थी। अब इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथ में है, जबकि राजस्थान ATS-SOG लगातार जांच से जुड़ी जानकारियां साझा कर रही है।
नासिक से सीकर तक पहुंचा पेपर
जांच एजेंसियों की शुरुआती पड़ताल में जो रूट सामने आया है, उसने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है। सूत्रों के मुताबिक कथित पेपर सबसे पहले नासिक से बाहर निकला। इसके बाद यह हरियाणा पहुंचा और वहां से जयपुर होते हुए जमवारामगढ़ और सीकर तक पहुंचाया गया। सीकर पहुंचने के बाद यही सामग्री अलग-अलग चैनलों के जरिए जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल और उत्तराखंड तक फैलाई गई। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग थे और इसकी शुरुआत कहां से हुई।
बिहार में सक्रिय था सॉल्वर गैंग
बिहार में जांच के दौरान सॉल्वर गैंग के सक्रिय होने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार यहां मेडिकल सीट दिलाने के नाम पर 60 लाख रुपये तक की डील की गई थी। इस मामले में विम्स मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्र अवधेश कुमार को मुख्य आरोपी बताया गया है। उसके मोबाइल फोन की जांच में कई अहम सुराग मिले, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। नालंदा पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गैंग सिर्फ पेपर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि परीक्षा में सॉल्वर बैठाने और चयन सुनिश्चित कराने तक की व्यवस्था कर रहा था।
सीकर क्यों बना जांच का केंद्र?
पूरे मामले में राजस्थान का सीकर सबसे अहम केंद्र बनकर उभरा है। पिछले कुछ वर्षों में सीकर देश के बड़े कोचिंग हब के रूप में तेजी से विकसित हुआ है। मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहां हजारों छात्र आते हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक कथित गेस पेपर का सबसे बड़ा सर्कुलेशन यहीं से हुआ। छात्रों को यह कहकर पढ़ाया गया कि परीक्षा में यही सवाल आने वाले हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के सभी 45 सवाल पहले से चुनिंदा लोगों तक पहुंचने के संकेत मिले हैं। अगर यह दावा सही साबित होता है तो मामला सीधे पेपर लीक की श्रेणी में आएगा।
600 अंकों तक के सवाल मैच होने का दावा
जांच एजेंसियों के अनुसार कथित क्वेश्चन बैंक में मौजूद बड़ी संख्या में सवाल असली परीक्षा से मेल खाते पाए गए हैं। सूत्रों का दावा है कि करीब 140 सवाल हूबहू मैच हुए। NEET परीक्षा में प्रत्येक सवाल चार अंकों का होता है। ऐसे में करीब 600 अंकों तक का सीधा फायदा मिलने की आशंका जताई जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी गेस पेपर से कुछ सवाल मिल जाना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नों का एक जैसा होना गंभीर संकेत माना जाता है।
“पेपर आ गया है” वाले फोन कॉल से मचा हड़कंप
जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक परीक्षा से पहले कुछ छात्रों को फोन कर कहा गया था कि “पेपर आ गया है।” बताया जा रहा है कि यह कॉल दिल्ली से किया गया था। इसके बाद सीकर में कथित पेपर तेजी से फैलाया गया। शुरुआत में इसे लाखों रुपये में बेचा गया, लेकिन बाद में कुछ छात्रों ने इसे 5 हजार से 30 हजार रुपये तक में आगे बेचना शुरू कर दिया। इससे संकेत मिल रहे हैं कि पूरा नेटवर्क धीरे-धीरे कमीशन और मुनाफे के खेल में बदल गया था।
कोचिंग और हॉस्टल नेटवर्क भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों को अब शक है कि यह मामला केवल छात्रों तक सीमित नहीं था। कई कोचिंग संस्थानों, MBBS काउंसलिंग से जुड़े लोगों और हॉस्टल नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। सीकर के एक कोचिंग संचालक से पूछताछ की जा चुकी है। वहीं राकेश नाम का एक व्यक्ति भी जांच एजेंसियों के रडार पर है, जो कथित तौर पर बड़े कोचिंग संस्थानों के बाहर MBBS काउंसलिंग का काम करता था। आरोप है कि उसने 30 हजार रुपये में यह सामग्री एक ऐसे छात्र को उपलब्ध कराई, जो केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहा है।
एन्क्रिप्टेड ऐप्स से फैलाया गया कथित पेपर
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित पेपर केवल WhatsApp तक सीमित नहीं था। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए भी इसे साझा किए जाने के संकेत मिले हैं। कुछ मोबाइल फोन में “Forwarded Many Times” टैग भी मिला है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि सामग्री बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुकी थी। अब SOG और CBI सोशल मीडिया चैट, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही हैं।
22 लाख छात्रों के भविष्य पर असर
NEET देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। इस वर्ष करीब 22 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ गई हैं। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक मेहनत की, लेकिन कुछ लोगों की कथित साजिश ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए। अब सभी की नजर CBI जांच और नई परीक्षा तारीखों पर टिकी हुई है।


