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NEET विवाद के बीच केंद्र का बड़ा फेरबदल, दीप्ति गौड़ मुखर्जी बनीं नई उच्च शिक्षा सचिव

उच्च शिक्षा विभाग में पिछले कुछ समय में लगातार प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले हैं। पहले विनीत जोशी को उच्च शिक्षा सचिव के पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त किया गया था। इसके बाद नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी।

NEET विवाद के बीच केंद्र का बड़ा फेरबदल, दीप्ति गौड़ मुखर्जी बनीं नई उच्च शिक्षा सचिव
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नई दिल्ली: NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी को देश की नई उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है। वह नरेश पाल गंगवार की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगी। उच्च शिक्षा विभाग में लगातार हो रहे बदलाव को मौजूदा परिस्थितियों में अहम प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। कार्मिक मंत्रालय ने सोमवार देर रात इस नियुक्ति की जानकारी दी। आदेश के मुताबिक, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने 23 जुलाई को जारी अपने पुराने आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए दीप्ति गौड़ मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त करने की मंजूरी दी है।

विनीत जोशी के बाद नरेश गंगवार भी हटे

उच्च शिक्षा विभाग में पिछले कुछ समय में लगातार प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले हैं। पहले विनीत जोशी को उच्च शिक्षा सचिव के पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त किया गया था। इसके बाद नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। अब सरकार ने नरेश पाल गंगवार को भी इस पद से हटाकर दीप्ति गौड़ मुखर्जी को नया सचिव नियुक्त किया है। इस बदलाव के बाद उच्च शिक्षा विभाग की कमान अब एक अनुभवी अधिकारी के हाथों में होगी।

कौन हैं दीप्ति गौड़ मुखर्जी?

दीप्ति गौड़ मुखर्जी मध्य प्रदेश कैडर की 1993 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। वह वर्तमान में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत थीं। केंद्र सरकार के नए आदेश के बाद अब उन्हें उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक स्तर पर उनके लंबे अनुभव को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उच्च शिक्षा से जुड़े कई बड़े मुद्दों के बीच उन्हें यह जिम्मेदारी मिली है। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, परीक्षा संचालन, उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े प्रशासनिक मुद्दे और छात्रों की शिकायतें प्रमुख हैं।

NEET विवाद के बीच नियुक्ति क्यों अहम?

उच्च शिक्षा सचिव के तौर पर दीप्ति गौड़ मुखर्जी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब NEET-UG परीक्षा को लेकर विवाद और छात्रों की चिंताएं लगातार चर्चा में हैं। परीक्षा प्रक्रिया, कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सरकार पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग के शीर्ष स्तर पर बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई सचिव के सामने उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में व्यवस्था को अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाने की चुनौती होगी। हालांकि, सरकार की ओर से इस नियुक्ति को सीधे तौर पर NEET विवाद से जोड़ने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। यह बदलाव व्यापक प्रशासनिक फेरबदल के तहत किया गया है।

कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का भी तबादला

केंद्र सरकार ने इसी प्रशासनिक फेरबदल में कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी हैं। युवा मामलों के विभाग की सचिव पल्लवी जैन गोविल को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय का नया सचिव नियुक्त किया गया है। वह अब दीप्ति गौड़ मुखर्जी की जगह संभालेंगी। इसके अलावा मंत्रिमंडल सचिवालय में विशेष कार्य अधिकारी (OSD) सुशील कुमार लोहानी को भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

जल संसाधन विभाग में भी बदलाव

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव वीएल कांता राव को गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग में विशेष कार्य अधिकारी नियुक्त किया गया है। वह अगले महीने के अंत में वर्तमान सचिव अंशुली आर्य के सेवानिवृत्त होने के बाद राजभाषा विभाग के सचिव का पदभार संभालेंगे। वहीं, वरिष्ठ अधिकारी अर्चना वर्मा को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग का नया सचिव बनाया गया है। केंद्र के इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। खास तौर पर उच्च शिक्षा विभाग में लगातार हुए बदलाव को देखते हुए अब सबकी नजर नई सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी की अगली प्राथमिकताओं पर रहेगी।


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