मुकेश अंबानी की जियो के आईपीओ ने तोड़े रिकॉर्ड
अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों का अभूतपूर्व समर्थन मिला है.

अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों का अभूतपूर्व समर्थन मिला है. 20 साल बाद अंबानी समूह के पहले आईपीओ के लिए 77 अरब डॉलर से अधिक की बोलियां लगीं, जिससे यह भारत का सबसे अधिक सब्सक्राइब
भारत के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने भारतीय शेयर बाजार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. यह देश का सबसे अधिक सब्सक्राइब होने वाला शेयर इश्यू बन गया है. शुक्रवार को बंद हुई बोली प्रक्रिया में इस आईपीओ के लिए 77 अरब डॉलर से ज्यादा की बोलियां प्राप्त हुईं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यह मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह का पिछले करीब दो दशक में पहला आईपीओ है. इसने 2008 में मुकेश अंबानी के भाई अनिल अंबानी के समूह की कंपनी रिलायंस पावर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है.
जियो में क्यों है इतनी दिलचस्पी?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर बाजार में काफी उत्सुकता थी क्योंकि इससे एक अनुमान यह भी लगता है कि बड़ी कंपनियों के प्रति निवेशकों में कितनी दिलचस्पी है. आईपीओ ऐसे समय में आया जब एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों को लेकर बाजार बहुत ज्यादा सतर्क है.
भारत में 50 करोड़ से अधिक मोबाइल ग्राहकों को सेवा देने वाली जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपना आईपीओ हिंदू त्योहारों के मौसम के दौरान लॉन्च किया. इस समय को आमतौर पर निवेश और नए वित्तीय फैसलों के लिए शुभ माना जाता है.
आईपीओ के जरिए जियो प्लेटफॉर्म्स की कुल कीमत 108.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई है. कारोबार शुरू होने के बाद कंपनी संभावित रूप से बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो सकती है.
विदेशी निवेशकों में भी उत्साह
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. सार्वजनिक श्रेणी में निवेशकों की ओर से मांग उपलब्ध शेयरों की संख्या से 22 गुना से ज्यादा रही. संस्थागत निवेशकों, खुदरा निवेशकों, कर्मचारियों और मौजूदा शेयरधारकों की मजबूत भागीदारी ने इस भारी मांग को बढ़ावा दिया. यदि ज्यादातर निवेशकों ने 1,119 रुपये प्रति शेयर के ऊपरी मूल्य पर आवेदन किया है, तो सार्वजनिक श्रेणी में मांग का मूल्य 51.5 अरब डॉलर से ज्यादा बैठता है.
अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, ब्लैकरॉक और फिडेलिटी जैसे निवेशकों ने उनके लिए आरक्षित 85.4 करोड़ डॉलर मूल्य के शेयरों के मुकाबले कुल 25.6 अरब डॉलर की बोलियां लगाईं.
रिलायंस समूह के एक अधिकारी के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के लिए 1.38 करोड़ से अधिक आवेदन मिले हैं, जो भारत में किसी भी आईपीओ के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसी साल एशिया के सबसे बड़े आईपीओ माने जाने वाले चीन की मेमरी चिप निर्माता कंपनी सीएक्सएमटी के शेयर इश्यू में लगभग 94 लाख आवेदन आए थे.
वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट क्रांति बातिनी ने कहा कि लंबे समय बाद आया रिलायंस समूह के आईपीओ को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह है. जियो प्लेटफॉर्म्स का नेतृत्व मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी कर रहे हैं. कंपनी के प्रमुख निवेशकों में मेटा प्लेटफॉर्म्स और अल्फाबेट की गूगल भी शामिल हैं.
रिलायंस का आकर्षण
कंपनी के आईपीओ को बुधवार को खुलने के केवल दो घंटे के अंदर पूरी तरह सब्सक्रिप्शन मिल गया था. यह भारतीय आईपीओ बाजार में बहुत कम देखने को मिलता है, जहां आमतौर पर अंतिम दिन और आखिरी घंटों में संस्थागत निवेशक बड़ी बोलियां लगाते हैं.
जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज का हिस्सा है. भारतीय निवेशकों के बीच रिलायंस को लंबे समय में पूंजी बनाने वाली कंपनी के रूप में देखा जाता है. एलएसईजी के आंकड़ों के अनुसार, 2006 से अब तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों ने लगभग 900 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी सूचकांक का रिटर्न 685 प्रतिशत रहा.
जियो का दूरसंचार कारोबार 2016 में शुरू हुआ था. कंपनी ने मुफ्त वॉयस और डेटा सेवाएं उपलब्ध कराकर बाजार में बड़ा बदलाव किया था, जिससे भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा. एक देश के भीतर ग्राहकों की संख्या के आधार पर जियो अब केवल चाइना मोबाइल से पीछे है. ईलॉन मस्क की स्टारलिंक को भी इस कंपनी ने कड़ा मुकाबला दिया है.
आईपीओ के संस्थागत निवेशक वर्ग को 70.55 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जो बड़े निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी को दिखाता है. खुदरा निवेशक श्रेणी 2.7 गुना सब्सक्राइब हुई, जबकि कर्मचारियों और मौजूदा रिलायंस शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्से को क्रमशः 2.93 गुना और 7.6 गुना आवेदन प्राप्त हुए.
रिलायंस समूह की स्थापना मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी ने की थी. 1980 के दशक में मुंबई में बड़े शेयरधारक सम्मेलनों के जरिए उन्होंने देश में खुदरा निवेशकों का व्यापक आधार तैयार किया था. कंपनी का कहना है कि 1977 में उसकी लिस्टिंग ने भारत में इक्विटी निवेश संस्कृति को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.


