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मध्य प्रदेश: धार में विरोध प्रदर्शन पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर

मध्य प्रदेश के धार जिले में विरोध प्रदर्शन पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शुक्रवार को सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्यव्यापी आंदोलन के दौरान नेशनल हाईवे को जाम किया था। शनिवार को पुलिस ने लगभग 26 कांग्रेस नेताओं और सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा लिखा।

मध्य प्रदेश: धार में विरोध प्रदर्शन पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर
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भोपाल/धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में विरोध प्रदर्शन पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शुक्रवार को सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्यव्यापी आंदोलन के दौरान नेशनल हाईवे को जाम किया था। शनिवार को पुलिस ने लगभग 26 कांग्रेस नेताओं और सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा लिखा।

आईएएनएस के पास मौजूद एफआईआर कॉपी में बताया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने खलघाट क्षेत्र में इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैक्टर और अन्य वाहन खड़े कर दिए थे, जिससे कई घंटों तक यातायात बाधित रहा और यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग जाने के कारण पुलिस को वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से मोड़ना पड़ा।

एफआईआर में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल हैं, जिनमें गंधवानी के विधायक और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, राजपुर के विधायक बाला बच्चन, कुक्षी के विधायक हनी बघेल और सरदारपुर के विधायक प्रताप ग्रेवाल प्रमुख हैं। इसके अलावा, पूर्व मंत्री सचिन यादव, विधायक झूमा सोलंकी, केदार डावर, हीरालाल और मोंटू सोलंकी को भी आरोपी बनाया गया है।

जिला स्तर के कई पदाधिकारियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं पर भी एफआईआर हुई है। इनमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष स्वतंत्र जोशी, विधानसभा प्रभारी अंतिम ढोली, सुभाष सिरसिया, जितेंद्र मालीवाड़, विकास पटेल, सुदामा सेन, भीम ठाकुर, पवन जायसवाल, संजय पंवार, देवेंद्र पाटीदार, सुकराम मकवाना और पूरनलाल खरते शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा होना और सार्वजनिक रास्ते में बाधा डालने के आरोप में दर्ज किया गया है। अधिकारी वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी सबूतों की जांच कर रहे हैं, ताकि सड़क जाम करने वाले अन्य प्रदर्शनकारियों की पहचान की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एफआईआर को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार पर पुलिस कार्रवाई के जरिए किसानों की आवाज दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मेरे राज्य के किसानों को बधाई। भाजपा सरकार आपसे डर गई है। जब पूरे राज्य में, जिसमें खलघाट भी शामिल है, किसानों के अधिकारों की मांग में आवाजें उठीं, तो भाजपा ने समाधान खोजने के बजाय एफआईआर दर्ज करना चुना।"

इस दौरान कांग्रेस नेता ने सवाल किया, "क्या किसानों के लिए एमएसपी की मांग करना कोई अपराध है? क्या फसल बीमा, खाद, बीज और बिजली के लिए बोलना कोई पाप है?" उमंग सिंघार ने यह भी कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कांग्रेस अपना आंदोलन जारी रखेगी।



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