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MP Congress में बड़ा सांगठनिक फेरबदल! सभी विभाग और प्रकोष्ठ भंग, BJP का तंज—"गुटबाज़ी से परेशान है पार्टी"

मध्य प्रदेश कांग्रेस इकाई का पुनर्गठन होने जा रहा है और इसीलिए सभी विभागों, प्रकोष्ठों और उनकी समस्त स्तर की इकाइयों को भंग कर दिया गया है। भाजपा ने कांग्रेस के फैसले पर तंज कसा है।

MP Congress में बड़ा सांगठनिक फेरबदल! सभी विभाग और प्रकोष्ठ भंग, BJP का तंज—गुटबाज़ी से परेशान है पार्टी
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भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस इकाई का पुनर्गठन होने जा रहा है और इसीलिए सभी विभागों, प्रकोष्ठों और उनकी समस्त स्तर की इकाइयों को भंग कर दिया गया है। भाजपा ने कांग्रेस के फैसले पर तंज कसा है।

राज्य के दतिया विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में कांग्रेस को जीत मिली है और उसने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। नतीजे आने के बाद पार्टी की दिल्ली में समीक्षा बैठक हुई और आगामी रणनीति पर मंथन भी किया गया। इस मंथन के दौरान कई जिला इकाइयों की कार्यशैली अपेक्षा के अनुरूप न होने का मसला भी उठा।

कांग्रेस के राज्य प्रभारी हरीश चौधरी ने बुधवार को संगठन के पुनर्गठन को लेकर पार्टी के फैसले से अवगत कराया, जिसमें कहा गया है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश और संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया के अंतर्गत निर्णय लिया गया है, राज्य कांग्रेस कमेटी के अंतर्गत गठित सभी विभागों, प्रकोष्ठों एवं उनकी समस्त स्तर की इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा और उससे पहले के पंचायत व नगरीय निकायों में बेहतर प्रदर्शन करना चाहती है। इसके लिए जरूरी है कि संगठन को मजबूत किया जाए। किसी को ध्यान में रखकर संगठन का पुनर्गठन किया जा रहा है। कांग्रेस संगठन में होने वाले पुनर्गठन को लेकर भाजपा प्रवक्ता अजय यादव ने तंज कसा है और कहा है कि पार्टी को अब अपने संगठन पर ही भरोसा नहीं रहा है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस द्वारा सभी विभागों एवं प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग करना यह प्रमाणित करता है कि कांग्रेस अपने ही संगठन पर विश्वास खो चुकी है। यह निर्णय कांग्रेस की गुटबाजी, नेतृत्व संकट और संगठनात्मक विफलता का स्पष्ट उदाहरण है।

भाजपा प्रवक्ता का आरोप है कि कांग्रेस में पहले भी संगठन सृजन के नाम पर समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय हुआ। धनबल, बाहुबल, गुटबाजी और प्रभाव के आधार पर पद बांटे जाने के आरोप लगातार लगते रहे हैं। अब आशंका है कि विभागों और प्रकोष्ठों के पुनर्गठन में भी योग्यता और समर्पण के बजाय उसी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, जिससे निष्ठावान कार्यकर्ता फिर उपेक्षित होंगे।



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