मोहन भागवत का 17 दिवसीय विदेश दौरा आज से, अमेरिका-कनाडा और ब्रिटेन में करेंगे कई कार्यक्रम
डॉ. मोहन भागवत सोमवार को नई दिल्ली से कनाडा के लिए रवाना होंगे। उनके दौरे की शुरुआत टोरंटो से होगी, जहां वह एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद उनका अमेरिका जाने का कार्यक्रम है। 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध मेडिसन स्क्वायर में आयोजित समारोह में डॉ. भागवत लोगों को संबोधित करेंगे।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत सोमवार, 24 अगस्त से 17 दिवसीय विदेश दौरे पर रवाना होंगे। संघ के शताब्दी वर्ष के तहत चलाए जा रहे वैश्विक संपर्क अभियान के क्रम में होने वाली इस यात्रा में वह कनाडा, अमेरिका और इंग्लैंड का दौरा करेंगे। इस दौरान डॉ. भागवत अलग-अलग शहरों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे और भारतीय मूल के लोगों तथा विभिन्न सामाजिक समूहों को संबोधित करेंगे। संघ के मुताबिक, यात्रा का उद्देश्य विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समाज के साथ संपर्क को मजबूत करना है। इस दौरान भारत, हिंदू समाज और संघ को लेकर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मौजूद धारणाओं पर भी चर्चा की जाएगी।
सबसे पहले कनाडा जाएंगे भागवत
डॉ. मोहन भागवत सोमवार को नई दिल्ली से कनाडा के लिए रवाना होंगे। उनके दौरे की शुरुआत टोरंटो से होगी, जहां वह एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद उनका अमेरिका जाने का कार्यक्रम है। 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध मेडिसन स्क्वायर में आयोजित समारोह में डॉ. भागवत लोगों को संबोधित करेंगे। संघ से जुड़े पदाधिकारी इस कार्यक्रम की तैयारियों के लिए पहले से ही वहां मौजूद हैं। विदेश विभाग का दायित्व संभालने वाले संघ के कई पदाधिकारी कार्यक्रमों के समन्वय में जुटे हुए हैं। इसके बाद भागवत इंग्लैंड जाएंगे और लंदन में भी विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। यात्रा के दौरान उनके कई सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना है।
संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़ा वैश्विक संपर्क अभियान
आरएसएस इस वर्ष अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर देश और विदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में संघ की ओर से वैश्विक स्तर पर संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। संघ का कहना है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समाज के साथ संवाद को मजबूत करना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी उद्देश्य से डॉ. भागवत का यह विदेश दौरा आयोजित किया गया है।
40 देशों में हिंदू स्वयंसेवक संघ की गतिविधियां
संघ के अनुसार, विदेशों में हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) के नाम से करीब 40 देशों में गतिविधियां संचालित होती हैं। कई देशों में नियमित शाखाएं भी आयोजित की जाती हैं, जिनसे भारतीय मूल के लोगों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के लोग भी जुड़े हुए हैं। आरएसएस का कहना है कि इन गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और हिंदू विचार परंपरा से जुड़े विषयों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। भागवत की यात्रा को इसी वैश्विक संपर्क नेटवर्क के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
'भ्रांतियों और दुष्प्रचार के बीच तथ्य आधारित दृष्टिकोण'
आरएसएस के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने यात्रा के उद्देश्य को लेकर कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भारत, हिंदू समाज और संघ को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और दुष्प्रचार मौजूद हैं। ऐसे में यात्रा का उद्देश्य तथ्यों पर आधारित और सकारात्मक दृष्टिकोण लोगों के सामने रखना है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की अवधारणा महत्वपूर्ण रही है। संघ चाहता है कि ऋषि-मुनियों द्वारा दिए गए विश्व की एकात्मता और मानव समाज को एक परिवार के रूप में देखने के संदेश को विभिन्न देशों के समाजों तक पहुंचाया जाए।
न्यूयॉर्क में सार्वभौमिक एकता पर कार्यक्रम
सीआर मुकुंद के मुताबिक, डॉ. भागवत न्यूयॉर्क में आयोजित सार्वभौमिक एकता से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और सामुदायिक पृष्ठभूमि के लोगों की भागीदारी की उम्मीद है। न्यूयॉर्क के अलावा टोरंटो और लंदन में भी सामाजिक नेतृत्व और सामुदायिक संवाद से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने की कोशिश होगी।
भारत और प्रवासी समाज के बीच संपर्क पर जोर
डॉ. भागवत के विदेश दौरे को संघ के वैश्विक संपर्क अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरएसएस लंबे समय से विदेशों में अपने संपर्क नेटवर्क और गतिविधियों के विस्तार पर काम कर रहा है। ऐसे में सरसंघचालक का अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड दौरा इस अभियान को और गति देने वाला माना जा रहा है। 17 दिनों के इस दौरे के दौरान भागवत अलग-अलग देशों में भारतीय समुदाय, हिंदू स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों और सामाजिक नेतृत्व से संवाद करेंगे। यात्रा के दौरान भारत की सांस्कृतिक परंपरा, वैश्विक एकता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर चर्चा प्रमुखता से होने की संभावना है। संघ के शताब्दी वर्ष में हो रही यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन देश के साथ-साथ विदेशों में भी अपने विचार और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े संपर्क को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।


