Top
Begin typing your search above and press return to search.

अब पेंशन-रिटायरमेंट बेनिफिट्स मिलेंगे; यशवंत वर्मा को लोकसभा से भी राहत देने की तैयारी!

वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में नकदी मिलने की घटना 14-15 मार्च 2025 की रात सामने आई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने वहां 500 रुपये के जले, अधजले, गीले और बिखरे नोट देखे थे। इसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और तत्कालीन न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर सवाल उठे।

अब पेंशन-रिटायरमेंट बेनिफिट्स मिलेंगे; यशवंत वर्मा को लोकसभा से भी राहत देने की तैयारी!
X

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई अब आगे नहीं बढ़ने की संभावना है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्मा के इस्तीफा देने के बाद लोकसभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश नहीं किया जाएगा। पहले इस दिशा में तैयारी चल रही थी और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी थी। अब सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि संसद के अगले सत्र में इस मामले को औपचारिक रूप से बंद किया जा सकता है। वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर करीब 200 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। ऐसे में प्रस्ताव का आगे नहीं बढ़ना मामले में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, महाभियोग की प्रक्रिया रुकने का अर्थ यह नहीं है कि समिति की रिपोर्ट में दर्ज आरोप स्वतः समाप्त हो गए हैं।

इस्तीफे के बाद क्यों बदल गई महाभियोग की स्थिति?

यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की तैयारी उनके सरकारी आवास के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की घटना के बाद शुरू हुई थी। इस मामले की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ गंभीर निष्कर्ष दर्ज किए थे। इसके बाद संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की पहल की गई। हालांकि, वर्मा ने महाभियोग की प्रक्रिया के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पद छोड़ने के कारण संसद में प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। मामले को अगले संसदीय सत्र में औपचारिक रूप से बंद किए जाने की संभावना है। महाभियोग प्रक्रिया के संभावित रूप से समाप्त होने से उन सवालों पर संसदीय कार्यवाही आगे नहीं बढ़ेगी, जिन पर प्रस्ताव के दौरान चर्चा हो सकती थी। लेकिन वर्मा को मिलने वाले सेवानिवृत्ति लाभों और अन्य सुविधाओं की स्थिति लागू नियमों पर निर्भर करेगी।

नकदी मामले में समिति ने क्या निष्कर्ष निकाले?

वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में नकदी मिलने की घटना 14-15 मार्च 2025 की रात सामने आई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने वहां 500 रुपये के जले, अधजले, गीले और बिखरे नोट देखे थे। इसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और तत्कालीन न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर सवाल उठे। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित तीन सदस्यीय समिति ने नौ गवाहों और 14 साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की। समिति ने वर्मा को आरोपों से मुक्त करने से इनकार किया। उसकी रिपोर्ट में कहा गया कि संबंधित नकदी के बारे में वर्मा को जानकारी थी। ये समिति के निष्कर्ष हैं; इन्हें किसी आपराधिक अदालत के अंतिम फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

स्टोररूम से दूरी बनाने के दावे पर भी सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्मा ने कहा था कि जिस स्टोररूम में नकदी मिली, उससे उनका कोई संबंध नहीं था। हालांकि, समिति ने उल्लेख किया कि स्टोररूम मुख्य आवासीय हिस्से से अलग होने के बावजूद नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित उनके आधिकारिक आवासीय परिसर के भीतर था। समिति ने स्टोररूम से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को अपने निष्कर्षों में शामिल किया। जांच रिपोर्ट में साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। समिति के अनुसार, नकदी को जब्त करने, उसकी विस्तृत सूची बनाने, पंचनामा तैयार करने और स्टोररूम को तत्काल सील करने जैसे कदम नहीं उठाए गए। रिपोर्ट में इसे महत्वपूर्ण प्रक्रियागत चूक बताया गया। इस वजह से नकदी से जुड़े कुछ तथ्यों की आगे जांच और पुष्टि प्रभावित होने की बात सामने आई।

FIR दर्ज नहीं होने पर उठे सवाल

अगस्त 2026 में समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने के बाद वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सितंबर 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। इस तरह उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस मामले में वर्मा के खिलाफ अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी एक कार्यक्रम में इस स्थिति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि यदि किसी मंत्री के आवास से इस तरह नकदी मिलती, तो क्या उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती? महाभियोग प्रस्ताव के आगे नहीं बढ़ने से संसदीय प्रक्रिया का एक अध्याय बंद हो सकता है, लेकिन नकदी मिलने की घटना, समिति के निष्कर्ष और आपराधिक कार्रवाई को लेकर उठे सवाल अब भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it