जंतर-मंतर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट की समिति ने प्रभावित लोगों से शिकायतें मांगीं
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (एचपीईसी) ने जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य शहरों में हुई हिंसा से जुड़ी घटनाओं से प्रभावित लोगों से शिकायतें और अभ्यावेदन आमंत्रित करने शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (एचपीईसी) ने जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य शहरों में हुई हिंसा से जुड़ी घटनाओं से प्रभावित लोगों से शिकायतें और अभ्यावेदन आमंत्रित करने शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी के अनुसार, प्रभावित लोगों और पुलिसकर्मियों की सुविधा के लिए पूर्व न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली समिति ने एक पोर्टल शुरू किया है। प्रभावित लोग इस पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायतें और संबंधित जानकारी समिति के सामने रख सकते हैं।
पांच सदस्यीय एचपीईसी को जुलाई में कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर और राजधानी के बाहर विभिन्न स्थानों पर हुई हिंसा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिकारी ने बताया कि समिति 18 अगस्त और 10 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेशों में उल्लिखित मुद्दों की जांच करेगी। इसमें 18 अगस्त के आदेश के पैरा 12 और 13 तथा 10 सितंबर के आदेश के पैरा 5(i) में बताए गए विषय शामिल हैं।
समिति की प्राथमिकता में पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाकर हिंसा और उत्पीड़न किए जाने तथा दोनों पक्षों की ओर से अत्यधिक हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामले शामिल होंगे।
गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, पोर्टल को इस तरह तैयार किया गया है कि संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। प्रभावित व्यक्ति चाहें तो अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध भी कर सकते हैं। प्रभावित लोगों और अन्य संबंधित पक्षों से अपील की गई है कि वे पोर्टल पर जाकर निर्धारित प्रारूप में अपनी शिकायतें और अभ्यावेदन अपलोड करें।
समिति को सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त और 10 सितंबर 2026 के आदेशों के तहत सौंपे गए मुद्दों से संबंधित जानकारी और सुझाव भी पोर्टल के माध्यम से दिए जा सकते हैं।
जो लोग अपनी शिकायतें, अभ्यावेदन और अन्य संबंधित दस्तावेज भौतिक रूप से जमा करना चाहते हैं, वे नई दिल्ली के राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित शिक्षा सदन, 17 में समिति के कार्यालय में कार्यदिवसों के दौरान दोपहर दो बजे से शाम चार बजे के बीच इन्हें जमा कर सकते हैं। संबंधित सामग्री डाक या ईमेल के माध्यम से भी भेजी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने एचपीईसी का गठन करते हुए समिति को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस और अन्य एजेंसियों की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग और हिंसा के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था। इसमें पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और पर्याप्त चेतावनी या आनुपातिकता के बिना आंसू गैस के इस्तेमाल से गंभीर शारीरिक नुकसान और चोट लगने के आरोप भी शामिल हैं। कुछ चोटों के गंभीर और दीर्घकालिक होने का दावा किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया था कि चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक, निगरानी और निजता से जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों पर फैसला सुप्रीम कोर्ट स्वयं करेगा, समिति नहीं। शीर्ष अदालत ने पुलिस अधिकारियों, अर्धसैनिक बलों और अन्य जांच एजेंसियों को छात्र प्रदर्शनों से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन फुटेज, बॉडी-वॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग, वीडियोग्राफी, वायरलेस संचार रिकॉर्ड और पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) की कॉल लॉग सुरक्षित रखने तथा पूरी सामग्री समिति को सौंपने का निर्देश भी दिया था। अदालत ने संबंधित एजेंसियों से जांच में पूरा सहयोग करने को कहा था।


