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सीईसी को कोई नहीं बचा सकता, चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत: जयराम रमेश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने रविवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर राजनीतिक दलों को आठ साल तक खोजने योग्य (सर्च करने लायक) मतदाता सूची न देकर ‘वोट चोरी’ में मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) को तुरंत रोकने की भी मांग की।

सीईसी को कोई नहीं बचा सकता, चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत: जयराम रमेश
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नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने रविवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर राजनीतिक दलों को आठ साल तक खोजने योग्य (सर्च करने लायक) मतदाता सूची न देकर ‘वोट चोरी’ में मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) को तुरंत रोकने की भी मांग की।

जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में कहा, "पिछले दो वर्षों से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार और दृढ़ता से यह मांग कर रहे हैं कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) सभी राजनीतिक दलों को खोजने योग्य (सर्च करने योग्य) प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराए। ईसीआई ने बार-बार इस मांग को ठुकरा दिया और 2018 में सर्च करने योग्य मतदाता सूची देना बंद कर दिया था, जब कांग्रेस को मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाता मिले थे। 'वोट चोरी' को संभव बनाने के लिए 8 वर्षों तक इस मांग को खारिज किया गया।"

कांग्रेस नेता ने कहा, "15 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने एक आदेश जारी किया कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दो साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुए 'विशेष सारांश पुनरीक्षण' (एसएसआर) के लिए राजनीतिक दलों को सर्च करने योग्य प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाएगी। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि पूरा देश 'वोट चोरों' के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है।"

जयराम रमेश ने आरोप लगाया, "हर बार जब 'वोट चोरी' पकड़ी जाती है, तो केंद्र सरकार कोई नया हथकंडा अपनाती है, जैसे कि सर्च करने योग्य मतदाता सूची को रोकना, फर्जी मतदाताओं को जोड़ना या एसआईआर का इस्तेमाल करना लेकिन इस बार ऐसा नहीं चलेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को कोई नहीं बचा सकता, जिन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करते हुए चुनाव आयोग में जनता के भरोसे और विश्वास को खत्म कर दिया है। उन्हें पद से हटना ही होगा। हालांकि सिर्फ इतना ही काफी नहीं होगा। भारतीय चुनाव आयोग और उसके आईटी सिस्टम में पूरी तरह से बदलाव (ओवरहॉल) करने की जरूरत है। एसआईआर की वजह से 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के संवैधानिक मताधिकार को खतरे में डाल दिया है, इसे तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।



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