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यूपी चुनाव से पहले बड़ी साजिश में जुटी आईएसआई, जासूसी गतिविधियों पर एजेंसियों की नजर

खुफिया एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बड़ी साजिश रचने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि आईएसआई लंबी रणनीति के तहत काम कर रही है और बड़े हमले की तैयारी से पहले ध्यान भटकाने, निगरानी और प्रचार तंत्र के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है।

यूपी चुनाव से पहले बड़ी साजिश में जुटी आईएसआई, जासूसी गतिविधियों पर एजेंसियों की नजर
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नई दिल्ली। खुफिया एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बड़ी साजिश रचने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि आईएसआई लंबी रणनीति के तहत काम कर रही है और बड़े हमले की तैयारी से पहले ध्यान भटकाने, निगरानी और प्रचार तंत्र के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है।

अधिकारियों के मुताबिक यूपी चुनाव बड़ा राजनीतिक आयोजन है और इसके मद्देनजर आईएसआई कई हमलों की साजिश रच सकती है। इसके लिए उसके समर्थित तत्व सीसीटीवी कैमरे लगाने, जासूसी गतिविधियों में शामिल होने और संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाने जैसे काम कर रहे हैं।

एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि अचानक बढ़ी ऐसी गतिविधियों का मकसद भारतीय एजेंसियों को अलग-अलग मामलों में उलझाए रखना है, ताकि बड़े हमले की साजिश को अंजाम दिया जा सके।

अधिकारियों ने कहा कि इन तत्वों का मकसद सिर्फ हमला करना नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना भी है। कई इंटरसेप्ट्स में संकेत मिले हैं कि प्रचार चैनलों को शांति और सद्भाव बिगाड़ने के लिए सक्रिय किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक आईएसआई की नजर सिर्फ यूपी के बड़े शहरों पर नहीं, बल्कि दूसरे दर्जे के शहरों और गांवों पर भी है। मकसद एजेंसियों को भ्रमित करना और अचानक हमला करना है।

हाल ही में गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जो रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगा रहा था। सोलर पावर कैमरों के जरिए लाइव फीड पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक पहुंचाई जा रही थी। इसके बाद देशभर में सीसीटीवी ऑडिट कराया गया।

एजेंसियों को आशंका है कि बड़ी संख्या में कैमरे पहले से ही जुटाए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि यूपी चुनाव से पहले इसी रणनीति को दोहराया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक सड़क किनारे ढाबों और दुकानों पर कैमरे लगाकर चुनाव प्रचार के दौरान बड़े नेताओं के रूट पर नजर रखने की योजना हो सकती है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि आईएसआई उत्तर प्रदेश में पहले से मौजूद नेटवर्क का इस्तेमाल कम कर सकती है। शक से बचने के लिए दूसरे राज्यों के लोगों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनका स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड में नाम नहीं हो।

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि अलग-अलग राज्यों में जासूसी और आतंकी मॉड्यूल पकड़े जाने के बावजूद अन्य क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों पर भी करीबी नजर रखना जरूरी है। लगातार पैदा किया जा रहा ध्यान भटकाव किसी बड़ी योजना का हिस्सा हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार भारत द्वारा पाकिस्तान से जुड़े हर आतंकी हमले को युद्ध जैसी कार्रवाई मानने की नीति के बाद आईएसआई ने अपनी रणनीति बदली है। अब वह ऐसे हमले करवाना चाहती है, जो पूरी तरह घरेलू नेटवर्क की करतूत लगें और जिनका सीधा संबंध पाकिस्तान से न जुड़ सके।

अधिकारियों ने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान पर एफएटीएफ की नजर भी है। ऐसे में वह दोबारा ग्रे लिस्ट में नहीं जाना चाहता, इसलिए आतंकी फंडिंग और गतिविधियों को छिपाने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।



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