भारत की शक्ति 'राष्ट्रीय एकता' और समाज की सामूहिक सेवा में निहित है : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंंगलवार को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में आयोजित एक मुलाकात के दौरान माय भारत-नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) गणतंत्र दिवस परेड शिविर-2026 के दल के साथ बातचीत की।

माय भारत-एनएसएस दल से मुलाकात, उपराष्ट्रपति ने युवाओं को बताया राष्ट्र की ताकत
- 2047 तक विकसित भारत का सपना, उपराष्ट्रपति ने युवाओं को दिया जिम्मेदारी का संदेश
- गणतंत्र दिवस परेड में एनएसएस दल की सराहना, उपराष्ट्रपति ने बढ़ाया उत्साह
- एकता और सेवा ही भारत की शक्ति: सीपी राधाकृष्णन का युवाओं को संदेश
नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंंगलवार को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में आयोजित एक मुलाकात के दौरान माय भारत-नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) गणतंत्र दिवस परेड शिविर-2026 के दल के साथ बातचीत की।
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने युवा स्वयंसेवकों से मिलकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) के प्रतिभागियों का उत्साह और अनुशासन भारत के युवाओं की शक्ति को दर्शाता है। उन्होंने अपने छात्र जीवन के दौरान नेशनल सर्विस स्कीम से जुड़े अपने अनुभव को याद किया और युवा नागरिकों में चरित्र, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के निर्माण में एनएसएस की भूमिका पर प्रकाश डाला।
गणतंत्र दिवस परेड का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने माय भारत-एनएसएस दल को कर्तव्य पथ पर गर्वपूर्वक मार्च करते हुए देखा और माय भारत-एनएसएस कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए युवा मामले और खेल मंत्रालय की सराहना की।
एकता के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की शक्ति राष्ट्रीय एकता और समाज की सामूहिक सेवा में निहित है। उन्होंने रेखांकित किया कि सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं द्वारा प्रतिपादित एकता और सेवा के मूल्य देश की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने युवाओं से निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने और राष्ट्रीय हित के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह लक्ष्य एक सामूहिक यात्रा है, जिसके लिए अनुशासित, देशभक्त और जिम्मेदार नागरिकों की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज के युवाओं की प्रतिभा, आकांक्षा और वैश्विक अनुभव के बल पर भारत 2047 तक एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में उभरेगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक विकसित भारत के लिए न केवल आर्थिक प्रगति बल्कि सामाजिक सद्भाव, नैतिक शक्ति और मजबूत मूल्यों की भी आवश्यकता है, जिन्हें माय भारत-एनएसएस गतिविधियों के माध्यम से पोषित किया जाता है। उन्होंने जनसाक्षरता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, सामुदायिक विकास और आपदा राहत एवं पुनर्वास प्रयासों जैसे क्षेत्रों में एनएसएस स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की।
उन्होंने युवाओं को शॉर्टकट से बचने, सेवा में धैर्य बनाए रखने और आत्म-अनुशासन, दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी, और उन्हें आश्वासन दिया कि सच्चे प्रयास अंततः सफलता की ओर ले जाएंगे।
केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशिक्षकों, शिक्षकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ इस अवसर पर उपस्थित थे।


