ओमान के पास भारतीय झंडे वाले जहाज पर हमला, एक भारतीय नाविक की मौत
टैंकर एमएसवी एल जुसुफी पर हमले के दौरान 14 भारतीय नाविक सवार थे. इनमें से 13 को बचा लिया गया जबकि एक नाविक की मौत हो गई.

ओमान के पास भारतीय झंडे वाले जहाज पर हमला, एक भारतीय की मौत
ओमान के पास एक भारतीय झंडे वाले कार्गो जहाज पर हमला हुआ और एक भारतीय नाविक की मौत हो गई. भारत सरकार ने कहा है कि सोमवार, 2 नवंबर को जहाज से कोई "अज्ञात हवाई वस्तु" आकर टकराई. भारत के शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि टैंकर एमएसवी एल जुसुफी पर हमले के दौरान 14 भारतीय नाविक सवार थे.
उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि 13 क्रू मेंबर्स को ओमानी तटरक्षक बल द्वारा सुरक्षित बचा लिया गया. वहीं, गुजरात के गांधार नाहिम अजीज की मौत हो गई. शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, भारत विश्वस्तर पर मर्चेंट शिपिंग में सबसे ज्यादा नाविक भेजता है. साल 2025 में भारत के करीब 3.20 लाख नाविक सक्रिय थे.
28 फरवरी को ईरान पर इस्राएल और अमेरिका के हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमलों में कई भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है. 28 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि पश्चिम एशिया संघर्ष में अब तक 22 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें 14 नाविक शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कोई भी समूह धरना स्थल पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकता
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कोई भी संगठन किसी निर्धारित धरना स्थल पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं कर सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए कि दूसरे समूहों के अधिकार प्रभावित हों.
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि प्रदर्शन स्थलों के उपयोग के लिए निश्चित समय और अवधि तय होनी चाहिए, ताकि किसान, पत्रकार और अन्य संगठन भी अपनी बात रख सकें. अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन की अनुमति देने या न देने के कारण प्रशासन को स्पष्ट रूप से दर्ज करने चाहिए.
यह मामला व्यापारिक संगठनों की याचिकाओं से जुड़ा है, जिनका दावा है कि प्रदर्शनों के कारण कारोबार और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है. व्यापार संगठनों ने मांग की है कि त्योहारों के दौरान प्रदर्शनों पर रोक लगा दी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रदर्शनकारियों को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है.
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले एसीपी निलंबित
दिल्ली पुलिस के मुख्यालय के बाहर सोमवार, 2 नवंबर को हुए प्रदर्शन में शामिल रहे सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है. सोमवार को दिल्ली पुलिस के मुख्यालय के बाहर कई पुलिसकर्मियों ने इकट्ठे होकर प्रदर्शन किया था और दो अधिकारियों के ट्रांसफर ऑर्डर को वापस लेने की मांग की थी.
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह पूरा मामला 23 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब शाहदरा पुलिस स्टेशन में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हुआ. वकीलों का आरोप था कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने वकीलों को धमकाया था. इसके बाद वकीलों ने हड़ताल का एलान किया, जिसके बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ अरुण कुमार का ट्रांसफर कर दिया गया.
सोमवार को इसी ट्रांसफर ऑर्डर के खिलाफ पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन किया जिसमें एसीपी मनस्वी वशिष्ठ भी शामिल हुए. कानूनी खबरों की वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान एसीपी मनस्वी ने वकीलों के खिलाफ टिप्पणियां भी की. वकीलों ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया जहां अदालत ने उनसे एक औपचारिक याचिका दायर करने के लिए कहा.
दिल्ली-एनसीआर में हर तरह के पटाखे बिकने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पटाखों की बिक्री को लेकर अपनी पाबंदियों के कथित उल्लंघन पर मंगलवार, 3 नवंबर को चिंता व्यक्त की. अदालत ने एक समाचार रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कहा कि उसके आदेश के बावजूद बाजारों में विभिन्न प्रकार के पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं.
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से मामले की जांच करने को कहा. अदालत ने रिपोर्ट में प्रकाशित तस्वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस वाले पटाखों के साथ-साथ क्यूआर कोड वाले और बिना क्यूआर कोड वाले पटाखे भी बाजार में उपलब्ध बताए गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर को दीपावली से पहले सीमित अवधि के लिए दिल्ली-एनसीआर में प्रमाणित ग्रीन पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी थी. अदालत ने 4 से 6 नवंबर तक ग्रीन पटाखों की बिक्री और 7 व 8 नवंबर को निर्धारित समय में उन्हें जलाने की इजाजत दी थी. साथ ही 9 नवंबर 2026 से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध बहाल करने का आदेश दिया था.
बांग्लादेश में वेतन बढ़ोतरी के लिए कपड़ा श्रमिकों का प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी
बांग्लादेश में कपड़ा फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों का प्रदर्शन मंगलवार, 3 नवंबर को भी जारी रहा. यह प्रदर्शन 31 अक्टूबर को शुरू हुआ था. कपड़ा श्रमिक चार दिनों से उनका वेतन बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग है कि उनके न्यूनतम मासिक वेतन को 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका किया जाए. श्रमिकों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई ने उनकी खरीद क्षमता को बेहद कम कर दिया है.
श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान राजधानी ढाका के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में झड़पें होने की खबरें सामने आईं. श्रमिकों ने नए सिरे से प्रदर्शन किए और प्रमुख सड़कों को बंद करने की कोशिश की. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, झड़पों में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं.
बांग्लादेश चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक है. बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग में करीब 40 लाख लोग काम करते हैं और देश की निर्यात कमाई में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 80 फीसदी से अधिक है. उद्योग से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि फैक्ट्रियों के बंद होने की वजह से शिपमेंट भेजने में देरी हो सकती है और एक भरोसेमंद स्रोत के तौर पर बांग्लादेश की छवि कमजोर पड़ सकती है.
कपड़ा फैक्ट्रियों के मालिकों का कहना है कि वे बढ़ती परिचालन लागत, मध्य पूर्व में संघर्ष से जुड़े ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता और प्रमुख निर्यात बाजारों में कमजोर मांग जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक चलने वाली अशांति उत्पादन को बाधित कर सकती है और निर्यात को खतरे में डाल सकती है. इन प्रदर्शनों के दौरान कई फैक्ट्रियों को नुकसान भी पहुंचा है.
निर्मला सीतारमण ने जताई टाटा समूह के मतभेदों के जल्दी ही सुलझने की उम्मीद
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि टाटा संस और उसके सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट के बीच दरार पैदा करने वाले मुद्दों को समूह के भीतर सौहार्दपूर्ण ढंग से जल्दी ही सुलझा लिया जाएगा. निर्मला सीतारमण देश की कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री भी हैं.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, उन्होंने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की. उन्होंने टाटा को देश की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा बताया और कहा कि इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना होगा ताकि सामान्य स्थिति वापस आ सके. उन्होंने कहा कि इसे सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं किया जा सकता.
नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाला टाटा समूह हालिया महीनों में अपने आंतरिक मतभेदों को लेकर चर्चा में बना हुआ है. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग को लेकर समूह में एक राय नहीं है. टाटा संस में नोएल टाटा के नेतृत्व वाले टाटा ट्रस्ट की 66 फीसदी हिस्सेदारी है.
कंपनी का बोर्ड रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों का पालन करने के लिए टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करना चाहता है. वहीं, टाटा ट्रस्ट इसके खिलाफ है और लिस्टिंग के विकल्प तलाशना चाहता है. टाटा ट्रस्ट ने एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का भी विरोध किया है.
आंध्र प्रदेश से गुजरा चक्रवात मुरसु, तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई
चक्रवात मुरसु मंगलवार तड़के 3.30 से 5.30 बजे के बीच आंध्र प्रदेश की दक्षिणी तटरेखा से गुजरा. इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं. चक्रवात मुरसु की वजह से दक्षिणी तटीय क्षेत्र में सोमवार से भारी बारिश हो रही है. कई जिलों में मंगलवार को भी बारिश के जारी रहने का अनुमान है.
चक्रवात की वजह से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में सैकड़ों पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंबों को नुकसान पहुंचा और फसल भी खराब हुई. भारी बारिश को देखते हुए राज्य के आठ जिलों में स्कूलों और कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर दी गई है. मौसम विभाग ने अगले 12 घंटों में तटीय इलाकों में भारी बारिश होने का अनुमान जताया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बात की है और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है. उन्होंने लिखा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें जमीनी स्तर पर राहत कार्य कर रही हैं और चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की मदद कर रही हैं.


