भारतीय वायुसेना को आज मिलेगा नया प्रमुख, आशुतोष दीक्षित संभालेंगे कमान; एपी सिंह होंगे सेवानिवृत्त
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में पदभार संभालेंगे। वह मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे, जो करीब 25 महीने के कार्यकाल और भारतीय वायुसेना में लगभग 42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना को शनिवार, 31 अक्टूबर को नया प्रमुख मिलने जा रहा है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में पदभार संभालेंगे। वह मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे, जो करीब 25 महीने के कार्यकाल और भारतीय वायुसेना में लगभग 42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही वायुसेना के शीर्ष स्तर पर नई जिम्मेदारियों का दौर शुरू होगा। विदा हो रहे वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह को शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित रेस कोर्स वायुसेना स्टेशन के परेड मैदान में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। वहीं, नए वायुसेना प्रमुख आशुतोष दीक्षित को एक नवंबर को इसी स्थान पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका के लिए एपी सिंह की सराहना
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह को भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने और ऑपरेशन सिंदूर के संचालन में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। वह अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों के लिए भी चर्चा में रहे हैं। उनके कार्यकाल में वायुसेना की तैयारियों, आधुनिक तकनीक और सैन्य क्षमताओं को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विदा हो रहे वायुसेना प्रमुख की विशिष्ट सेवाओं, अनुकरणीय नेतृत्व और देश के प्रति योगदान की सराहना की है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ सिंह ने 26 अक्टूबर को उनसे मुलाकात के दौरान राष्ट्र की 42 वर्षों तक गौरवशाली सेवा के लिए उन्हें उचित विदाई दी। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के सफल संचालन और भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को मजबूत करने में उनकी भूमिका की भी प्रशंसा की। इससे पहले शुक्रवार को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और उनकी पत्नी सरिता सिंह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर हैं।
स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी
नए वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के सामने भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। उन्हें स्वदेशी विमान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। हल्के लड़ाकू विमान एलसीए तेजस समेत देश में विकसित किए जा रहे विमानों और रक्षा उपकरणों की परियोजनाओं को गति देने में उनकी भूमिका रही है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की सरकार की नीति के बीच उनसे स्वदेशी तकनीक और सैन्य उपकरणों के विकास पर विशेष ध्यान देने की उम्मीद है। वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के अनुरूप तैयारी करने और तकनीकी विकास को गति देने जैसे विषय भी उनके कार्यकाल में अहम रहेंगे।
3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव
एयर मार्शल दीक्षित को छह दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण परिचालन और प्रशासनिक पदों पर काम किया। कमांडिंग ऑफिसर के रूप में उन्होंने नंबर 9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से लैस करने की जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र के एक अग्रिम लड़ाकू एयरबेस और दक्षिणी क्षेत्र के एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान संभाली। वह दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर भी रहे। इसके अलावा वायु मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (परियोजना) और सहायक वायुसेना प्रमुख (योजना) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं।
कई सैन्य सम्मानों से हो चुके हैं सम्मानित
देश के प्रति विशिष्ट सेवाओं के लिए एयर मार्शल दीक्षित को कई सैन्य सम्मान मिल चुके हैं। इनमें वर्ष 2006 का वायु सेना मेडल, 2011 का विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 का अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 का परम विशिष्ट सेवा मेडल शामिल हैं।
इंदरपाल सिंह वालिया बनेंगे नए उप प्रमुख
वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव के तहत एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया अगले वायुसेना उप प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह फिलहाल पूर्वी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत हैं। वह एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित की जगह लेंगे, जो अब वायुसेना प्रमुख का पद संभालेंगे। इस नेतृत्व परिवर्तन के साथ भारतीय वायुसेना में नई कमान की शुरुआत होगी। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण, सैन्य आधुनिकीकरण और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच नए नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर देश की नजर रहेगी।


