Top
Begin typing your search above and press return to search.

भारत में 49.6 करोड़ लोग आए गरीबी से बाहर; रोजगार के 13.4 करोड़ नए अवसर, पीएम मोदी ने कहा, ऐतिहासिक उपलब्धि

विश्व बैंक ने अक्टूबर 2026 में 'इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' नाम से रिपोर्ट जारी की थी। इसमें भारत में गरीबी के स्तर में आई गिरावट का विस्तृत आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में देश की अत्यधिक गरीबी दर 27.1 प्रतिशत थी, जो 2023 तक घटकर 2.6 प्रतिशत हो गई।

भारत में 49.6 करोड़ लोग आए गरीबी से बाहर; रोजगार के 13.4 करोड़ नए अवसर, पीएम मोदी ने कहा, ऐतिहासिक उपलब्धि
X

नई दिल्ली :भारत में गरीबी कम करने के प्रयासों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बड़ी उपलब्धि का दावा किया है। विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में अत्यधिक गरीबी की दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2011 में भारत की अत्यधिक गरीबी दर 27.1 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर महज 2.6 प्रतिशत रह गई। प्रधानमंत्री के मुताबिक, यह बदलाव करोड़ों लोगों के जीवन में आए आर्थिक सुधार और बढ़ते अवसरों को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में रोजगार के 13.4 करोड़ नए अवसर पैदा हुए हैं। शनिवार को इंस्टाग्राम पर पोस्ट साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गरीबी खत्म करना उनकी सरकार के लिए महज राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक मजबूत प्रतिबद्धता है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत की बड़ी उपलब्धि

विश्व बैंक ने अक्टूबर 2026 में 'इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' नाम से रिपोर्ट जारी की थी। इसमें भारत में गरीबी के स्तर में आई गिरावट का विस्तृत आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में देश की अत्यधिक गरीबी दर 27.1 प्रतिशत थी, जो 2023 तक घटकर 2.6 प्रतिशत हो गई। इस तरह करीब 12 वर्षों में अत्यधिक गरीबी में लगभग 90 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस अवधि में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आए। विश्व बैंक ने अत्यधिक गरीबी मापने के लिए प्रतिदिन तीन डॉलर और निम्न-मध्यम आय वर्ग की गरीबी के आकलन के लिए 4.20 डॉलर की आय सीमा निर्धारित की है। ये आंकड़े वर्ष 2021 की क्रय शक्ति समता (पीपीपी) पर आधारित हैं। विश्व बैंक के मुताबिक, भारत ने आर्थिक और गैर-आर्थिक, दोनों क्षेत्रों में गरीबी कम करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।

मोदी बोले- गरीबी हटाना केवल नारा नहीं, सरकार का संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी ने इंस्टाग्राम पर रिपोर्ट के निष्कर्ष साझा करते हुए लिखा, 'गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट, अवसरों में पीढ़ीगत वृद्धि।' उन्होंने कहा कि गरीबी हटाना उनके लिए कभी केवल एक नारा नहीं रहा, बल्कि यह एक दृढ़ प्रतिबद्धता है। प्रधानमंत्री ने आर्थिक असमानता में कमी को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक, आय और आर्थिक असमानता को मापने वाले गिनी इंडेक्स में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है और यह घटकर 23.0 पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिदिन 4.20 डॉलर से कम आय पर जीवनयापन करने वाली आबादी का अनुपात भी 2011 के 57.7 प्रतिशत से घटकर 2023 में 16.1 प्रतिशत रह गया। अनुमान है कि 2028 तक यह आंकड़ा और कम होकर 12.1 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

छह साल में रोजगार के 13.4 करोड़ नए अवसर

प्रधानमंत्री मोदी ने रोजगार के मोर्चे पर भी भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में देश में 13.4 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। यह संख्या इसी अवधि में कामकाजी उम्र की आबादी में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी है। रोजगार के नए अवसरों में ग्रामीण क्षेत्रों और महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना गया है। 2017 से 2023 के बीच बड़ी संख्या में महिलाएं पहली बार आय अर्जित करने वाले कामों से जुड़ीं। इससे ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन मिला।

गरीबी कम होने के पीछे ये तीन प्रमुख कारण

1. लोगों की आय और खर्च करने की क्षमता में सुधार: आम लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ उनकी खरीदारी और उपभोग क्षमता बढ़ी है। इससे परिवारों के जीवन स्तर में बदलाव आया और आर्थिक गतिविधियों को गति मिली।

2. ग्रामीण महिलाओं की रोजगार में बढ़ती भागीदारी: गांवों में महिलाओं को रोजगार और आय अर्जित करने के नए अवसर मिले। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं की वित्तीय भागीदारी भी बढ़ी।

3. सरकारी योजनाओं से गरीब परिवारों को सहायता: मुफ्त राशन और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) जैसी योजनाओं ने कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों को राहत पहुंचाई। बैंक खातों में सीधे सरकारी सहायता पहुंचने से जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद मिली।

2028 तक गरीबी में और गिरावट का अनुमान

विश्व बैंक की रिपोर्ट के निष्कर्ष भारत में गरीबी उन्मूलन की दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित करते हैं। विशेष रूप से अत्यधिक गरीबी की दर में आई गिरावट को महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि, आय के स्तर, रोजगार की गुणवत्ता और क्षेत्रीय आर्थिक असमानताओं जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। रिपोर्ट में 2028 तक गरीबी के अनुपात में और कमी आने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में आने वाले वर्षों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, ग्रामीण आय मजबूत करना और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना गरीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण बना रहेगा।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it