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सिंगापुर में भारत- नीदरलैंड के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने को लेकर द्विपक्षीय वार्ता

भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शनिवार को नीदरलैंड के रक्षा प्रमुख ओनो आइचेल्सहाइम से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय वार्ता भी की। तीन दिवसीय शांगरी-ला डायलॉग के दूसरे दिन यह मुलाकात हुई।

सिंगापुर में भारत- नीदरलैंड के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने को लेकर द्विपक्षीय वार्ता
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सिंगापुर। भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शनिवार को नीदरलैंड के रक्षा प्रमुख ओनो आइचेल्सहाइम से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय वार्ता भी की। तीन दिवसीय शांगरी-ला डायलॉग के दूसरे दिन यह मुलाकात हुई।

रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी जानकारी दी। बताया कि बैठक के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के विभिन्न उपायों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों और द्विपक्षीय प्रशिक्षण अभ्यासों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

वार्ता में रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को और गहरा करने तथा दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच आपसी समन्वय और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

इससे पहले राजेश कुमार सिंह ने यूरोपियन एक्सर्टनल एक्शन सर्विस यानी यूरोपीय बाह्य कार्रवाई सेवा (ईईएएस) की महासचिव बेलेन मार्टिनिज कॉर्नबोनेल और यूरोपीय संघ सैन्य समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एनरिको बर्दुआनी के साथ भी बातचीत की।

रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय ने बताया कि इस बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक संवाद को आगे बढ़ाया गया। चर्चा में साझा सुरक्षा हितों और रक्षा तथा रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।

29 मई को सिंह ने नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) की मिलिट्री कमेटी के चेयरमैन एडमिरल ज्यूसेपे कैवो ड्रैगन और अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पैपारो से भी मुलाकात की थी। इस दौरान सैन्य सहयोग बढ़ाने, रणनीतिक बातचीत को मजबूत करने, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने और नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर चर्चा हुई थी।

सिंगापुर में आयोजित हो रहे शांगरी-ला डायलॉग में कई देशों के रक्षा मंत्री, सैन्य प्रमुख, और नीति निर्माता शामिल हुए हैं। यहां बड़े स्तर पर चर्चा सत्रों के साथ-साथ अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय बैठकें भी हो रही हैं। इस मंच पर एशिया-प्रशांत, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट और अन्य क्षेत्रों के नीति-निर्माता क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों और उनसे निपटने की रणनीतियों पर चर्चा करते हैं।

शांगरी-ला डायलॉग एशिया का प्रमुख रक्षा एवं सुरक्षा शिखर सम्मेलन है, जिसे इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) सिंगापुर में आयोजित करता है। इसे 'एशिया सुरक्षा शिखर सम्मेलन' भी कहा जाता है।

शांगरी-ला डायलॉग के दौरान राजेश कुमार सिंह ने कई प्रमुख थिंक टैंक और अकादमिक विशेषज्ञों से भी बातचीत की। चर्चा का फोकस इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने, रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने और नई तकनीकों में साझेदारी पर रहा।


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