Top
Begin typing your search above and press return to search.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान को भेजा न्योता, 20 नवंबर से दिल्ली में होगी SCO की बैठक

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत ने स्थापित परंपरा के अनुरूप एससीओ के सभी सदस्य देशों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा संगठन के संवाद साझेदारों और एक पर्यवेक्षक को भी निमंत्रण भेजा गया है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान को भेजा न्योता, 20 नवंबर से दिल्ली में होगी SCO की बैठक
X

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव के बीच नई दिल्ली ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की आगामी बैठक के लिए पाकिस्तान को भी आमंत्रित किया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने एससीओ के सभी सदस्य देशों को 20 से 22 नवंबर तक नई दिल्ली में होने वाले सभ्यतागत संवाद मंच में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। इसमें पाकिस्तान भी शामिल है। पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला ऐसा अवसर हो सकता है, जब भारत में आयोजित होने वाले किसी कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान के किसी वरिष्ठ मंत्री को आमंत्रित किया गया है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को भी इस बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उनके भारत आने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

एससीओ की बैठक के लिए सभी सदस्य देशों को निमंत्रण

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत ने स्थापित परंपरा के अनुरूप एससीओ के सभी सदस्य देशों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा संगठन के संवाद साझेदारों और एक पर्यवेक्षक को भी निमंत्रण भेजा गया है। जायसवाल ने यह जानकारी उस सवाल के जवाब में दी, जिसमें पूछा गया था कि क्या सभ्यतागत संवाद मंच की बैठक में पाकिस्तान के किसी मंत्री को भी बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि एससीओ के सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करना स्थापित प्रक्रिया का हिस्सा है। एससीओ क्षेत्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है, जिसमें सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है। ऐसे में आगामी बैठक को सदस्य देशों के बीच संवाद का अवसर माना जा रहा है। भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के किसी वरिष्ठ मंत्री को भारत में आयोजित कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया जाना कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस निमंत्रण को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में किसी बड़े बदलाव का संकेत मानना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

जयशंकर अटलांटा में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में होंगे शामिल

विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के आगामी अमेरिकी दौरे की जानकारी भी दी है। जयशंकर शुक्रवार से अमेरिका के अटलांटा में आयोजित होने वाली जी-20 विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वैश्विक मुद्दों और सदस्य देशों के बीच सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है। जी-20 दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का मंच है, जहां अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग, वैश्विक चुनौतियों और विभिन्न देशों के बीच समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता है। भारत की भागीदारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वैश्विक राजनीति और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। जयशंकर जी-20 बैठक से इतर क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर काम करता है। जी-20 और क्वाड की बैठकों में भारत की भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई दिल्ली की कूटनीतिक सक्रियता का पता चलता है। इन बैठकों के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी।

पश्चिम एशिया संघर्ष में 22 भारतीयों की मौत

विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत पर भी चिंता जताई है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण अब तक 22 भारतीयों की जान जा चुकी है। इनमें 14 नाविक भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब में भी तीन भारतीयों की मौत हुई है। भारत पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर करीबी नजर रख रहा है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण भारतीय नागरिकों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। खासकर समुद्री मार्गों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। इसके अलावा, भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक संपर्कों के लिहाज से भी इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता जरूरी है। विदेश मंत्रालय की ओर से भारतीय नागरिकों की मौत का आंकड़ा ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्रीय संघर्ष के प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन तक पहुंच रहे हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीयों की रिहाई के प्रयास

विदेश मंत्रालय ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में फंसे भारतीय नागरिकों का मुद्दा भी उठाया। रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत दोनों देशों के अधिकारियों के संपर्क में है, ताकि उन भारतीयों की रिहाई सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा सकें, जिन्हें विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। विदेश में रोजगार की तलाश में गए कुछ भारतीयों के युद्ध क्षेत्र तक पहुंचने के मामले पहले भी सामने आए हैं। ऐसे मामलों में उनकी सुरक्षित वापसी भारत के लिए प्राथमिकता बनी हुई है। भारत संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत के जरिए इन नागरिकों की स्थिति का पता लगाने और उनकी रिहाई के प्रयास कर रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां और दोनों देशों के साथ समन्वय महत्वपूर्ण हैं।

कूटनीति के मोर्चे पर भारत की सक्रियता

एससीओ की बैठक के लिए पाकिस्तान को निमंत्रण, जी-20 और क्वाड बैठकों में भारत की भागीदारी तथा पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीयों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे विदेश नीति के अलग-अलग आयामों को सामने लाते हैं। एक ओर भारत क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी वापसी पर भी ध्यान दे रहा है। आने वाले दिनों में एससीओ बैठक में पाकिस्तान की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय बैठकों के नतीजों पर नजर रहेगी।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it