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भारत: विरोध प्रदर्शन के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच शुरू

चुनाव आयोग प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहे.

भारत: विरोध प्रदर्शन के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच शुरू
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चुनाव आयोग प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहे. इस बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच शुरू कर दी

चुनाव आयोग प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा. दिल्ली और मुंबई में हजारों प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान लाखों पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.

विरोध प्रदर्शन की शुरुआत शुक्रवार को हुई थी. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण या एसआईआर अभियान में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है. आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची से दोहराव, मृत अथवा अयोग्य नामों को हटाने और चुनावी प्रक्रिया स्वच्छ बनाए रखने के लिए चलाई गई थी.

पुलिस पर आरोप

रविवार को दिल्ली में प्रदर्शनकारी शाम के समय जुटना शुरू हुए, जिसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया. पिछले दो दिनों के दौरान भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जमा होने से रोका था और दर्जनों लोगों को बसों में बैठाकर अन्य स्थानों पर ले जाया गया था. कई प्रदर्शनकारियों को बाद में रिहा कर दिया गया, जबकि कुछ के खिलाफ राजधानी में बड़े जमावड़ों पर रोक संबंधी आदेशों के उल्लंघन के आरोप में मामले दर्ज किए गए.

इस बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच शुरू करने की घोषणा की है. पुलिस के अनुसार, शनिवार को जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए.

दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाएगी. सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें धक्का दिया और अनुचित तरीके से छुआ.

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के हित में काम करने का आरोप लगाया है. विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों से सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचा है. चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है.

देशभर में विरोध

मुंबई में विपक्षी नेताओं राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया. दोनों नेताओं ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को रद्द करने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की. राज ठाकरे ने कहा कि देश में सत्ता में कौन रहेगा और विपक्ष में कौन बैठेगा, इसका फैसला जनता को करना चाहिए, न कि चुनाव आयोग को.

दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल कई लोगों ने दावा किया कि उनके क्षेत्रों के अनेक लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने इसे अपने मतदान अधिकारों से वंचित किए जाने का मामला बताया.

विरोध आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है. विपक्षी दलों के गठबंधन ने सोमवार को चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने और उसके बाद देशभर में "लोकतंत्र बचाओ" रैलियां आयोजित करने की घोषणा की है.

वामपंथी छात्र संगठनों और अन्य समूहों ने भी राजधानी में अपने कार्यक्रमों का ऐलान किया है. एक छात्र संगठन से जुड़ी कार्यकर्ता ने प्रदर्शनकारियों से इंडिया गेट तक मार्च करने की अपील की. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि महिलाएं सड़कों से लेकर विरोध प्रदर्शन स्थलों तक कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं.

तेज हो सकता है आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी भी इस आंदोलन में सक्रिय है. पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के दौरान लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की. पार्टी ने 10 अक्टूबर को नई दिल्ली में युवाओं की बड़ी लामबंदी का भी आह्वान किया है.

चुनाव आयोग प्रमुख ज्ञानेश कुमार ने अब तक अपने इस्तीफे की मांगों या जारी प्रदर्शनों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. आयोग ने हालांकि शुक्रवार को अपने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि यदि पात्र मतदाताओं के नाम गलती से मतदाता सूची से हट गए हैं तो उनका पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए.

वर्तमान विरोध प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में उभरे युवा-नेतृत्व वाले आंदोलनों की एक नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है. हाल के महीनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्रों और युवाओं के आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बने रहे हैं.


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