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India EV Trade Deal: इम्पोर्टेड लग्जरी कारों पर टैरिफ 110% से घटकर 10%, प्रीमियम शराब सस्ती होगी; पीएम मोदी ने बताया ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
यह समझौता न केवल भारत और यूरोप के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार और उपभोक्ताओं के लिए भी बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। खासतौर पर यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों पर लगने वाले भारी-भरकम आयात शुल्क में बड़ी कटौती से महंगी कारें अब अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं।

नई दिल्ली। करीब दो दशकों के लंबे इंतजार, कई दौर की बातचीत और अटकी–टूटी वार्ताओं के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार अपने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) को अंतिम रूप दे दिया है। इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा 16वें भारत–EU शिखर सम्मेलन के दौरान की गई, जिसे वैश्विक व्यापार जगत की सबसे बड़ी और प्रभावशाली संधियों में से एक माना जा रहा है। यह समझौता न केवल भारत और यूरोप के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार और उपभोक्ताओं के लिए भी बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। खासतौर पर यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों पर लगने वाले भारी-भरकम आयात शुल्क में बड़ी कटौती से महंगी कारें अब अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं।
पीएम मोदी का बड़ा बयान: ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी अब तक का सबसे अहम और बड़ा व्यापारिक समझौता बताया। एफटीए की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह करार दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी की नई मिसाल पेश करता है। उन्होंने कहा, “यह मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और दुनिया भर के व्यवसायों व निवेशकों के लिए भारत में भरोसे को और बढ़ाएगा।” प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह डील भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक ताकत और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी मजबूत होती भूमिका का प्रतीक है।
भारत–EU एफटीए क्यों है इतना अहम?
यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक ब्लॉकों में से एक है, जबकि भारत तेजी से उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था है। ऐसे में दोनों के बीच यह समझौता व्यापार को आसान बनाएगा। निवेश को बढ़ावा देगा। तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में सहयोग मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एफटीए भारत के निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे और ज्यादा खोल देगा, वहीं यूरोपीय कंपनियों को भारत जैसे विशाल उपभोक्ता बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। इस समझौते की सबसे चर्चित और अहम बात है यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क में ऐतिहासिक कटौती।
कितनी कटौती हुई?
अब तक यूरोप से आयात होने वाली कारों पर भारत में करीब 110% तक आयात शुल्क लगता था। एफटीए के तहत इसे घटाकर सिर्फ 10% कर दिया गया है।
क्या यह छूट सभी कारों पर लागू होगी?
नहीं। इस छूट के साथ एक अहम शर्त भी जुड़ी है। यह रियायत सालाना 2,50,000 (2.5 लाख) गाड़ियों के कोटा तक सीमित होगी।
यानी हर साल यूरोप से आने वाली पहली 2.5 लाख कारों पर ही कम टैक्स लगेगा।
किन कंपनियों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस फैसले से फॉक्सवैगन, रेनो, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी जैसी यूरोपीय कार कंपनियों को सीधा फायदा होगा। अब तक ऊंचे टैक्स के कारण ये कंपनियां भारत में सीमित संख्या में और बेहद ऊंची कीमतों पर कारें बेचती थीं। टैक्स कम होने से कीमतें घटेंगी, बिक्री बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा तेज होगी।
भारतीय ग्राहकों पर क्या होगा असर?
ऑटो सेक्टर के जानकारों के मुताबिक, इस एफटीए के बाद लग्जरी कारें पहले से कहीं ज्यादा सुलभ होंगी। भारतीय ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। प्रीमियम कार सेगमेंट में कीमतों का दबाव कम होगा। हालांकि, घरेलू कार निर्माताओं के लिए यह चुनौती भी बन सकता है, क्योंकि उन्हें अब यूरोपीय ब्रांड्स से ज्यादा कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को क्यों नहीं मिली राहत?
इस बड़ी डील के बीच एक अहम पेंच भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, इस एफटीए में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को फिलहाल कोई टैक्स छूट नहीं दी गई है।
इसका मतलब क्या है?
टेस्ला या अन्य यूरोपीय EV कंपनियों को भारत में अब भी मौजूदा आयात शुल्क चुकाना होगा। यानी फिलहाल इलेक्ट्रिक कारों की कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत सरकार घरेलू ईवी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इस सेक्टर में जल्दबाजी में छूट देने से बच रही है।
2007 से 2026 तक: समझौते का लंबा सफर
भारत–EU एफटीए का सफर आसान नहीं रहा।
2007: पहली बार बातचीत शुरू हुई
2013: मतभेदों के चलते वार्ता ठप हो गई
जून 2022: बातचीत दोबारा शुरू हुई
2026: आखिरकार समझौता अंतिम रूप में पहुंचा
करीब 19 साल के इस लंबे सफर में कई सरकारें बदलीं, वैश्विक हालात बदले, लेकिन अब जाकर यह ऐतिहासिक डील साकार हुई है।
एशिया में भारत की खास जगह
इस समझौते के साथ भारत जापान और दक्षिण कोरिया के बाद एशिया का तीसरा देश बन गया है, जिसने यूरोपीय संघ के साथ इतना व्यापक मुक्त व्यापार समझौता किया है। यह भारत की कूटनीतिक और आर्थिक ताकत को भी दर्शाता है।
भारत–EU व्यापार का गणित
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और EU के बीच कुल व्यापार: 190 अरब डॉलर
इसमें से माल व्यापार: करीब 136 अरब डॉलर। इस एफटीए के बाद व्यापार में और तेजी आने की उम्मीद है। निर्यात–आयात दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है। निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
उद्योग और निवेशकों की प्रतिक्रिया
व्यापार जगत और उद्योग संगठनों ने इस समझौते का स्वागत किया है। ऑटो सेक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योगों को इससे बड़े फायदे की उम्मीद है। निवेशकों का मानना है कि यह एफटीए भारत को वैश्विक निवेश हब के रूप में और मजबूत करेगा।
वैश्विक आर्थिक रणनीति का बड़ा पड़ाव भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह मुक्त व्यापार समझौता सिर्फ एक आर्थिक करार नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति का बड़ा पड़ाव है। यूरोपीय कारों पर टैक्स में भारी कटौती से जहां भारतीय ग्राहकों को सीधा फायदा मिलेगा, वहीं व्यापार और निवेश के नए रास्ते भी खुलेंगे। हालांकि, ईवी सेक्टर को लेकर अभी सवाल बने हुए हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह डील भारत–EU रिश्तों को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह वाकई ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ है।
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