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महमूद गजनवी को भारतीय लुटेरा बताने पर घिरे हामिद अंसारी, भाजपा ने बोला हमला

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि विदेशी हमलावरों और लुटेरों के प्रति अंसारी का “स्नेह” उनकी “बीमार मानसिकता” को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह समस्या “तीन एम—मुगल, मैकाले और मार्क्स” की मानसिकता का परिणाम है।

महमूद गजनवी को भारतीय लुटेरा बताने पर घिरे हामिद अंसारी,  भाजपा ने बोला हमला
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नई दिल्ली। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक हालिया बयान को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। एक साक्षात्कार में अंसारी ने कहा था कि इतिहास की पुस्तकों में महमूद गजनवी समेत जिन लोगों को विदेशी हमलावर और लुटेरे बताया गया है, उन्हें “भारतीय लुटेरा” कहा जाना चाहिए, क्योंकि वे “बाहर से नहीं आए थे” और उस समय की राजनीतिक संरचना में उन्हें भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। अंसारी की इस टिप्पणी के बाद भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कांग्रेस नेतृत्व से स्पष्ट रुख मांगते हुए कई सवाल उठाए हैं।

क्या कहा था हामिद अंसारी ने?

साक्षात्कार में अंसारी ने कहा कि इतिहास को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय उस दौर की वास्तविकताओं को समझना चाहिए। उनके अनुसार, जिन शासकों या आक्रमणकारियों को आज “विदेशी” बताया जाता है, वे उस समय की राजनीतिक व्यवस्था के तहत भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा बन चुके थे। उन्होंने कहा कि “राजनीतिक रूप से यह कहना आसान है कि उन्होंने यह और वह नष्ट कर दिया, लेकिन वे सभी भारतीय थे।” अंसारी के इस बयान को भाजपा ने ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और आक्रमणकारियों का महिमामंडन करने का प्रयास बताया है।

भाजपा का तीखा हमला

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि विदेशी हमलावरों और लुटेरों के प्रति अंसारी का “स्नेह” उनकी “बीमार मानसिकता” को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह समस्या “तीन एम—मुगल, मैकाले और मार्क्स” की मानसिकता का परिणाम है। त्रिवेदी ने कहा कि जैसे ब्रिटिश वायसराय किंग या क्वीन के प्रतिनिधि के रूप में शासन करते थे, उसी तरह मुगल सम्राट भी बगदाद के खलीफा के प्रतिनिधि माने जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास में लुटेरों से खुद को जोड़कर समाज के एक वर्ग ने पूरे भारत को ही लुटेरों से जोड़ने की कोशिश की है। भाजपा ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी सवाल किया कि क्या वे अंसारी के विचारों से सहमत हैं, विशेषकर जब महमूद गजनवी पर मंदिरों को तोड़ने और हजारों लोगों की हत्या के आरोप इतिहास में दर्ज हैं।

सोशल मीडिया पर भी घमासान

भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने ‘एक्स’ पर अंसारी की टिप्पणियों का वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस का “ईकोसिस्टम” ऐतिहासिक हमलावरों का महिमामंडन करता है। उन्होंने कहा कि महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया था और ऐसे व्यक्तियों की छवि को सामान्य बनाने की कोशिश हिंदुओं की आस्था का अपमान है। भाजपा नेता सीआर केसवन ने कहा कि आठवीं सदी से लेकर मुगल शासन तक हिंदू धार्मिक स्थलों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस इन बयानों से सहमत है, जो उनके अनुसार ऐतिहासिक क्रूरता को सामान्य बनाने की कोशिश करते हैं। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस को “आधुनिक इंडियन मुस्लिम लीग” बताते हुए आरोप लगाया कि वह बाबर और औरंगजेब जैसे शासकों का महिमामंडन करती रही है।

ऐतिहासिक बहस बनाम राजनीतिक विमर्श

इतिहासकारों के बीच महमूद गजनवी और अन्य मध्यकालीन शासकों की भूमिका को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। कुछ विद्वान उन्हें मुख्य रूप से राजनीतिक-सैन्य शासक मानते हैं, जबकि अन्य उनके अभियानों को धार्मिक कट्टरता और आर्थिक लूट से जोड़ते हैं। राजनीतिक स्तर पर यह मुद्दा अक्सर सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ जाता है। भाजपा ने अपने बयान में इसे हिंदू आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावी माहौल में और तेज हो सकता है, क्योंकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मुद्दे अक्सर राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन जाते हैं।

राजनीतिक असर

पूर्व उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति के बयान को लेकर उठा विवाद सियासी रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। भाजपा इसे वैचारिक मुद्दा बनाकर कांग्रेस पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है, जबकि विपक्ष इसे बयान की गलत व्याख्या बताने की कोशिश कर सकता है। स्पष्ट है कि इतिहास की व्याख्या को लेकर यह विवाद केवल अकादमिक बहस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक मंचों पर भी गूंजता रहेगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह मुद्दा संसद और चुनावी सभाओं तक पहुंचता है या संवाद के जरिए शांत होता है।


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