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WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त, साइबर अपराध की आशंका के बीच मांगा जवाब; AI कानून पर भी संकेत

सीआईआई साइबर सिक्योरिटी समिट के दौरान आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग सिस्टम साइबर सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मुद्दा बन सकता है। इस फीचर के जरिए उपयोगकर्ता बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से संवाद कर सकते हैं।

WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त, साइबर अपराध की आशंका के बीच मांगा जवाब; AI कानून पर भी संकेत
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नई दिल्ली: भारत सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रस्तावित और मौजूदा यूजरनेम फीचर को लेकर अपनी चिंता सार्वजनिक रूप से जाहिर की है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि इस फीचर का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी नकली पहचान बनाकर लोगों को निशाना बना सकते हैं। इसी कारण सरकार ने WhatsApp, Telegram और Signal से इस सुविधा के संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

यूजरनेम फीचर पर सरकार की चिंता

सीआईआई साइबर सिक्योरिटी समिट के दौरान आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग सिस्टम साइबर सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मुद्दा बन सकता है। इस फीचर के जरिए उपयोगकर्ता बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से संवाद कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे पहचान छिपाकर धोखाधड़ी, ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों को अंजाम देना आसान हो सकता है। कृष्णन ने कहा कि इसी वजह से सरकार ने संबंधित कंपनियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे इस फीचर के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय लागू करेंगी।

सुप्रीम कोर्ट में भी उठा है मुद्दा

आईटी सचिव ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी साइबर अपराध के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, यूजरनेम आधारित पहचान अपराधियों के लिए एक नया माध्यम बन सकती है, इसलिए सरकार इस विषय को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार के साथ सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

WhatsApp, Telegram और Signal को नोटिस

सरकार ने इस सप्ताह Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp को नोटिस जारी कर यूजरनेम फीचर पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही कंपनी से कहा गया है कि सरकार की चिंताओं का समाधान होने तक इस फीचर को लागू न किया जाए। इसके बाद Telegram और Signal को भी नोटिस भेजे गए हैं। इन दोनों प्लेटफॉर्म पर पहले से यूजरनेम आधारित पहचान की सुविधा उपलब्ध है। सरकार इन सेवाओं में मौजूद सुरक्षा उपायों और उपयोगकर्ता सत्यापन प्रणाली की भी समीक्षा कर रही है।

मंत्रालय और Meta के बीच हुई बैठक

सूत्रों के अनुसार, सरकारी नोटिस के बाद शुक्रवार को Meta की एक टीम ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में मंत्रालय ने कंपनी को सरकार की साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताओं से अवगत कराया। चर्चा का मुख्य विषय यह था कि यूजरनेम फीचर लागू होने की स्थिति में पहचान सत्यापन, शिकायत निवारण और दुरुपयोग रोकने के लिए क्या अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जाएगी।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स डेटा लीक की जांच जारी

आईटी सचिव एस. कृष्णन ने एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर जानकारी देते हुए कहा कि सरकार टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में कथित डेटा लीक की जांच कर रही है। इस मामले की सूचना इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) को भी दे दी गई है, जो देश की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एक रैंसमवेयर समूह ने डार्क वेब पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े कथित दस्तावेज, आपूर्ति श्रृंखला की जानकारी और एप्पल के आगामी उत्पादों से संबंधित कुछ सामग्री साझा की है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।

AI के लिए अलग कानून पर सरकार का संकेत

एस. कृष्णन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग पर भी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत AI के लिए एक समर्पित कानूनी ढांचे पर गंभीरता से विचार करे। उनके अनुसार, वर्तमान कानूनों के जरिए अब तक डीपफेक, एआई जनित सामग्री और अन्य डिजिटल चुनौतियों से जुड़े कई मामलों का समाधान किया गया है, लेकिन भविष्य में एआई तकनीक के व्यापक उपयोग को देखते हुए अलग कानून की आवश्यकता महसूस हो सकती है।

सरकार का मानना है कि तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा, डेटा संरक्षण और डिजिटल विश्वास बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में आने वाले समय में साइबर सुरक्षा और एआई नियमन से जुड़े नए नीतिगत कदम देखने को मिल सकते हैं।


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