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गौतम अदाणी को अमेरिकी कोर्ट से बड़ी राहत, रिश्वत-धोखाधड़ी केस हुआ खारिज; फैसले पर क्या बोले उद्योगपति?

गौतम अदाणी और अन्य लोगों के खिलाफ अमेरिका में दर्ज मामला भारत में सौर ऊर्जा से जुड़े अनुबंधों में कथित रिश्वतखोरी की योजना पर आधारित था। अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि इन अनुबंधों को हासिल करने के लिए रिश्वत देने की योजना बनाई गई और इस प्रक्रिया में अमेरिकी निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह किया गया।

गौतम अदाणी को अमेरिकी कोर्ट से बड़ी राहत, रिश्वत-धोखाधड़ी केस हुआ खारिज; फैसले पर क्या बोले उद्योगपति?
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नई दिल्ली: उद्योगपति गौतम अदाणी को अमेरिका में चल रहे एक बड़े कानूनी मामले में राहत मिली है। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले की अमेरिकी जिला अदालत ने अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक आरोपों को खारिज करने की अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) की मांग स्वीकार कर ली है। ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज निकोलस गारौफिस ने अभियोजन पक्ष की याचिका पर सुनवाई के बाद मामले को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने क्यों खारिज किया मामला?

अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत से गौतम अदाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामले को समाप्त करने की मांग की थी। सोमवार को जज गारौफिस ने अभियोजकों की इस मांग को मंजूरी दे दी। अदालत ने कहा कि संघीय अभियोजकों के पास किसी आपराधिक मामले को वापस लेने का अधिकार है और ऐसे फैसलों की न्यायिक समीक्षा में अदालत की भूमिका सीमित होती है। जज ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस निष्कर्ष से संतुष्ट हैं कि अदाणी समूह की कथित निवेश प्रतिबद्धता का अमेरिकी न्याय विभाग के मामले वापस लेने के निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

भारत में सौर ऊर्जा अनुबंधों से जुड़ा था मामला

गौतम अदाणी और अन्य लोगों के खिलाफ अमेरिका में दर्ज मामला भारत में सौर ऊर्जा से जुड़े अनुबंधों में कथित रिश्वतखोरी की योजना पर आधारित था। अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि इन अनुबंधों को हासिल करने के लिए रिश्वत देने की योजना बनाई गई और इस प्रक्रिया में अमेरिकी निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह किया गया। अमेरिकी न्याय विभाग ने बाद में इस मामले को समाप्त करने का रुख अपनाया। विभाग ने अदालत में कहा कि विस्तृत समीक्षा के बाद उसे मुकदमा जारी रखना उचित नहीं लगा।

DoJ ने कहा- मामला शुरू ही नहीं होना चाहिए था

अमेरिकी न्याय विभाग ने 4 जुलाई को अदालत में दाखिल अपनी विस्तृत दलील में कहा था कि अदाणी और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ यह आपराधिक मामला शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था। विभाग ने आरोपों को स्थायी रूप से खारिज करने का अनुरोध किया था। DoJ का तर्क था कि मामला मुख्य रूप से भारत से संबंधित था और अभियोजन को आगे बढ़ाना न्याय के हित में नहीं था। विभाग ने यह भी कहा कि मामले की परिस्थितियों की व्यापक समीक्षा के बाद आरोप वापस लेने का निर्णय उचित पाया गया।

जज ने निवेश के मुद्दे पर भी की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान जज निकोलस गारौफिस ने अभियोजन पक्ष से आरोप वापस लेने के कारणों को लेकर सवाल किए थे। इसके बाद DoJ की ओर से अदालत में विस्तृत स्पष्टीकरण दिया गया। अदालत ने अंततः यह माना कि आरोप वापस लेने का सरकारी फैसला अदाणी समूह की किसी कथित निवेश प्रतिबद्धता से प्रभावित नहीं था। इस आधार पर अदालत ने अभियोजन पक्ष की मांग को स्वीकार कर लिया।

गौतम अदाणी ने फैसले का किया स्वागत

अदालती फैसले के बाद गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने न्यायपालिका की प्रक्रिया के प्रति सम्मान जताते हुए फैसले का स्वागत किया। अदाणी ने कहा कि उनका कानून में अटूट विश्वास है और उन्होंने उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस पूरे मामले के दौरान उन पर भरोसा बनाए रखा।

अदाणी समूह के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

अमेरिकी अदालत में मामला खारिज होना अदाणी समूह के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। मामले में गौतम अदाणी और सागर अदाणी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से अभियोजन वापस लेने और अदालत द्वारा इसे मंजूरी दिए जाने के बाद इस मामले में आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अदाणी समूह की वैश्विक कारोबारी गतिविधियों और अमेरिका समेत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनी हुई है। अदालत के आदेश के बाद अब इस मामले से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही का रास्ता बंद हो गया है।


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