तुकाराम मुंडे से लेकर वॉर्निंग लेबल्स तक: भारत में फूड सेफ्टी को लेकर अचानक तेज हुई चर्चा
भारत में खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई घटनाक्रम एक साथ हो रहे हैं. रेस्तराओं में छापेमारी कर साफ-सफाई जांची जा रही है, पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर चेतावनी वाले लेबल लगाने की पहल हो रही है लेकिन उद्योग-धंधे इससे परेशान हैं

भारत में खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई घटनाक्रम एक साथ हो रहे हैं. रेस्तराओं में छापेमारी कर साफ-सफाई जांची जा रही है, पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर चेतावनी वाले लेबल लगाने की पहल हो रही है लेकिन उद्योग-धंधे इससे परेशान हैं.
भारत में खाद्य सुरक्षा को लेकर तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं. फूड रेगुलेटर की कार्रवाई के बाद कई रेस्तराओं के दरवाजे पर ताले लटक गए हैं. देश की शीर्ष अदालत पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर वॉर्निंग लेबल्स लगाने पर जोर दे रही है. कंपनियां अपने उत्पादों का प्रचार किस ढंग से कर सकती हैं, इसे लेकर भी निर्देश जारी किए जा रहे हैं. इस सब की वजह से फूड सेफ्टी और हैल्दी ईटिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
भारतीय ग्राहक लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं कि कैफे, रेस्तरां और होटल आदि में साफ-सफाई का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता. जमकर खाया जाने वाला स्ट्रीट फूड भी हाइजिन की वजह से लोगों के निशाने पर रहता है. बीच-बीच में खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले भी सामने आते रहते हैं. इस सब के बीच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही कार्रवाइयां लोगों में एक भरोसा पैदा कर रही हैं.
खाने को सुरक्षित रखना कितनी बड़ी चुनौती
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 से फूड इंस्पेक्टरों ने हर साल एक लाख से अधिक नमूनों का परीक्षण किया है, जिनमें से लगभग 20 फीसदी नमूने असुरक्षित, निम्न गुणवत्ता वाले या बिना उचित लेबल के साथ पाए गए. पिछले तीन सालों में लगभग 8,000 खाद्य व्यवसाय लाइसेंस रद्द किए गए हैं.
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने पिछले महीने कहा था, "1.4 अरब लोगों के देश में, जो हर साल लगभग 1.5 ट्रिलियन मील्स खाते हैं, वहां खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बहुत बड़ा काम है." इस बड़े काम को अंजाम देने के लिए एफएसएसएआई और कुछ राज्य नियामकों ने जांच तेज कर दी है और छापेमारी के फोटो-वीडियोज को सोशल मीडिया पर खासी प्रतिक्रिया मिल रही है.
एफएसएसएआई द्वारा जारी की गई ऐसी ही एक वीडियो में फूड इंस्पेक्टर एक फैक्ट्री में छापेमारी कर करीब 1,300 किलोग्राम पनीर जब्त करते हुए नजर आए. पनीर भारत के शाकाहारी लोगों में खासा मशहूर है. अपने स्वाद और प्रोटीन की मात्रा की वजह से पनीर को यह पहचान मिली है. हालांकि, मिलावट और नकली पनीर की खबरों की वजह से अब इसे भी संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है.
छापे मारकर मशहूर हो गए तुकाराम मुंडे
वर्तमान में भारत में सबसे प्रमुख खाद्य सुरक्षा अधिकारी महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंडे हैं. उन्होंने भारत की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई शहर में बड़े स्तर पर छापेमारी अभियान चलाए हैं. उनकी कार्रवाई सिर्फ स्ट्रीट फूड वेंडर्स या छोटी दुकानों तक ही सीमित नहीं रही, उन्होंने बड़े कैफे, रेस्तरां और डोमिनोज, पिज्जा हट और मैकडॉनल्ड्स जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा संचालित आउटलेट्स की भी जांच की.
उनके द्वारा चलाए गए छापेमारी अभियानों और लाइसेंस सस्पेंड करने की कार्रवाई को खूब जनसमर्थन मिला. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, मई में पद संभालने के बाद से उनके नेतृत्व में 3,000 से अधिक छापे मारे गए हैं. उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में खुला एलान किया कि कोई उन्हें रिश्वत या धमकी देने की कोशिश न करे. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें किसी प्रशासनिक कार्रवाई का भी डर नहीं है.
मुंबई के एक जज ने तुकाराम पर आरोप लगाया कि वे निजी आउटलेट्स को चुनकर निशाना बना रहे हैं. जज ने उनसे पूछा कि क्या कोर्ट की कैंटीन भी चेक की गई हैं. इसके कुछ ही घंटों बाद फूड इंस्पेक्टर कोर्ट पहुंच गए और कैंटीन में जांच अभियान चलाया. कई दुकानें जो लाइसेंस के बिना काम कर रही थीं, उन्हें कार्रवाई के दौरान बंद करवा दिया गया.
पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर वॉर्निंग लेबल्स लगाने पर जोर
भारत में लंबे समय से यह बहस चल रही है कि क्या पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर चेतावनी देने लेबल्स लगाए जाएं जो उस प्रोडक्ट के अंदर शुगर, सॉल्ट और फैट की अधिक मात्रा के बारे में बताएं. बहस का एक मुद्दा यह भी रहा कि इन लेबल्स का स्वरूप कैसा हो. हालांकि, फूड इंडस्ट्री के विरोध की वजह से इस दिशा में बात कुछ खास आगे नहीं बढ़ी.
अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के पहुंचने के बाद फूड रेगुलेटर एफएसएसएआई पर वॉर्निंग लेबल छापने की शुरुआत करने का दबाव बन रहा है. एजेंसी ने हाल ही में सुझाव दिया है कि अगर किसी उत्पाद में शुगर, सॉल्ट और फैट में से किसी भी एक चीज की मात्रा अधिक होगी तो उस पर चेतावनी वाला लाल निशान लगाया जाएगा.
फूड इंडस्ट्री के लोगों को डर है कि इस सुझाव के लागू होने के बाद लगभग सभी खाद्य उत्पादों पर लाल निशान नजर आएंगे. उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, भारत के 100 अरब डॉलर से अधिक के पैकेटबंद खाद्य और पेय बाजार के लगभग 80 फीसदी उत्पादों में वसा, चीनी और नमक की मात्रा अधिक हो सकती है.
दर्जनों खाद्य कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली ऑल इंडिया फूड प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने कहा है कि आम भारतीय ग्राहक लाल रंग को मांसाहार से जोड़कर देखता है इसलिए लाल रंग के इस्तेमाल पर विचार किया जाना चाहिए. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि वह सख्त चेतावनी वाले लेबल लगाने के मामले में तेजी क्यों नहीं दिखा रही है.


