अब मोबाइल नंबर की तरह पोर्ट होगा FASTag, NHAI ने शुरू की ‘वन टैग’ सुविधा; जानें पूरा तरीका
NHAI के अनुसार, FASTag पोर्टेबिलिटी की सुविधा राजमार्गयात्रा एप में उपलब्ध ‘वन टैग’ विकल्प के जरिए ली जा सकेगी। एप पर यूजर को पूरी प्रक्रिया के दौरान जरूरी निर्देश और जानकारी दी जाएगी।

नई दिल्ली : वाहन चालकों के लिए FASTag से जुड़ी एक अहम सुविधा शुरू की गई है। अब मोबाइल नंबर या सिम पोर्ट कराने की तरह वाहन के FASTag को भी एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट कराया जा सकेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने गुरुवार को ‘वन टैग’ FASTag पोर्टेबिलिटी सुविधा शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत बैंक बदलने के लिए नया FASTag लेने या वाहन पर लगे मौजूदा FASTag स्टिकर को हटाने की जरूरत नहीं होगी।
बैंक बदलेगा, FASTag वही रहेगा
‘वन टैग’ सुविधा का मुख्य उद्देश्य FASTag जारीकर्ता बैंक बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। पोर्टेबिलिटी पूरी होने के बाद वाहन पर पहले से लगा FASTag ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। यानी ग्राहक को नया टैग खरीदने या पुराने स्टिकर को हटाकर नया लगाने की जरूरत नहीं होगी। इस प्रक्रिया में वाहन के पंजीकरण नंबर से जुड़ी मौजूदा FASTag ID भी वही बनी रहेगी। केवल FASTag जारी करने वाला बैंक बदलेगा।
राजमार्गयात्रा एप से कर सकेंगे पोर्ट
NHAI के अनुसार, FASTag पोर्टेबिलिटी की सुविधा राजमार्गयात्रा एप में उपलब्ध ‘वन टैग’ विकल्प के जरिए ली जा सकेगी। एप पर यूजर को पूरी प्रक्रिया के दौरान जरूरी निर्देश और जानकारी दी जाएगी। सबसे पहले वाहन मालिक को अपनी पात्रता की जांच करनी होगी। इसके बाद वाहन का पंजीकरण नंबर दर्ज कर पोर्टेबिलिटी के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
ऐसे शुरू करें पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया
FASTag को पोर्ट करने के लिए सबसे पहले राजमार्गयात्रा एप खोलकर लॉग-इन करना होगा। इसके बाद ‘वन टैग’ विकल्प चुनना होगा और वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना होगा। एप यह जांच करेगा कि संबंधित FASTag पोर्टेबिलिटी के लिए पात्र है या नहीं। पात्र होने पर यूजर को पोर्ट करने का विकल्प मिलेगा। इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
पुराने बैंक से आएगा सत्यापन कोड
पोर्टेबिलिटी आवेदन के बाद मौजूदा FASTag जारीकर्ता बैंक की ओर से यूजर के पास छह अंकों का मोबाइल सत्यापन कोड (MVC) भेजा जाएगा। इस कोड के जरिए आगे की अधिकृत सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सत्यापन पूरा होने के बाद ग्राहक को नया FASTag जारीकर्ता बैंक चुनना होगा। इसके बाद नए बैंक के साथ ग्राहक सत्यापन और वॉलेट से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
वाहन पर लगा पुराना FASTag ही चलेगा
पोर्टेबिलिटी सफल होने के बाद वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़ी FASTag ID में बदलाव नहीं होगा। इसका मतलब है कि बैंक बदलने के बावजूद वाहन पर लगा मौजूदा FASTag स्टिकर ही टोल भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह सुविधा उन वाहन मालिकों के लिए उपयोगी हो सकती है जो किसी कारण से अपना FASTag जारीकर्ता बैंक बदलना चाहते हैं, लेकिन नया टैग लगाने की प्रक्रिया से बचना चाहते हैं।
पुराने वॉलेट की रकम का क्या होगा?
FASTag पोर्ट होने के बाद पुराने जारीकर्ता बैंक का मौजूदा FASTag वॉलेट बंद कर दिया जाएगा। आवश्यक समायोजन के बाद पुराने वॉलेट में बची राशि ग्राहक को वापस कर दी जाएगी। इससे पोर्टेबिलिटी के दौरान पुराने FASTag खाते में बची रकम को लेकर भी प्रक्रिया निर्धारित तरीके से पूरी होगी।
दोबारा पोर्ट करने के लिए छह महीने इंतजार
NHAI की ‘वन टैग’ व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई है। एक बार FASTag पोर्ट कराने के बाद उसे दोबारा किसी दूसरे बैंक में पोर्ट करने से पहले छह महीने का कूलिंग पीरियड पूरा करना होगा। यानी ग्राहक लगातार बैंक बदलकर FASTag पोर्ट नहीं करा सकेगा।
13 करोड़ से ज्यादा यूजर कर रहे FASTag का इस्तेमाल
राजमार्ग परिवहन मंत्रालय के अनुसार, देश में FASTag की पहुंच करीब 98 फीसदी तक पहुंच चुकी है और लगभग 13 करोड़ यूजर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन की व्यवस्था में FASTag के इस्तेमाल से टोल प्लाजा पर भुगतान की प्रक्रिया आसान हुई है। NHAI को उम्मीद है कि ‘वन टैग’ सुविधा से बार-बार नया FASTag जारी कराने की जरूरत कम होगी। इससे टैग के प्रबंधन, भेजने और दोबारा जारी करने से जुड़े खर्च में भी कमी आ सकती है। वहीं ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक FASTag जारीकर्ता बैंक बदल सकेंगे।


