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‘दुनिया में अब कोई एक देश पूरी तरह हावी नहीं’, रायसीना डायलॉग में बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि अक्सर दुनिया की मौजूदा व्यवस्था को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में बनी व्यवस्था या फिर 1989 के बाद के दौर से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन उनके मुताबिक यह मान लेना कि उस समय बनी व्यवस्था हमेशा वैसी ही बनी रहेगी, एक अवास्तविक सोच है।

नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति और बदलते शक्ति संतुलन पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में कोई भी एक देश पूरी तरह से हावी नहीं है और अंतरराष्ट्रीय शक्ति अब कई देशों और क्षेत्रों में फैल चुकी है। नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग (Raisina Dialogue 2026) के दौरान बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि 20वीं सदी के मध्य में बनी विश्व व्यवस्था को हमेशा स्थिर बनाए रखने की उम्मीद करना अवास्तविक था। उनके मुताबिक दुनिया लगातार बदलती रहती है और आज हम एक ऐसे दौर में हैं जहां वैश्विक शक्ति का स्वरूप पहले से काफी अलग हो गया है। विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले सात दशकों में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बड़े बदलाव आए हैं और अब वैश्विक शासन की संरचना भी तेजी से बदल रही है।
1945 और 1989 की व्यवस्था स्थायी नहीं रह सकती थी
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि अक्सर दुनिया की मौजूदा व्यवस्था को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में बनी व्यवस्था या फिर 1989 के बाद के दौर से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन उनके मुताबिक यह मान लेना कि उस समय बनी व्यवस्था हमेशा वैसी ही बनी रहेगी, एक अवास्तविक सोच है। उन्होंने कहा, “जब हम पिछले 70 वर्षों को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह उम्मीद करना कि 1945 या 1989 की स्थिति को हमेशा के लिए स्थिर रखा जा सकता है, वास्तव में अवास्तविक है।” जयशंकर के अनुसार इतिहास में दुनिया हमेशा बदलाव के दौर से गुजरती रही है और वर्तमान समय भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
भारत के हजारों साल के इतिहास में 70 साल छोटा समय
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में ऐतिहासिक दृष्टिकोण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर भारत के हजारों साल पुराने इतिहास के संदर्भ में देखा जाए तो पिछले 70 साल बहुत छोटा समय है। उनके मुताबिक इतिहास में इतने लंबे समय में कई बार वैश्विक शक्ति का संतुलन बदला है, इसलिए दुनिया का बदलना स्वाभाविक है। जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को स्थिर मान लेने के बजाय हमें यह समझना चाहिए कि दुनिया लगातार विकसित होती रहती है।
वैश्विक व्यवस्था बदलने के पीछे दो बड़ी ताकतें
अपने भाषण में विदेश मंत्री ने बताया कि आज की दुनिया में बदलाव के पीछे दो बड़ी ताकतें काम कर रही हैं। ये दो प्रमुख कारक हैं: टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी), डेमोग्राफी (जनसंख्या का स्वरूप)। जयशंकर के मुताबिक आने वाले वर्षों में यही दोनों कारक वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और शक्ति संतुलन को प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दे रहे हैं, जबकि जनसंख्या की संरचना भी वैश्विक शक्ति समीकरणों को बदल रही है।
अब शक्ति कई देशों में बंट रही है
जयशंकर ने कहा कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय राजनीति का विश्लेषण अक्सर अमेरिका के दृष्टिकोण से किया जाता रहा है। लेकिन वर्तमान समय में दुनिया धीरे-धीरे मल्टीपोलर यानी बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। उनके अनुसार अब ऐसा नहीं है कि एक ही देश हर क्षेत्र में पूरी तरह से मजबूत हो। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देश और क्षेत्र अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी ताकत दिखा रहे हैं।
ताकत का मतलब अब सिर्फ सैन्य शक्ति नहीं
विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आज के दौर में वैश्विक शक्ति को केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक ताकत के आधार पर नहीं आंका जा सकता। उनके मुताबिक आधुनिक दुनिया में शक्ति के कई आयाम हैं, जैसे आर्थिक क्षमता, तकनीकी प्रगति, सैन्य शक्ति, कूटनीतिक प्रभाव और वैश्विक साझेदारी। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के अलग-अलग हिस्से इन क्षेत्रों में अलग-अलग तरह से मजबूत हो रहे हैं, इसलिए वैश्विक शक्ति अब कई देशों और क्षेत्रों में फैली हुई है।
बदलते दौर में वैश्विक सहयोग की जरूरत
जयशंकर ने यह भी कहा कि जब दुनिया में शक्ति का वितरण बदलता है तो वैश्विक संस्थाओं और सहयोग की जरूरत और भी बढ़ जाती है। उन्होंने संकेत दिया कि वर्तमान वैश्विक संस्थाओं और व्यवस्थाओं को भी समय के साथ बदलना होगा ताकि वे नई वास्तविकताओं के अनुरूप काम कर सकें। उनके मुताबिक भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संवाद, सहयोग और साझेदारी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
रायसीना डायलॉग: वैश्विक मुद्दों पर बड़ा मंच
रायसीना डायलॉग भारत का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसमें दुनिया भर के नेता, नीति विशेषज्ञ, राजनयिक और रणनीतिक विश्लेषक भाग लेते हैं। इस मंच पर वैश्विक राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होती है। रायसीना डायलॉग 2026 में भी कई देशों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्होंने दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।
बहुध्रुवीय दुनिया की ओर बढ़ रहा विश्व
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हो रहे बड़े बदलावों के संदर्भ में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज की दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां कई देश अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस परिदृश्य में भारत भी खुद को एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। जयशंकर के मुताबिक आने वाले दशक में तकनीक, जनसंख्या और वैश्विक साझेदारियों के आधार पर दुनिया का नया शक्ति संतुलन तय होगा, इसलिए बदलती परिस्थितियों को समझना और उनके अनुरूप नीतियां बनाना हर देश के लिए जरूरी होगा।
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