'मुकाबले से डरते नहीं': स्टारलिंक की एंट्री विवाद पर मस्क को रिलायंस का जवाब, कहा- सबके लिए एक समान नियम
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि कंपनी का विकास ऐसे भारत में हुआ है, जो निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करता है। कंपनी के मुताबिक, भारतीय हो या विदेशी, किसी भी कंपनी की ओर से दी जाने वाली ऐसी सेवाओं का स्वागत किया जाना चाहिए, जिनसे लोगों के जीवन में सुधार हो।

नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। रिलायंस ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वह भारतीय सैटेलाइट संचार बाजार में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है और इसमें एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भी शामिल है। हालांकि, कंपनी ने जोर देकर कहा कि भारतीय और विदेशी, सभी कंपनियों को देश के कानूनों, नीतियों और नियामकीय प्रक्रियाओं का समान रूप से पालन करना होगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब मस्क ने भारत में स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत को लेकर कथित बाधाओं पर सवाल उठाए हैं।
रिलायंस बोली- विदेशी निवेश और नवाचार का स्वागत
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि कंपनी का विकास ऐसे भारत में हुआ है, जो निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करता है। कंपनी के मुताबिक, भारतीय हो या विदेशी, किसी भी कंपनी की ओर से दी जाने वाली ऐसी सेवाओं का स्वागत किया जाना चाहिए, जिनसे लोगों के जीवन में सुधार हो। रिलायंस ने साथ ही कहा कि यह खुलापन कानून के शासन और स्पष्ट नियमों पर आधारित होना चाहिए। कंपनी ने भारत सरकार की नियामकीय प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी आवेदकों के लिए समान व्यवस्था लागू होती है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि रिलायंस की दूरसंचार इकाई जियो की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को भी अभी आवश्यक मंजूरियों का इंतजार है। यानी कंपनी के अनुसार, इस क्षेत्र में कारोबार शुरू करने के लिए नियामकीय स्वीकृति जरूरी है।
‘हमने कभी प्रतिस्पर्धा से परहेज नहीं किया’
रिलायंस ने अपने बयान में प्रतिस्पर्धा को ग्राहकों को बेहतर सेवा देने की कसौटी बताया। कंपनी ने कहा कि उसने कभी मुकाबले से बचने की कोशिश नहीं की और बाजार में प्रतिस्पर्धा को सकारात्मक रूप में देखा है। कंपनी ने वर्ष 2016 में जियो की शुरुआत का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय वह भारतीय दूरसंचार बाजार में एक नए खिलाड़ी के तौर पर उतरी थी और उसके पास कोई ग्राहक नहीं था। रिलायंस के मुताबिक, करीब दस वर्षों में जियो ने 53 करोड़ से अधिक ग्राहकों का भरोसा हासिल किया और भारत में डिजिटल सेवाओं तथा डेटा की उपलब्धता को व्यापक बनाने में भूमिका निभाई। कंपनी ने कहा कि सैटेलाइट संचार क्षेत्र में भी स्टारलिंक सहित सभी कंपनियों का स्वागत है। हालांकि, उसने दोहराया कि इस बाजार में काम करने वाली हर कंपनी को भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के साथ देश के कानूनों और नीतियों का पालन करना होगा।
एलन मस्क ने रिलायंस पर साधा था निशाना
रिलायंस का बयान एलन मस्क की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग स्टारलिंक की भारत में एंट्री का विरोध कर रहे हैं। मस्क ने एक्स पर पोस्ट करते हुए रिलायंस और उसके समर्थकों की ओर से दिए जा रहे तर्कों पर सवाल उठाए। मस्क का कहना था कि एक ओर यह दावा किया जाता है कि स्टारलिंक भारत में पहले से मौजूद कंपनियों की कम कीमतों का मुकाबला नहीं कर पाएगी, जबकि दूसरी ओर उसे मजबूत प्रतिस्पर्धी बताया जाता है। उन्होंने इन दलीलों को विरोधाभासी करार दिया। मस्क ने यह भी कहा कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से आम भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे और उन्हें फायदा होगा। उनके मुताबिक, प्रतिस्पर्धा से रिलायंस के मुनाफे पर असर पड़ सकता है, लेकिन इससे उसका कारोबार समाप्त नहीं हो जाएगा।
क्या है स्टारलिंक और जियो के बीच विवाद?
स्टारलिंक, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है। यह पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर कनेक्शन पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराती है। ऐसी सेवाएं दूरदराज और उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती हैं, जहां पारंपरिक इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है। भारत में इस सेवा के व्यावसायिक संचालन के लिए जरूरी नियामकीय मंजूरियां महत्वपूर्ण हैं। इससे पहले भी मस्क ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में कथित एकाधिकार जैसी स्थितियों और स्टारलिंक की शुरुआत में आ रही नियामकीय बाधाओं पर सवाल उठाए थे।
उपभोक्ताओं के लिए बढ़ सकते हैं विकल्प
रिलायंस और मस्क के बयानों से साफ है कि विवाद का केंद्र बाजार में प्रतिस्पर्धा, नियामकीय समानता और उपभोक्ताओं को मिलने वाले विकल्प हैं। एक ओर रिलायंस सभी कंपनियों के लिए समान नियमों की जरूरत पर जोर दे रही है, वहीं मस्क का तर्क है कि नए प्रतिस्पर्धियों के प्रवेश से ग्राहकों को लाभ होगा। हालांकि, भारतीय बाजार में स्टारलिंक की वास्तविक स्थिति उसकी नियामकीय मंजूरियों, सेवा की कीमतों और उपलब्धता पर निर्भर करेगी। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में जियो और स्टारलिंक की योजनाएं किस तरह आगे बढ़ती हैं और इसका भारतीय उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ता है।


