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शिक्षा, अनुशासन और संस्कार ही सशक्त भारत की नींव : आनंदीबेन पटेल

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जनभवन देशभक्ति, संस्कार और अनुशासन के रंग में रंगा नजर आया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने राष्ट्रप्रेम की जीवंत झलक प्रस्तुत की, वहीं राज्यपाल ने शिक्षा, अनुशासन और कर्तव्यबोध को जीवन की मूल धुरी बताया।

शिक्षा, अनुशासन और संस्कार ही सशक्त भारत की नींव : आनंदीबेन पटेल
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लखनऊ। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जनभवन देशभक्ति, संस्कार और अनुशासन के रंग में रंगा नजर आया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने राष्ट्रप्रेम की जीवंत झलक प्रस्तुत की, वहीं राज्यपाल ने शिक्षा, अनुशासन और कर्तव्यबोध को जीवन की मूल धुरी बताया।

प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति में रविवार को जनभवन परिसर में गणतंत्र दिवस पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जनभवन के विद्यार्थियों एवं राजकीय बालिका गृह, पारा, लखनऊ की बालिकाओं द्वारा देशभक्ति गीतों, नृत्यों और भाषणों के माध्यम से मनोहारी प्रस्तुतियां दी गईं।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य में असीम क्षमताएं होती हैं, लेकिन उनके समुचित उपयोग से ही व्यक्ति और समाज महान बनता है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षा में अनुशासन और नियमितता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्राप्त करने के लिए परिश्रम और कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। मौसम की प्रतिकूलताओं—चाहे वर्षा हो, सर्दी या गर्मी—को विद्यालय जाने में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय आकर पढ़ाई के साथ-साथ सभी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करनी चाहिए।

उन्होंने आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जनभवन में प्रतिदिन 'मनुष्य तू बड़ा महान है' गीत के सामूहिक गायन के निर्देश दिए और कहा कि इसमें शिक्षक एवं प्रधानाचार्य भी भाग लें। उन्होंने विद्यार्थियों की सुंदर लेखन शैली पर जोर देते हुए निर्देशित किया कि प्रतिदिन बच्चों से एक पैराग्राफ लिखवाकर उसकी जांच की जाए और अक्षरों में सुधार कराया जाए।

राज्यपाल ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभिभावकों को बच्चों की कॉपियों की नियमित जांच करनी चाहिए, विद्यालय में हुई पढ़ाई पर चर्चा करनी चाहिए और उनके भोजन व दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विद्यालय में वर्षभर आयोजित होने वाली गतिविधियों के लिए एक प्रवृत्ति कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए तथा बच्चों को निरंतर आगे बढ़ते रहने और प्रसन्न रहने का आशीर्वाद दिया।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ चलते हैं और अधिकार प्राप्त करने के लिए कर्तव्यों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने स्वच्छता और साफ-सफाई के महत्व पर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया। कार्यक्रम में कक्षा 1 व 2 के विद्यार्थियों द्वारा 'विजय विश्व तिरंगा प्यारा' और 'स्वच्छता की ज्योति जलाई है' कविता पाठ एवं समूह नृत्य, कक्षा 3 व 4 द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की फैन्सी ड्रेस प्रस्तुति, कक्षा 5 व 6 द्वारा पिरामिड निर्माण, कक्षा 7 व 8 द्वारा प्रभावशाली भाषण तथा देशभक्ति गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किए गए।

राजकीय बालिका गृह, पारा की बालिकाओं ने 'आन देश की,' 'इतिहास गवाह है,' हनुमान जी पर आधारित नृत्य, और 'मनुष्य तू बड़ा महान है' गीत पर भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर राज्यपाल का संसद टीवी पर प्रसारित साक्षात्कार भी दिखाया गया।


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