E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा बयान: 20% से ज्यादा एथनॉल मिश्रण की फिलहाल योजना नहीं
हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया कि E20 पेट्रोल की शुरुआत से केंद्र सरकार को लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि इस राशि में से करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे हैं। मंत्री के अनुसार, एथनॉल उत्पादन ने किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा किए हैं।

पणजी: भारत में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी रणनीति स्पष्ट की है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि फिलहाल पेट्रोल में एथनॉल का मिश्रण मौजूदा 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही कथित भ्रामक सूचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि जैव ईंधन के बारे में गलत धारणाएं बनाई जा रही हैं। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के बीच भारत ने एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात के स्रोतों का विस्तार किया है। सरकार के मुताबिक, अब भारत 41 देशों से एलपीजी आयात करने की स्थिति में है।
E20 पेट्रोल पर क्या बोले हरदीप सिंह पुरी?
दक्षिण गोवा में आयोजित 29वें ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाया जा रहा नकारात्मक नैरेटिव तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार की योजना पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की नहीं है। E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करने के लिए एथनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, जिससे विदेशी मुद्रा खर्च और चालू खाते के घाटे पर दबाव पड़ता है। पुरी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन दावों का जिक्र किया, जिनमें E20 पेट्रोल के कारण वाहनों के बंद होने और इंजन में खराबी आने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की पोस्ट से लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। उनके मुताबिक, E20 के अनुरूप तैयार किए गए वाहनों में इस ईंधन का इस्तेमाल निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा सकता है।
पुराने वाहनों को लेकर मंत्री ने दी सफाई
केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि वर्ष 2003 से पहले निर्मित कुछ पुराने वाहनों में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से संबंधित समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि अगर E20 से बड़े पैमाने पर इंजन खराब हो रहे होते, तो इसका असर सड़कों पर स्पष्ट दिखाई देता। पुरी ने कहा कि देशभर में प्रतिदिन लगभग छह करोड़ वाहन पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने आते हैं। उनके मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के इस्तेमाल के बावजूद E20 को लेकर फैलाए जा रहे दावों को तथ्यों के आधार पर परखने की जरूरत है। हालांकि, पुराने वाहनों पर एथनॉल मिश्रण का प्रभाव वाहन की तकनीक, निर्माण वर्ष और निर्माता के निर्देशों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए वाहन चालकों को अपने वाहन की ईंधन संबंधी अनुकूलता की जानकारी निर्माता से लेनी चाहिए।
एथनॉल से सरकार को 1.60 लाख करोड़ रुपये की बचत का दावा
हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया कि E20 पेट्रोल की शुरुआत से केंद्र सरकार को लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि इस राशि में से करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे हैं। मंत्री के अनुसार, एथनॉल उत्पादन ने किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा किए हैं। इससे कृषि क्षेत्र को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने में मदद मिली है। उन्होंने किसानों को अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जादाता की भूमिका निभाने वाला बताया। इस बीच, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की। इसके तहत E100 तक एथनॉल पर चलने में सक्षम फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए नियामकीय अनुमति का रास्ता खुल गया है। E100 लगभग शुद्ध एथनॉल आधारित ईंधन है। हालांकि, ऐसे वाहनों का इस्तेमाल संबंधित तकनीकी और नियामकीय मानकों के अनुरूप होना जरूरी होगा।
होर्मुज संकट के बीच 41 देशों से LPG आयात
ऊर्जा सुरक्षा पर बात करते हुए पुरी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद भारत ने घरेलू एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखी। उन्होंने बताया कि भारत ने एलपीजी आयात के स्रोत बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचाए हैं। मंत्री के मुताबिक, आपूर्ति में आई बाधाओं का सामना करने के लिए देश में एलपीजी का घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया गया। उनके अनुसार, उत्पादन 34,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 55,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और अल्जीरिया से होने वाले आयात ने खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में भारत की मदद की। सरकार की रणनीति का उद्देश्य किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर सरकार का जोर
एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देना और एलपीजी आयात के स्रोतों में विविधता लाना भारत की व्यापक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। एक ओर एथनॉल के इस्तेमाल से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक संकट के दौरान घरेलू ईंधन आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के सामने अब ऊर्जा की उपलब्धता, पर्यावरणीय लक्ष्यों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।


