Top
Begin typing your search above and press return to search.

डुसू चुनाव में हिंसा पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, विजय जुलूस पर लगाई रोक

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (डुसू) चुनाव के दौरान हुई हिंसा पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव के दौरान जीत के जुलूस निकालने पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने चुनाव लड़ रहे सभी छात्र संगठनों और 140 उम्मीदवारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि चुनाव नियमों का उल्लंघन करने पर सामूहिक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए।

डुसू चुनाव में हिंसा पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, विजय जुलूस पर लगाई रोक
X

नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (डुसू) चुनाव के दौरान हुई हिंसा पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव के दौरान जीत के जुलूस निकालने पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने चुनाव लड़ रहे सभी छात्र संगठनों और 140 उम्मीदवारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि चुनाव नियमों का उल्लंघन करने पर सामूहिक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए।

कोर्ट ने बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले और हथियारों के इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सभी से 2 सप्ताह में जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक तस्वीर को देखकर जिसमें एक छात्र को बंदूक लहराते हुए दिखाया गया है, कड़ी फटकार लगाई। दिल्ली हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ये छात्र कैसे हो सकते हैं। खुलेआम हथियार दिखा रहे हैं। ये वास्तविक छात्रों के मौकों को खा रहे हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में डीयूएसयू चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा की घटनाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।

इससे पहले गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर पुलिस की कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं हुआ, तो वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगा दी जाएगी। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि "लोकतंत्र को आपराधिक समाज में नहीं बदला जा सकता।"

हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि इतनी बड़ी पुलिस फोर्स तैनात होने के बावजूद यह सब कैसे हुआ?

कोर्ट ने डीसीपी नॉर्थ से सवाल किया कि दिल्ली की सड़कों पर और नॉर्थ कैंपस के अंदर और आसपास बिना नंबर प्लेट और कैंडिडेट्स के नाम वाली एक भी गाड़ी को जाने की कैसे इजाजत दी गई? आप फोटो से इनकार नहीं कर सकते। 10-20 कारों का एक बड़ा काफिला था। इसकी इजाजत कैसे दी गई? अगर आप कहते हैं कि आपने काफी फोर्स तैनात की थी, तो इसकी इजाजत कैसे दी गई?

इस पर डीसीपी नॉर्थ ने कहा कि हम लगातार गाड़ियों की चेकिंग कर रहे हैं। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि इन गाड़ियों के काफिले से डर, आतंक और दबदबे की भावना पैदा होती है। आपने रोकने के लिए क्या कदम उठाए? उम्मीदवार कार की छत और आगे के बोनट पर खड़े हैं। क्या यह गुंडागर्दी नहीं है?

सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि 998 चालान किए गए हैं। जो वीडियो में दिख रहे हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। आरसी भी जब्त की जाएंगी। 6 एफआईआर और 4 अरेस्ट हुए हैं। जहां तक ट्रैफिक की बात है, तो इन सभी बिना लाइसेंस वाले वाहनों के 5,737 चालान किए गए हैं।

कोर्ट ने पूछा कि टीचर पर हमले का क्या हुआ? क्या गिरफ्तार किया गया व्यक्ति स्टूडेंट है? इस पर एएसजी ने गिरफ्तार किए जाने की बात कही। कोर्ट ने पूछा कि क्या इस एक्शन के बारे में कॉलेज अथॉरिटीज को बताया गया था और इन स्टूडेंट्स के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया है?

डीयू प्रशासन ने भी बताया कि हमने कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि हम इन सभी वायलेशन के लिए कलेक्टिव डैमेज लगाएंगे। आप लोगों ने अपने तरीके नहीं बदले। पिछले इलेक्शन में जो ऑर्डर पास हुआ था, उसे देखिए। कैंडिडेट के जीतने के बाद, उन्होंने एक टीचर को थप्पड़ मारा था?

हाईकोर्ट ने कहा कि हम किसी ऑर्गनाइजेशन के साथ अलग बर्ताव नहीं कर रहे हैं। हम सभी स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन को नोटिस जारी कर रहे हैं कि चुनावी नुकसान का मुआवजा क्यों न दिया जाए। हम सभी कैंडिडेट को भी नोटिस जारी कर रहे हैं। हमें उनकी लिस्ट और एड्रेस दिया जाए। स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि हम विजय जुलूस पर रोक लगा रहे हैं। हम अलग-अलग कैंडिडेट को कारण बताओ नोटिस और स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन को कलेक्टिव डैमेज के लिए नोटिस जारी कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह साल दर साल हो रहा है, कुछ नहीं बदला। एक स्टूडेंट जीतने के बाद टीचर को थप्पड़ मार रहा है, यह कौन सोच सकता है। जीत से आपको विनम्र होना चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि डीयू द्वारा एडमिनिस्ट्रेटिव तौर पर की गई ऐसी कार्रवाई और दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई भी उन लोगों को रोकने का काम नहीं कर रही है जो न केवल गुंडागर्दी कर रहे हैं बल्कि कुछ गैर-कानूनी कामों में भी शामिल हैं, यहां तक कि क्राइम भी कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव के दौरान स्टूडेंट्स जिस तरह से गलत काम करते हैं, इसमें कोई शक नहीं है कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का बार-बार और खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। जो हालात बने हैं, उन्हें हर तरह से रोकने की जरूरत है। छात्रों, उम्मीदवारों और यहां तक कि स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन की तरफ से उल्लंघन को देखते हुए हम न केवल छात्रों पर बल्कि स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन पर भी कलेक्टिव इलेक्शन डैमेज लगाने का प्रस्ताव रखते हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस को इन लोगों के खिलाफ सिर्फ इसलिए कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटना चाहिए क्योंकि वे स्टूडेंट हैं। वे स्टूडेंट नहीं हैं और स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन भी क्या कर रहे हैं मुझे नहीं पता।



Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it