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पीएम मोदी के साथ महिला की एआई-मॉर्फ्ड फोटो हटाने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट याचिका पर सुनवाई को तैयार

दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें प्रधानमंत्री के साथ एक महिला की एआई जनरेटेड और मॉर्फ्ड फोटो को तुरंत हटाने और ब्लॉक करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह पर यह फोटो शेयर करने का आरोप लगाया है।

पीएम मोदी के साथ महिला की एआई-मॉर्फ्ड फोटो हटाने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट याचिका पर सुनवाई को तैयार
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें प्रधानमंत्री के साथ एक महिला की एआई जनरेटेड और मॉर्फ्ड फोटो को तुरंत हटाने और ब्लॉक करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह पर यह फोटो शेयर करने का आरोप लगाया है।

अधिवक्ता उमेश शर्मा ने इस मामले का जिक्र मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय के समक्ष किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस घटना को लेकर पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। हाईकोर्ट ने आश्वासन दिया कि मामले की सुनवाई शुक्रवार को ही की जाएगी।

महिला ने आरोप लगाया है कि सीजेपी नेताओं और उनके सहयोगियों ने बिना अनुमति उसकी फोटो हासिल की और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) फेस-स्वैपिंग टूल का इस्तेमाल करके उसके चेहरे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक आपत्तिजनक फोटो पर लगा दिया।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मॉर्फ्ड फोटो को फिजिकल बैनरों पर प्रिंट करके जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शनों के दौरान दिखाया गया और अपमानजनक नारे भी लगाए गए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि बैनरों और घटना के वीडियो इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए गए और बाद में मॉर्फ्ड तस्वीरों को पोर्नोग्राफिक वेबसाइटों पर भी डाल दिया गया। याचिकाकर्ता ने इस घटना को एक दुर्भावनापूर्ण, सुनियोजित साइबर हमला, सार्वजनिक चरित्र हनन और डीपफेक बताया है।

याचिका के मुताबिक यह घटना जुलाई में जंतर-मंतर पर सीजेपी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने 23 सितंबर को पुलिस से संपर्क किया।

दिल्ली पुलिस ने 24 सितंबर को साइबर पुलिस स्टेशन, नई दिल्ली में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की।

याचिका में कहा गया है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद साइबर अधिकारियों ने वायरल डीपफेक कंटेंट को हटाने या ब्लॉक करने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए। लगातार फोटो के प्रसार के कारण याचिकाकर्ता को लगातार जान से मारने की धमकी, रेप की धमकियां और गंभीर मानसिक आघात' झेलना पड़ रहा है।

याचिका में अधिकारियों को सोशल मीडिया और पोर्न वेबसाइटों से मॉर्फ्ड और अश्लील तस्वीरों को तुरंत ट्रेस, ब्लॉक और हटाने के निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही याचिकाकर्ता ने अपनी जान, स्वतंत्रता और शारीरिक सुरक्षा के साथ-साथ साइबर हमले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने की भी मांग की है।

इस याचिका में चार सीजेपी नेताओं (सौरव दास, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह) के साथ-साथ दिल्ली सरकार और मेटा प्लेटफॉर्म्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को भी प्रतिवादी बनाया गया है।



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