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एसआईआर ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती पर दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी, चुनाव आयोग से कहा- शिक्षकों के तनाव को समझें..कोर्ट ने कक्षाओं और पढ़ाई के नुकसान पर भी चिंता जताई

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के लिए स्कूली शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को शिक्षकों की स्थिति के प्रति अधिक संवेदनशील रहने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां तय करते समय शिक्षकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एसआईआर ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती पर दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी, चुनाव आयोग से कहा- शिक्षकों के तनाव को समझें..कोर्ट ने कक्षाओं और पढ़ाई के नुकसान पर भी चिंता जताई
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नई दिल्ली। दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के लिए स्कूली शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को शिक्षकों की स्थिति के प्रति अधिक संवेदनशील रहने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां तय करते समय शिक्षकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि एक शिक्षक पहले से ही स्कूल में 6 से 8 घंटे तक पढ़ाने का काम करता है। इसके बाद यदि उसे चुनाव ड्यूटी भी दी जाती है तो उस पर अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक तनाव पड़ना स्वाभाविक है। इसलिए चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे इस स्थिति को समझें और उसी के अनुसार निर्णय लें।

अदालत ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि चुनाव संबंधी कार्य सौंपते समय इस पहलू को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि चुनाव ड्यूटी का बोझ इतना अधिक न हो कि वह शिक्षकों के लिए असहनीय बन जाए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में बड़ी संख्या में महिला शिक्षक कार्यरत हैं। उनके परिवार और अन्य जिम्मेदारियां भी होती हैं। ऐसे में किसी शिक्षक से 11 घंटे तक लगातार काम करने की अपेक्षा करना उचित नहीं है। अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि इस समस्या के समाधान के लिए वह क्या कदम उठा रहा है।

कोर्ट ने चुनाव आयोग के आदेशों में इस्तेमाल की गई भाषा पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि आदेशों में जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, वह धमकी भरा प्रतीत होता है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि शिक्षकों को अपने नियमित शैक्षणिक दायित्व निभाने में भी कठिनाई हो रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने एक सर्कुलर जारी किया है, जबकि दूसरी ओर स्कूलों के प्रधानाचार्य शिक्षकों से स्कूल आकर नियमित पढ़ाई कराने के लिए कह रहे हैं। इससे शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार और एमसीडी से यह जानकारी मांगी जा सकती है कि शिक्षण समय के दौरान कितने शिक्षक चुनाव ड्यूटी में लगाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।



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