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‘डियर उमर…’, ज़ोहरान ममदानी और 8 अमेरिकी सांसदों ने उमर ख़ालिद को लिखी चिट्ठी

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने उमर खालिद के नाम चिट्ठी लिखी है। उन्होंने लिखा, “‘प्रिय उमर, मैं अक्सर आपकी उन बातों को याद करता हूं, जिनमें आपने कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने और हालात को बड़े नजरिए से देखने की बात कही थी. आपके माता-पिता से मिलकर खुशी हुई. हम सभी आपके बारे में सोच रहे हैं”

ज़ोहरान ममदानी की उमर ख़ालिद को चिट्ठी

अमेरिका में ख़ालिद के माता-पिता को सौंपी चिट्ठी

8 अमेरिकी सांसदों ने भी लिखी चिट्ठी

हम सभी आपके बारे में सोच रहे हैं- ममदानी

नई दिल्ली : भारत में पिछले पांच सालों से जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद एक बार फिर सुर्खियों में है। एक तरफ जहां देश के अंदर विपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ता उमर की लंबी हिरासत को सुनियोजित साजिश करार दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अब विदेशी धरती से उनके समर्थन में उठ रही आवाजें तेज हो गई हैं। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी और आठ अमेरिकी सांसदों ने उमर खालिद के नाम चिट्ठी लिखी है.. ममदानी और अमेरिकी सांसदों की साझा चिट्ठी ने इस मामले को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाकर रख दिया है।

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने उमर खालिद के नाम चिट्ठी लिखी है। उन्होंने लिखा, “‘प्रिय उमर, मैं अक्सर आपकी उन बातों को याद करता हूं, जिनमें आपने कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने और हालात को बड़े नजरिए से देखने की बात कही थी. आपके माता-पिता से मिलकर खुशी हुई. हम सभी आपके बारे में सोच रहे हैं।”

बताया जा रहा है कि ये चिट्ठी दिसंबर 2025 में उमर के माता पिता को सौंपी गई जब वो अमेरिका यात्रा पर थे.. इस पत्र को उमर की पार्टनर बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने हाल ही में साझा किया... गैर करने वाली बात है कि सिर्फ मेयर ममदानी ही नहीं, अमेरिका के 8 सांसदों ने भी भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को चिट्ठी लिखकर उमर खालिद की रिहाई और निष्पक्ष सुनवाई की मांग की है।

जिम मैकगवर्न और जेमी रस्किन के नेतृत्व में लिखे गए इस पत्र में भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं..सांसदों के पत्र के मुख्य बिंदुओं की बात करें तो:

लंबी हिरासत: सांसदों ने पूछा कि 2020 से बिना ट्रायल के हिरासत में रखना अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों के अनुरूप कैसे है?

यूएपीए का इस्तेमाल: पत्र में कहा गया कि गिरफ्तारी के पांच साल बाद भी मुकदमा शुरू न हो पाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

साक्ष्य का अभाव: सांसदों का दावा है कि प्रतिष्ठित मानवाधिकार संगठनों की जांच में उमर को आतंकी गतिविधियों से जोड़ने के ठोस सबूत नहीं मिले हैं।

भारत में उमर खालिद की गिरफ्तारी को लेकर शुरू से ही चर्चा तेज रही है..जैसा आप जानते हैं कि दिल्ली पुलिस के मुताबिक उमर पर 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने का आरोप है और इसलिए यूएपीए जैसे कड़े कानून के तहत वो पिछले 5 साल से जेल में बंद हैं.. जहां सरकारी पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और प्रक्रिया न्यायपालिका के अधीन है, वहीं समर्थकों का तर्क है कि न्याय में देरी भी अन्याय ही है.. उमर को हाल ही में अपनी बहन की शादी के लिए अंतरिम जमानत मिली थी, जिसके बाद उन्हें वापस जेल लौटना पड़ा.. समर्थकों का कहना है कि पांच साल तक ट्रायल शुरू न होना अपने आप में सजा देने जैसा है..ममदानी और अमेरिकी सांसदों की चिट्ठी बहुत कुछ कहती है.. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जोहरान ममदानी और अमेरिकी सांसदों की ये कवायद दिखाती है कि उमर खालिद का मुद्दा अब सिर्फ दिल्ली की अदालतों या सुप्रीम कोर्ट तक सीमित नहीं रह गया है.. इस मामले को लेकर न्याय में देरी और राजनीतिक प्रतिशोध की बहस अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच गई है।


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