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बांग्लादेश के हालात को ध्यान में रखकर क्रिकेट खेला जाना चाहिए : मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

बांग्लादेश ने भारत में होने वाले आगामी टी-20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट का बहिष्कार करने का ऐलान किया है, जिसको लेकर खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक और धार्मिक बयानबाजी तेज है

बांग्लादेश के हालात को ध्यान में रखकर क्रिकेट खेला जाना चाहिए : मौलाना शहाबुद्दीन रजवी
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बरेली। बांग्लादेश ने भारत में होने वाले आगामी टी-20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट का बहिष्कार करने का ऐलान किया है, जिसको लेकर खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक और धार्मिक बयानबाजी तेज है। इसे लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने गुरुवार को बांग्लादेश पर निशाना साधा।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा, "भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीआई) के निर्णय में भारत सरकार का दखल होता है। ये बोर्ड खेल मंत्रालय के अधीन आता है। इन लोगों को फैसला लेते समय इन सभी पहलुओं पर ध्यान से विचार करना चाहिए। ऐसे समय में जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और जुल्म हो रहे हैं तो इस स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। अगर इन सच्चाइयों को ध्यान में रखकर खेल खेले जाएंगे तो लोग इसकी सराहना करेंगे, नहीं तो भारत में लोग इसका बहिष्कार करेंगे।"

रजवी ने कहा, "बांग्लादेश में मौजूदा हालात बहुत नाजुक और खतरनाक हैं, जहां चरमपंथी विचारधारा वाले लोग अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं और उन पर ज्यादती कर रहे हैं। मैं क्रिकेट बोर्ड के जिम्मेदार लोगों से यह कहना चाहूंगा कि भारत में बांग्लादेश के खिलाड़ियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।"

उन्होंने केरल जमात-ए-इस्लामी के सदस्य के हालिया बयान पर निशाना साधते हुए कहा, "वे कह रहे हैं कि इस्लामी सल्तनत को कोई सच्चा इंसान कबूल नहीं कर सकता। उनका यह बयान हकीकत के खिलाफ है। सभी धर्मों के लोगों ने इस्लामी राज्य को कबूल किया है। कई देशों के मुखिया ने पैगंबर इस्लाम की शिक्षा से अपने-अपने देश के कानून बनाए और बहुत कुछ हासिल किया।"

उन्होंने कहा, "आज भी हम अगर अलग-अलग देशों के संविधान को देखें तो उसमें इस्लामी उसूल देखने को मिलेगा कि किस तरीके से लोगों के साथ इंसाफ किया जाता था, महिलाओं का सम्मान दिया जाता था, और लोगों को बराबरी का दर्जा दिया जाता था। ऐसे में जमात-ए-इस्लामी नेता का बयान पूरी तरह बेबुनियाद है।"


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