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बीएसएनएल निदेशक के प्रयागराज दौरे पर विवाद गहराया, अंडरगार्मेंट्स और हेयर ऑयल की लिस्ट देख भड़के मंत्री सिंधिया, थमाया नोटिस

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मामले को “अनुचित और अस्वीकार्य” बताते हुए स्पष्ट किया है कि संबंधित निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मंत्री ने कहा कि स्थापित नियमों और प्रशासनिक परंपराओं का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है और उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बीएसएनएल निदेशक के प्रयागराज दौरे पर विवाद गहराया, अंडरगार्मेंट्स और हेयर ऑयल की लिस्ट देख भड़के मंत्री सिंधिया, थमाया नोटिस
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नई दिल्‍ली/प्रयागराज। बीएसएनएल के निदेशक विवेक बंसल के प्रस्तावित प्रयागराज दौरे को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मामले को “अनुचित और अस्वीकार्य” बताते हुए स्पष्ट किया है कि संबंधित निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मंत्री ने कहा कि स्थापित नियमों और प्रशासनिक परंपराओं का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है और उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

विवेक बंसल 25-26 फरवरी को दो दिवसीय दौरे पर प्रयागराज आने वाले थे। इस संबंध में 19 फरवरी को डीजीएम स्तर से एक विस्तृत प्रोटोकॉल जारी किया गया था। इस प्रोटोकॉल में दौरे के लिए करीब 50 अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसमें स्वागत, संगम स्नान, नौका विहार और बड़े हनुमान मंदिर, अक्षयवट व पातालपुरी मंदिर के दर्शन जैसे कार्यक्रम शामिल थे।हालांकि विवाद तब शुरू हुआ जब इस प्रोटोकॉल में निजी उपयोग की वस्तुओं तक की व्यवस्था करने के निर्देश लिखित रूप में सामने आए। आदेश के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं और मामला तूल पकड़ गया।

‘स्नान किट’ पर सबसे ज्यादा सवाल

प्रोटोकॉल के मुताबिक संगम स्नान के दौरान तौलिया, कंघी, दर्पण, चप्पल, तेल की बोतल और अंडर गारमेंट जैसी वस्तुओं की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया था। पुरुषों के लिए छह और महिलाओं के लिए दो “स्नान किट” तैयार करने की बात कही गई थी। इसके अलावा घाट पर बेडशीट रखने, होटल और सर्किट हाउस में सूखे मेवे, फल, शेविंग किट, टूथपेस्ट, ब्रश, साबुन, शैम्पू और तेल की व्यवस्था करने के निर्देश भी शामिल थे। कुल मिलाकर लगभग 20 कार्यों के लिए करीब 50 अधिकारियों की तैनाती का उल्लेख था। यही विवरण इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ और व्यापक आलोचना का कारण बना।

वायरल आदेश के बाद दौरा रद्द

जैसे ही आदेश सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, यूजर्स ने इसे लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। मामला विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचते ही हलचल मच गई। इसके अगले ही दिन विवेक बंसल का प्रयागराज दौरा अचानक रद्द कर दिया गया। प्रयागराज के एक वरिष्ठ बीएसएनएल अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह विभाग की छवि खराब करने की कोशिश भी हो सकती है, लेकिन उन्होंने आदेश की प्रामाणिकता पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार किया। बीएसएनएल के जनसंपर्क अधिकारी आशीष गुप्ता ने कहा कि निदेशक का दौरा निरस्त हो चुका है और पूर्व में जारी प्रोटोकॉल स्वतः अप्रभावी हो गया है।

केंद्रीय मंत्री की सख्त टिप्पणी

मामले ने जब राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया, तब केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में इस तरह का व्यवहार चौंकाने वाला है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सिंधिया ने कहा, “संस्थागत अनुशासन और प्रोटोकॉल का पालन सर्वोपरि है। स्थापित नियमों और प्रशासनिक परंपराओं का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने बताया कि संबंधित निदेशक को सात दिन में जवाब देने को कहा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

प्रशासनिक मर्यादा पर फिर बहस

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इस प्रकरण ने प्रशासनिक मर्यादा और संसाधनों के उपयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इससे पहले भी कुछ अधिकारियों के व्यवहार को लेकर विवाद सामने आए हैं। दिल्ली में एक अधिकारी पर स्टेडियम खाली कराकर निजी उपयोग के आरोप लगे थे, जिसके बाद उनका तबादला किया गया था। बीएसएनएल के इस मामले ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं कि क्या सरकारी संसाधनों और अधिकारियों की तैनाती का उपयोग निर्धारित नियमों के तहत ही हो रहा है।

विभाग की छवि पर असर

बीएसएनएल पहले से ही प्रतिस्पर्धी दूरसंचार बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में इस तरह का विवाद सार्वजनिक छवि पर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए, ताकि संस्थान की साख पर कोई आंच न आए।

विभागीय कार्रवाई संभव

अब सबकी नजर कारण बताओ नोटिस के जवाब और संभावित कार्रवाई पर है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो विभागीय कार्रवाई संभव है। फिलहाल निदेशक का प्रयागराज दौरा रद्द हो चुका है और विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रशासनिक अनुशासन से जुड़ी किसी भी चूक को हल्के में नहीं लिया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाता है, यह निदेशक के जवाब और विभागीय जांच पर निर्भर करेगा।


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