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मुस्लिम विरोधी वीडियो पर मच गया बवाल, ओवैसी ने असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत

ओवैसी का आरोप है कि वीडियो में मुख्यमंत्री सरमा को मुस्लिम व्यक्तियों पर गोली चलाते हुए दर्शाया गया था, जो न केवल आपत्तिजनक है बल्कि दो समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने वाला भी है। विवाद बढ़ने के बाद वीडियो को संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट से हटा लिया गया, लेकिन ओवैसी का कहना है कि वह अभी भी अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

मुस्लिम विरोधी वीडियो पर मच गया बवाल, ओवैसी ने असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत
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हैदराबाद: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ हैदराबाद पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत एक कथित वीडियो को लेकर की गई है, जिसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के असम इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया था।

ओवैसी का आरोप है कि वीडियो में मुख्यमंत्री सरमा को मुस्लिम व्यक्तियों पर गोली चलाते हुए दर्शाया गया था, जो न केवल आपत्तिजनक है बल्कि दो समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने वाला भी है। विवाद बढ़ने के बाद वीडियो को संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट से हटा लिया गया, लेकिन ओवैसी का कहना है कि वह अभी भी अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई शिकायत

ओवैसी ने हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार को संबोधित करते हुए यह शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सरमा ने जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। शिकायत में कहा गया है कि इस तरह की सामग्री न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करती है, बल्कि देश की एकता और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए भी खतरा पैदा करती है। ओवैसी ने पुलिस से मांग की है कि इस मामले में तत्काल आपराधिक कार्रवाई की जाए।

सोशल मीडिया पोस्ट और ‘हेट स्पीच’ का आरोप

ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है और मुख्यमंत्री सरमा के खिलाफ उनके (अब हटाए जा चुके) कथित हिंसक वीडियो के लिए आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, नरसंहार वाली हेट स्पीच एक आम बात हो गई है।” अपने पत्र में ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सरमा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य मंचों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान देते रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे कई भाषण अभी भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

शिकायत में लगाए गए मुख्य आरोप

शिकायत पत्र में ओवैसी ने लिखा है कि हाल के महीनों में मुख्यमंत्री सरमा ने अपने भाषणों और बयानों की तीव्रता बढ़ा दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बयानों का स्पष्ट उद्देश्य मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना है। पत्र में कहा गया है कि इस प्रकार के बयान और दृश्य सामग्री सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकते हैं और देश की एकता के लिए हानिकारक हो सकते हैं। ओवैसी के अनुसार, वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा और दृश्य संकेत—जैसे “पॉइंट ब्लैंक शूट” और “नो मर्सी” जैसे कथित वाक्यांश—जानबूझकर उकसावे की भावना से उपयोग किए गए हैं। उन्होंने इसे धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने वाला बताया।

वीडियो को लेकर क्या है विवाद?

ओवैसी के अनुसार, भाजपा असम के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट से 7 फरवरी को एक वीडियो पोस्ट किया गया था। यह वीडियो एक दिन बाद हटा लिया गया, लेकिन तब तक यह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जा चुका था। शिकायत में कहा गया है कि वीडियो में मुख्यमंत्री सरमा को बंदूक लिए हुए दिखाया गया है और वे उन लोगों पर निशाना साध रहे हैं, जिन्हें कथित तौर पर मुसलमान के रूप में चित्रित किया गया है। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता और संदर्भ को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। भाजपा या असम सरकार की ओर से इस शिकायत पर तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है।

अधिकार क्षेत्र का मुद्दा

ओवैसी ने अपनी शिकायत में यह भी स्पष्ट किया है कि वीडियो देशभर में ऑनलाइन उपलब्ध था, जिसमें हैदराबाद पुलिस स्टेशन का अधिकार क्षेत्र भी शामिल है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं इस वीडियो को अपने क्षेत्राधिकार में देखा है, इसलिए स्थानीय पुलिस को कार्रवाई करने का अधिकार है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर अपराध या ऑनलाइन सामग्री से जुड़े मामलों में अधिकार क्षेत्र का निर्धारण उस स्थान के आधार पर भी किया जा सकता है, जहां से सामग्री देखी या एक्सेस की गई हो।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश में सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयानबाजी और डिजिटल कंटेंट को लेकर बहस तेज है। विपक्षी दल अक्सर आरोप लगाते रहे हैं कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों को उभारा जाता है, जबकि सत्तारूढ़ दल इस तरह के आरोपों को खारिज करता रहा है। ओवैसी की शिकायत ने इस विवाद को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना दिया है। AIMIM प्रमुख ने इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि संवैधानिक और सामाजिक जिम्मेदारी का मामला बताया है।

कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग

हालांकि शिकायत में किन-किन धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है, इसका विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन आमतौर पर ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता की वे धाराएं लागू हो सकती हैं जो धार्मिक भावनाएं आहत करने, समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने या हिंसा के लिए उकसाने से संबंधित हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हैदराबाद पुलिस इस शिकायत पर क्या रुख अपनाती है, क्या प्राथमिकी दर्ज की जाएगी या प्रारंभिक जांच के बाद कोई अन्य निर्णय लिया जाएगा।

डिजिटल कंटेंट और जिम्मेदारी की बहस

यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक दलों और सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की सोशल मीडिया जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई सामग्री का प्रभाव व्यापक और तत्काल होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक संचार में संयम और जिम्मेदारी की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है, क्योंकि सोशल मीडिया संदेश तेजी से फैलते हैं और उनका सामाजिक प्रभाव भी गहरा हो सकता है।

व्यापक राजनीतिक परिदृश्य पर असर

फिलहाल, ओवैसी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। भाजपा या असम सरकार की ओर से भी इस मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण आना बाकी है। यह मामला न केवल राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकता है, बल्कि यह भी तय करेगा कि ऑनलाइन राजनीतिक सामग्री और कथित आपत्तिजनक वीडियो पर कानून कैसे लागू किया जाता है। जैसे-जैसे यह मामला आगे बढ़ेगा, यह स्पष्ट होगा कि कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है और क्या इस विवाद का असर व्यापक राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ता है।


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