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सीएम योगी का बड़ा बयान: 'सैफई मेडिकल कॉलेज मुलायम सिंह यादव का सपना था, भाजपा सरकार ने इसे किया पूरा'

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सैफई मेडिकल संस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने सैफई ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद अखिलेश यादव उसे आगे नहीं बढ़ा सके। भाजपा सरकार ने 490 करोड़ रुपए की लागत से 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पूरा कराया, जबकि 232 करोड़ रुपए की लागत से 300 बेड का गायनी ब्लॉक भी बनवाया, जिससे संस्थान तेजी से विकसित हो रहा है।

सीएम योगी का बड़ा बयान: सैफई मेडिकल कॉलेज मुलायम सिंह यादव का सपना था, भाजपा सरकार ने इसे किया पूरा
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इटावा। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सैफई मेडिकल संस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने सैफई ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद अखिलेश यादव उसे आगे नहीं बढ़ा सके। भाजपा सरकार ने 490 करोड़ रुपए की लागत से 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पूरा कराया, जबकि 232 करोड़ रुपए की लागत से 300 बेड का गायनी ब्लॉक भी बनवाया, जिससे संस्थान तेजी से विकसित हो रहा है।

सीएम योगी ने रविवार को इटावा, जसवंतनगर एवं भरथना विधानसभा क्षेत्र में 604 करोड रुपए की 128 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए।

सपा पर तीखा हमला करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास कार्य पहले भी हो सकते थे, लेकिन उसके लिए इच्छाशक्ति और समय चाहिए था। बबुआ तो दोपहर 12 बजे सोकर उठते थे, 2 बजे तक तैयार होते थे, 5 बजे जिम चले जाते थे और 7 बजे महफिल जम जाती थी। जनता और विकास के लिए समय कहां था? यही कारण था कि प्रदेश और इटावा लंबे समय तक पहचान के संकट से जूझते रहे। पहले इटावा के युवाओं के सामने पहचान का संकट था, लेकिन अब प्रदेश और देश में उन्हें वही सम्मान मिलता है जो उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लोगों को प्राप्त होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने इटावा की पहचान बदलने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि 2017 से पहले इटावा सहित पूरे प्रदेश में अपराध, भय और अराजकता का माहौल था। लोग इस क्षेत्र से गुजरने तक से डरते थे। उस समय प्रदेश में निवेश नहीं आता था क्योंकि लोग अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित रहते थे। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई और संगठित अपराध तथा माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई। भाजपा ने जो कहा, उसे करके दिखाया। पहले प्रदेश के हर जिले में माफिया सक्रिय थे और उत्तर प्रदेश की पहचान दंगा, कर्फ्यू, अराजकता और संगठित अपराध से जुड़ गई थी। इससे युवाओं, किसानों, कारीगरों और आम नागरिकों के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया था। अब वही प्रदेश बदल चुका है। उत्तर प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया नहीं बल्कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज, वन डिस्ट्रिक्ट- वन प्रोडक्ट और वन डिस्ट्रिक्ट- वन क्यूजीन की पहचान बनी है। आज उत्तर प्रदेश में न दंगा है, न कर्फ्यू, न उपद्रव और न ही संगठित अपराध का बोलबाला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय समाजवादी विचारधारा से जुड़े नेताओं ने जमीन पर काम करने का प्रयास किया, लेकिन बाद में परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति ने पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर दिया। उनके अनुसार नौकरी से लेकर विकास योजनाओं तक पर एक सिंडिकेट का कब्जा हो गया था, जिससे युवाओं, किसानों और श्रमिकों को उनका अधिकार नहीं मिल पाया। इसी कारण उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक बीमारू राज्य कहा जाता रहा। आज उत्तर प्रदेश भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि पहले विकास के लिए धन तो उपलब्ध था, लेकिन भ्रष्टाचार और बिचौलियों के कारण सड़क, पुल, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और अन्य विकास परियोजनाएं पूरी नहीं हो पाती थीं। गरीबों के राशन और सरकारी योजनाओं का लाभ भी बीच में ही हड़प लिया जाता था। अब सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। गरीबों को मुफ्त राशन मिल रहा है और आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हाल ही में बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी पांच लाख रुपए तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

सीएम योगी ने कहा कि पहले गरीब बीमारी और भूख से जूझता रहता था, जबकि आज सरकार बिना किसी भेदभाव के उसके जीवन को सुरक्षित बनाने का काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य विकास की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और उत्तर प्रदेश को देश का सबसे अग्रणी राज्य बनाना है। पहले प्रदेश में सैफई सिंडिकेट का कब्जा था और नौकरियां योग्यता नहीं बल्कि सिफारिश और पैसे के आधार पर मिलती थीं। आज प्रदेश में पूरी पारदर्शिता के साथ युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर नियुक्तियां दी जा रही हैं जब वह नियुक्ति पत्र वितरित करते हैं और इटावा का कोई नौजवान अपनी मेहनत और योग्यता के दम पर चयनित होकर नियुक्ति पत्र प्राप्त करता है, तो उन्हें बेहद खुशी होती है। वह युवाओं से पूछते हैं कि क्या किसी सिफारिश की जरूरत पड़ी थी, जिस पर जवाब मिलता है कि नियुक्ति केवल योग्यता के आधार पर मिली है।

उन्होंने आगे कहा कि आज उत्तर प्रदेश की मेरिट सूची में इटावा के युवा भी स्थान बना रहे हैं और अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल कर रहे हैं, जबकि 2017 से पहले यह संभव नहीं था। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले भी सरकारी धन उपलब्ध था, लेकिन मंदिरों के सुंदरीकरण पर खर्च नहीं होता था। वह धन कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल बनाने में खर्च किया जाता था। 2017 से पहले समाजवादी सरकार को लोगों की आस्था की चिंता नहीं थी। उस समय कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाया जाता था, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन रोके जाते थे, रामनवमी की शोभायात्राओं पर रोक लगाई जाती थी और दुर्गा पूजा के पंडालों को भी नहीं लगने दिया जाता था। पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में न कोई दंगा हुआ, न उपद्रव, न अराजकता और न ही गुंडागर्दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैफई सिंडिकेट कभी कानून व्यवस्था की ऐसी घोषणा नहीं कर सकता था क्योंकि गुंडे उन्हीं के साथ जुड़े हुए थे। उस समय लोगों में कहावत चल पड़ी थी कि "देख सपाई, बिटिया घबराई। इटावा और मैनपुरी की छवि भी प्रभावित होती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और इटावा को वही सम्मान प्राप्त है जो लखनऊ और प्रयागराज जैसे शहरों को मिलता है। भाजपा सरकार इटावा के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसी उद्देश्य से 604 करोड़ रुपए की विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात दी जा रही है। जनता ने भाजपा पर विश्वास जताया है और सरकार उसी विश्वास का विकास के माध्यम से ऋण उतार रही है।

सीएम योगी ने आगे कहा कि डबल इंजन सरकार ने 90 करोड़ रुपए की लागत से पैरामेडिकल आवासीय भवन के निर्माण को भी मंजूरी दी है। ये सभी परियोजनाएं इटावा के समग्र विकास और बेहतर बुनियादी ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। प्रदेश में पहले भी विकास कार्य हो सकते थे, लेकिन उसके लिए समय और इच्छाशक्ति की जरूरत थी। पहले जनता और विकास के लिए समय नहीं था, यही कारण था कि उत्तर प्रदेश पहचान के संकट से जूझ रहा था। वर्ष 2017 से पहले नौकरी निकलती थी तो चाचा-भतीजे की जोड़ी सक्रिय हो जाती थी।



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