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न कभी मिला और न कोई संबंध… एपस्टीन फाइल्स में नाम आने पर दलाई लामा की तरफ से सामने आई सफाई

हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा गया कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा का नाम कथित तौर पर इन फाइलों में कई बार दर्ज है। इन दावों के बाद दलाई लामा के कार्यालय ने औपचारिक बयान जारी कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

न कभी मिला और न कोई संबंध… एपस्टीन फाइल्स में नाम आने पर  दलाई लामा की तरफ से सामने आई सफाई
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धर्मशाला। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के क्रमिक खुलासों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है। हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा गया कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा का नाम कथित तौर पर इन फाइलों में कई बार दर्ज है। इन दावों के बाद दलाई लामा के कार्यालय ने औपचारिक बयान जारी कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

क्या हैं ‘एपस्टीन फाइल्स’?

अमेरिकी सरकार द्वारा जारी किए जा रहे दस्तावेजों को आम तौर पर ‘एपस्टीन फाइल्स’ कहा जा रहा है। इनमें लाखों पन्नों के ई-मेल, संपर्क सूची, फोटो, नोट्स, यात्रा विवरण और अन्य रिकॉर्ड शामिल बताए जाते हैं। ये दस्तावेज जेफ्री एपस्टीन और उसके कथित नेटवर्क से संबंधित हैं। इन फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद से विभिन्न नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि कानूनी विशेषज्ञ लगातार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि किसी व्यक्ति का नाम किसी दस्तावेज में दर्ज होना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं होता। संदर्भ, भूमिका और जांच निष्कर्ष अलग-अलग मुद्दे हैं।

दलाई लामा के कार्यालय का बयान

धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) स्थित दलाई लामा के कार्यालय ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि हालिया खबरों और सोशल मीडिया दावों में दलाई लामा को जेफ्री एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जो “पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन” है। बयान में स्पष्ट कहा गया है, “हम स्पष्ट रूप से पुष्टि करते हैं कि परम पावन 14वें दलाई लामा कभी भी जेफ्री एपस्टीन से नहीं मिले हैं और न ही उन्होंने अपनी ओर से किसी को उनसे मिलने या बातचीत करने की अनुमति दी है।” कार्यालय ने यह भी कहा कि बिना आधिकारिक पुष्टि के प्रसारित किए जा रहे दावे लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। बयान का उद्देश्य इन अफवाहों को रोकना और स्थिति स्पष्ट करना है।

सोशल मीडिया पर फैली अटकलें

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि दलाई लामा का नाम कथित दस्तावेजों में 100 से अधिक बार दर्ज है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में नामों की उपस्थिति कई कारणों से हो सकती है जैसे किसी कार्यक्रम का संदर्भ, किसी तीसरे पक्ष के पत्राचार में उल्लेख या सामान्य सूचीबद्ध संपर्क। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और संदर्भ की प्रतीक्षा आवश्यक है।

कौन था जेफ्री एपस्टीन?

जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का एक वित्तीय कारोबारी था, जिसने वर्षों तक प्रभावशाली नेताओं, उद्योगपतियों और सेलिब्रिटीज से संबंध बनाए रखे। उस पर पहली बार 2005 में नाबालिग से जुड़े यौन अपराध का मामला दर्ज हुआ। 2008 में उसे दोषी ठहराया गया और 13 महीने की सजा हुई। 2019 में उसे दोबारा संघीय स्तर पर सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। मुकदमा शुरू होने से पहले ही वह हिरासत में मृत पाया गया। आधिकारिक रूप से इसे आत्महत्या बताया गया, हालांकि इस पर व्यापक विवाद और सवाल भी उठे। एपस्टीन की सहयोगी घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में यौन शोषण और तस्करी में सहायता करने के आरोप में दोषी ठहराया गया। वह वर्तमान में सजा काट रही हैं।

हाई-प्रोफाइल संपर्क और विवाद

एपस्टीन के सामाजिक दायरे में कई बड़े नामों के होने की चर्चा रही है। मीडिया रिपोर्टों में विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों का जिक्र किया गया है, जो कथित तौर पर उसके आयोजनों या संपर्क सूची में शामिल थे। हालांकि कानूनी विशेषज्ञ बार-बार यह रेखांकित कर रहे हैं कि किसी व्यक्ति का नाम संपर्क सूची, ई-मेल या कार्यक्रम में दर्ज होना आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। जांच एजेंसियां संदर्भ, भूमिका और साक्ष्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालती हैं।

चरणबद्ध तरीके से खुलासा


एपस्टीन फाइल्स से जुड़े दस्तावेजों का खुलासा चरणबद्ध तरीके से जारी है। संभावना है कि आने वाले समय में और भी नाम या संदर्भ सामने आएं। इस बीच, दलाई लामा के कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका जेफ्री एपस्टीन से कोई संबंध नहीं रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या अमेरिकी अधिकारियों की ओर से किसी आधिकारिक सूची या स्पष्टीकरण में इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी सामने आती है या नहीं। फिलहाल, यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि हाई-प्रोफाइल जांचों में सामने आने वाली सूचनाओं को सावधानी और तथ्यात्मक संतुलन के साथ समझना कितना जरूरी है।


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