पेपर लीक पर CJP का सरकार पर हमला, आशुतोष रांका बोले- सिर्फ सजा नहीं, रोकथाम की ठोस व्यवस्था जरूरी
सीजेपी प्रवक्ता ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की। उनका कहना है कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाए बिना समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

नई दिल्ली: देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। संसद से परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े संशोधित विधेयक के पारित होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका का कहना है कि कानून में सजा और जुर्माने का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं को होने से पहले ही रोका जा सके।
'पेपर लीक रोकने की योजना कहां है?'
आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार की मौजूदा नीति केवल पेपर लीक होने के बाद की कार्रवाई तक सीमित दिखाई देती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि उद्देश्य वास्तव में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना है, तो कानून में उन व्यवस्थाओं का उल्लेख क्यों नहीं है जो पेपर लीक की घटनाओं को रोक सकें। रांका ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट, कठोर सजा और भारी जुर्माना जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हो सकती हैं, लेकिन ये केवल घटना के बाद की कार्रवाई हैं। उनके अनुसार, असली चुनौती परीक्षा प्रक्रिया को इतना मजबूत बनाना है कि पेपर लीक की संभावना ही न्यूनतम रह जाए।
एनटीए में सुधार को बताया सबसे बड़ी जरूरत
सीजेपी प्रवक्ता ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की। उनका कहना है कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाए बिना समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि परीक्षा कार्यक्रम, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया और संचालन तंत्र में पारदर्शिता लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उनके अनुसार, जब तक परीक्षा प्रणाली के मूल ढांचे में सुधार नहीं होगा, तब तक बार-बार सामने आने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा।
पांच सूत्रीय मांगों का किया उल्लेख
आशुतोष रांका ने अपनी पार्टी की पांच प्रमुख मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को केवल दंडात्मक प्रावधानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जिन प्रमुख सुधारों की मांग की, उनमें एनटीए में संस्थागत सुधार, परीक्षा कैलेंडर में पारदर्शिता, पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रक्रिया को स्पष्ट एवं जवाबदेह बनाना, कोचिंग संस्थानों की भूमिका की समीक्षा तथा पूरे परीक्षा तंत्र का डिजिटल ऑडिट शामिल है। उनका कहना था कि परीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत से लेकर परिणाम घोषित होने तक प्रत्येक चरण की स्वतंत्र और तकनीकी जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे कमजोर कड़ियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों और छात्रों से संवाद की अपील
सीजेपी ने सरकार से शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और छात्र संगठनों के साथ व्यापक चर्चा करने की भी मांग की। रांका ने कहा कि परीक्षा प्रणाली केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि किसी भी नए कानून या नीति को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के सुझाव लिए जाएं ताकि ऐसा ढांचा तैयार किया जा सके जो लंबे समय तक प्रभावी साबित हो।
Are we really trying to stop paper leaks? pic.twitter.com/OSsutev9AK
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) July 29, 2026
'सिर्फ कार्रवाई नहीं, रोकथाम भी जरूरी'
रांका ने आरोप लगाया कि सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि पेपर लीक होने के बाद दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी, जबकि सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं हों ही क्यों। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय मजबूत किए जाएं तो पेपर लीक की घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भरोसा बनाए रखने के लिए परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाना आवश्यक है। केवल कठोर दंड देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
परीक्षा प्रणाली पर जारी है राष्ट्रीय बहस
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में संसद ने संशोधित विधेयक पारित किया है, जबकि विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक संरचनात्मक सुधार की मांग भी लगातार उठाई जा रही है। ऐसे में सीजेपी की ओर से उठाए गए सवाल और सुझाए गए सुधार इस बहस को नया आयाम दे रहे हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार परीक्षा सुरक्षा को लेकर केवल दंडात्मक व्यवस्था तक सीमित रहती है या फिर रोकथाम और संस्थागत सुधारों की दिशा में भी नए कदम उठाती है।


