CBSE 12वीं री-इवैल्यूएशन पोर्टल ठप, 1 जून से शुरू होनी थी आवेदन प्रक्रिया
बोर्ड ने 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के री-वैल्यूएशन के लिए 1 जून से आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन निर्धारित तारीख पर भी बड़ी संख्या में छात्र आवेदन नहीं कर पाए

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एक बार फिर अपनी ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। बोर्ड ने 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के री-वैल्यूएशन के लिए 1 जून से आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन निर्धारित तारीख पर भी बड़ी संख्या में छात्र आवेदन नहीं कर पाए। कई छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि दोपहर तक पोर्टल सामान्य रूप से काम नहीं कर रहा था और वेबसाइट पर मेंटेनेंस मोड का संदेश दिखाई दे रहा था। इस स्थिति ने उन छात्रों की चिंता बढ़ा दी है जो अपने परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना चाहते हैं। छात्रों का कहना है कि बोर्ड की तकनीकी समस्याओं का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
तकनीकी दिक्कतें बरकरार
सीबीएसई ने पहले कहा था कि री-वैल्यूएशन की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से आवेदन प्रक्रिया की नई समय-सारिणी जारी की गई थी। बोर्ड के अनुसार, ऑनलाइन सिस्टम को बेहतर बनाकर छात्रों को सुविधाजनक और तेज सेवा उपलब्ध कराने की योजना थी। लेकिन पोर्टल के समय पर शुरू न होने से इन दावों पर सवाल उठने लगे हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यदि आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत में ही तकनीकी बाधाएं सामने आती हैं तो पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
पहले अलग थी समय-सारिणी
री-वैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर पहले अलग कार्यक्रम तय किया गया था। प्रारंभिक योजना के अनुसार यह प्रक्रिया 29 जून से शुरू होनी थी। बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा पारदर्शिता और छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बदलावों की घोषणा की गई। इसके बाद सीबीएसई ने नया आदेश जारी करते हुए बताया कि आवेदन पोर्टल 1 जून से सक्रिय कर दिया जाएगा। बोर्ड ने कहा था कि तकनीकी सुधारों के बाद प्रक्रिया को पहले शुरू किया जा रहा है ताकि छात्रों को समय पर सुविधा मिल सके। हालांकि निर्धारित तिथि पर पोर्टल की स्थिति ने छात्रों को निराश किया।
स्कैन आंसर शीट प्रक्रिया में भी आई थीं समस्याएं
यह पहली बार नहीं है जब सीबीएसई की ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इससे पहले उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने की प्रक्रिया के दौरान भी छात्रों को कई तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। सीबीएसई ने 19 मई से स्कैन आंसर शीट के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी, जिसकी अंतिम तिथि 22 मई निर्धारित की गई थी। लेकिन पहले ही दिन पोर्टल लंबे समय तक काम नहीं कर पाया। इसके बाद बोर्ड ने आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 23 मई कर दी। हालांकि अगले दिन भी तकनीकी समस्याएं बनी रहीं। कई छात्रों ने शिकायत की कि वे आवेदन तो कर पा रहे थे, लेकिन भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं हो रही थी। कुछ मामलों में पोर्टल दोपहर बाद ही सामान्य रूप से संचालित हो पाया।
छात्रों ने उठाए कई तरह के सवाल
स्कैन कॉपी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के दौरान भी कई शिकायतें सामने आई थीं। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें जो उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई गईं, वे धुंधली थीं और उन्हें पढ़ना मुश्किल था। वहीं कुछ छात्रों ने कॉपी के पन्ने गायब होने या उत्तर पुस्तिका में विसंगतियां होने जैसी शिकायतें भी दर्ज कराईं। कई छात्रों ने यह भी कहा कि पोर्टल बार-बार बंद हो रहा था, जिससे आवेदन प्रक्रिया पूरी करना कठिन हो गया। इन समस्याओं के कारण छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखने को मिली।
शिक्षा मंत्रालय ने भी लिया था संज्ञान
तकनीकी गड़बड़ियों और छात्रों की शिकायतों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भी मामले का संज्ञान लिया था। मंत्रालय की ओर से आश्वासन दिया गया था कि छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी और सभी शिकायतों का समाधान किया जाएगा। इसके बाद सीबीएसई ने कई बार आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई ताकि तकनीकी समस्याओं के कारण कोई छात्र अवसर से वंचित न रह जाए। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया था कि नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के माध्यम से मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाने का प्रयास किया गया है।
लाखों छात्रों ने मांगी उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां
सीबीएसई द्वारा जारी आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि इस वर्ष बड़ी संख्या में छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करना चाहते थे। बोर्ड ने 26 मई को जानकारी दी थी कि स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए कुल 4,04,319 आवेदन मिले थे। इन छात्रों ने मिलकर 11,31,961 उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी मांगी थी। बोर्ड के अनुसार अब तक 8,98,214 उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल प्रतियां छात्रों को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में छात्र अपने परिणामों को लेकर पुनः जांच की प्रक्रिया में रुचि दिखा रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन पोर्टल का सुचारु रूप से कार्य करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समय पर री-वैल्यूएशन क्यों है जरूरी?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि री-वैल्यूएशन प्रक्रिया में देरी का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है। कई छात्र उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों में प्रवेश और छात्रवृत्ति जैसी प्रक्रियाओं के लिए संशोधित परिणाम का इंतजार करते हैं। यदि पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती, तो छात्रों को प्रवेश और अन्य शैक्षणिक अवसरों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि सीबीएसई जल्द से जल्द तकनीकी समस्याओं का समाधान कर आवेदन प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करे, ताकि किसी भी छात्र का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।


