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ड्यूटी पर नहीं थे कैप्टन सुमित कपूर, ट्रैफिक में फंसे साथी की जगह भरी उड़ान और बन गई ‘अंतिम उड़ान’

परिवार के एक सदस्य ने बताया कि सुमित को उड़ान से बेहद लगाव था। वे उड़ान भरने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। उन्होंने कभी किसी जिम्मेदारी से पीछे हटने की बात नहीं की। लेकिन इस बार वही जुनून उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गया।

ड्यूटी पर नहीं थे कैप्टन सुमित कपूर, ट्रैफिक में फंसे साथी की जगह भरी उड़ान और बन गई ‘अंतिम उड़ान’
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नई दिल्ली/बारामती। महाराष्ट्र के बारामती में हुए भीषण विमान हादसे ने देश को झकझोर दिया है। इस हादसे में जान गंवाने वाले 62 वर्षीय कैप्टन सुमित कपूर उस दिन निर्धारित ड्यूटी पर नहीं थे। आखिरी समय में उन्हें उड़ान भरने की जिम्मेदारी सौंपी गई, क्योंकि विमान उड़ाने वाले उनके एक साथी पायलट ट्रैफिक जाम में फंस गए थे। कुछ ही घंटों में लिया गया यह फैसला उनके जीवन की ‘अंतिम उड़ान’ साबित हुआ।

कैप्टन सुमित कपूर एक बेहद अनुभवी और वरिष्ठ पायलट थे। उनके पास लगभग 20,000 घंटे की उड़ान का अनुभव था। हादसे से कुछ घंटे पहले उन्हें निर्देश मिला कि उन्हें मुंबई से बारामती तक एक विशेष उड़ान भरनी है, जिसमें वरिष्ठ नेता अजित पवार को चुनावी रैली के लिए ले जाया जाना था। आदेश मिलते ही उन्होंने वीएसआर वेंचर प्राइवेट लिमिटेड के लियरजेट 45 एक्सआर की कमान संभाली—बिना किसी हिचकिचाहट के।

परिवार में मातम, ब्रैसलेट से हुई पहचान

कैप्टन सुमित कपूर अपने परिवार के साथ दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित एम ब्लॉक में रहते थे। परिवार में बुजुर्ग पिता, पत्नी चीना, बेटा शिव और बेटी हैं। उनका बेटा शिव भी उसी वीएसआर वेंचर प्राइवेट लिमिटेड में पायलट है, जहां सुमित कार्यरत थे। उनकी बेटी के पति भी पेशे से पायलट हैं। यानी उड़ान इस परिवार की पहचान रही है। हादसे के बाद विमान में आग इतनी भीषण थी कि शव बुरी तरह जल चुके थे और पहचान करना मुश्किल हो गया था। परिजनों के अनुसार, कैप्टन सुमित की पहचान उनके हाथ में पहने गए ब्रैसलेट से हो सकी। यह दृश्य परिवार के लिए असहनीय था।

परिवार के एक सदस्य ने बताया कि सुमित को उड़ान से बेहद लगाव था। वे उड़ान भरने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। उन्होंने कभी किसी जिम्मेदारी से पीछे हटने की बात नहीं की। लेकिन इस बार वही जुनून उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गया।

चार दशक का करियर, 20,000 घंटे का अनुभव

कैप्टन सुमित कपूर का विमानन करियर करीब चार दशकों में फैला था। उन्होंने स्प्रिंगडेल्स और एयरफोर्स बाल भारती स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद कनाडा में एडवांस फ्लाइट ट्रेनिंग हासिल की। 1990 के दशक में वे सहारा एयरलाइंस से जुड़े। कंपनी में उन्हें चेयरमैन का भरोसेमंद पायलट माना जाता था। बाद में उन्होंने जेट एयरवेज में सेवाएं दीं। अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते उन्हें बोइंग 737 का एग्जामिनर नियुक्त किया गया—जो सिविल एविएशन में एक बेहद वरिष्ठ और प्रतिष्ठित पद माना जाता है।

एक वरिष्ठ कैप्टन के अनुसार, “एग्जामिनर बनना बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। यह पायलटिंग के उच्चतम पेशेवर स्तर को दर्शाता है।” बतौर एग्जामिनर, सुमित अन्य पायलटों की ट्रेनिंग और उनकी प्रोफिशिएंसी जांच की जिम्मेदारी संभालते थे। पिछले पांच वर्षों से वे वीएसआर एविएशन (वीएसआर वेंचर प्राइवेट लिमिटेड) के साथ जुड़े थे और कॉरपोरेट उड़ानों का संचालन कर रहे थे।

हादसे से पहले हांगकांग से लौटे थे

परिवार के मुताबिक, कैप्टन सुमित कुछ ही दिन पहले हांगकांग से लौटे थे। वे पूरी तरह सक्रिय और स्वस्थ थे। अप्रैल में वे 63 वर्ष के होने वाले थे और अगले दो-तीन वर्षों में सेवानिवृत्ति लेकर सुकून भरी जिंदगी बिताने की योजना बना रहे थे।

लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। जिस दिन हादसा हुआ, उसी दिन उन्हें अचानक उड़ान भरने का निर्देश मिला। उन्होंने बिना देर किए जिम्मेदारी स्वीकार कर ली।

शादी की खुशियों के बीच पसरा मातम


कैप्टन सुमित के परिवार में इन दिनों शादी की तैयारियां चल रही थीं। उनके भाई वरुण की बेटी की शादी 20 फरवरी को तय है। इसी कारण उनके घर में रिनोवेशन का काम चल रहा था और परिवार पास के एक अन्य मकान में किराये पर रह रहा था। शादी के निमंत्रण पत्र बांटे जा चुके थे और घर में उत्सव का माहौल था। पड़ोसी अरविंद कुमार बताते हैं, “कैप्टन सुमित को अमिताभ बच्चन की फिल्में बहुत पसंद थीं। उन्होंने भतीजी की शादी में अमिताभ के गानों पर डांस करने की योजना बनाई थी।” लेकिन हादसे के बाद वही घर शोक में डूब गया। शादी की तैयारियों के बीच मातम छा गया है।

आरडब्ल्यूए में सक्रिय, मिलनसार व्यक्तित्व

कैप्टन सुमित कपूर न सिर्फ एक उत्कृष्ट पायलट थे, बल्कि अपने सामाजिक दायित्वों को भी गंभीरता से निभाते थे। वे अपने इलाके की आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के सक्रिय सदस्य थे। अरविंद कुमार बताते हैं, “जब भी वे दिल्ली में होते थे, आरडब्ल्यूए के काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। करीब दस दिन पहले मॉर्निंग वॉक के दौरान उनसे मुलाकात हुई थी। किसे पता था कि वह आखिरी मुलाकात होगी।” लोग उन्हें प्यार से ‘बनी’ कहकर बुलाते थे। उनकी जड़ें उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से जुड़ी थीं, लेकिन वे पिछले 40 वर्षों से दिल्ली में रह रहे थे।

‘पायलट एरर’ की अटकलों से आहत परिवार

हादसे के बाद कुछ हलकों में ‘पायलट एरर’ को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। इससे परिवार और करीबी बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि इतने अनुभवी पायलट पर बिना जांच पूरी हुए सवाल उठाना अनुचित है। परिवार के एक मित्र ने कहा, “कैप्टन सुमित के पास 20 हजार घंटे का अनुभव था। वे सहारा एयरलाइंस और जेट एयरवेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। बोइंग 737 के एग्जामिनर थे। ऐसे पायलट की क्षमता पर सवाल उठाना जल्दबाजी है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बारामती के रनवे पर सीमित नेविगेशन सुविधाएं और खराब विजिबिलिटी जैसे कारक भी हादसे में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, हादसे के कारणों की आधिकारिक जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

अधूरी रह गई रिटायरमेंट की योजना

कैप्टन सुमित कपूर अपने करियर के अंतिम चरण में थे। वे आने वाले वर्षों में सेवानिवृत्ति लेकर परिवार के साथ समय बिताने की योजना बना रहे थे। भतीजी की शादी, घर का रिनोवेशन और भविष्य की योजनाएं सब कुछ तय था। लेकिन एक आकस्मिक निर्णय और अचानक मिली जिम्मेदारी ने सब बदल दिया। एक अनुभवी पायलट, एक जिम्मेदार पिता, एक स्नेही चाचा और एक सक्रिय नागरिक सभी भूमिकाएं निभाने वाला व्यक्ति अब नहीं रहा।

बारामती विमान हादसा सिर्फ एक तकनीकी या प्रशासनिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे परिवार की त्रासदी है, जिसने अपना स्तंभ खो दिया। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं, जो इस हादसे की असली वजह सामने लाएगी। तब तक, कैप्टन सुमित कपूर की ‘अंतिम उड़ान’ की कहानी लोगों के दिलों में एक गहरे दर्द के साथ दर्ज रहेगी।


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