कैंसर की 543 दवाओं के दाम में भारी कटौती, कुछ की कीमत 93% तक घटी
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन काम करने वाले एनपीपीए ने कैंसर रोधी दवाओं के 543 ब्रांड की संशोधित कीमतों की सूची जारी की है। इन दवाओं के लिए पहले सरकार की ओर से अधिकतम मूल्य सीमा निर्धारित नहीं थी।

नई दिल्ली: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के निर्देश पर दवा कंपनियों ने कैंसर की 543 ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में कटौती की है। ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (टीएमआर) ढांचे के तहत हुई इस कार्रवाई में कुछ दवाओं के दाम 93 प्रतिशत तक कम किए गए हैं। संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 9 नवंबर से लागू होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से कैंसर के इलाज पर मरीजों की जेब से होने वाला खर्च काफी कम होगा।
एनपीपीए ने जारी की 543 ब्रांड की संशोधित मूल्य सूची
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन काम करने वाले एनपीपीए ने कैंसर रोधी दवाओं के 543 ब्रांड की संशोधित कीमतों की सूची जारी की है। इन दवाओं के लिए पहले सरकार की ओर से अधिकतम मूल्य सीमा निर्धारित नहीं थी। नए निर्देश के तहत संबंधित कंपनियों को अपनी दवाओं की कीमतें संशोधित करनी पड़ी हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह सूची 27 अक्टूबर 2026 तक दवा कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। जिन कंपनियों की गैर-अधिसूचित कैंसर रोधी दवाओं की संशोधित कीमतों का विवरण अभी प्राप्त नहीं हुआ है, उनके आंकड़े मिलने पर सूची को अपडेट किया जाएगा।
थियोटेपा की कीमत में 72 हजार रुपये से ज्यादा की कमी
कीमत में रुपये के हिसाब से सबसे बड़ी कटौती थियोटेपा दवा के एक ब्रांड में दर्ज की गई है। यह कीमोथेरेपी इंजेक्शन स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से पहले और ब्लैडर कैंसर के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। जारी सूची के मुताबिक, ‘सैमटेपा’ की 100 मिलीग्राम की शीशी की कीमत पहले 80,071.86 रुपये थी। इसे घटाकर अब 7,150.33 रुपये कर दिया गया है। इस तरह इसकी कीमत में 72,921.53 रुपये यानी करीब 91.1 प्रतिशत की कमी आई है। महंगी कैंसर दवाओं का खर्च उठाने वाले मरीजों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
स्तन कैंसर की दवा पाल्बोसाइक्लिब 93.3% सस्ती
प्रतिशत के लिहाज से सबसे बड़ी कटौती स्तन कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा पाल्बोसाइक्लिब के एक ब्रांड में हुई है। ‘पाल्बोप्रो’ के 125 मिलीग्राम वाले 21 कैप्सूल के पैक की कीमत 40,421.33 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये कर दी गई है। यानी इसकी कीमत में 93.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा, आरपीजी लाइफ साइंसेज लिमिटेड के ‘अनार्जोल’ ब्रांड के तहत बिकने वाली एनास्ट्रोजोल की कीमत भी काफी घटाई गई है। एक मिलीग्राम की 10 टैबलेट वाले पैक का दाम 695.76 रुपये से घटाकर 73 रुपये कर दिया गया है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि नई मूल्य सूची में कुछ दवाओं पर मरीजों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
सालाना 3,500 करोड़ तक की बचत का अनुमान
एनपीपीए का अनुमान है कि कीमतों में इस कटौती से कैंसर मरीजों के निजी खर्च में सालाना 2,500 करोड़ से 3,500 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है। कैंसर के इलाज में दवाओं पर लंबे समय तक खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि मरीज कौन-सी दवा ले रहे हैं, इलाज कितने समय तक चलता है और संशोधित कीमतों का उनके उपचार पर कितना असर पड़ता है।
क्या अस्पतालों में इलाज भी होगा सस्ता?
दवाओं की कीमतों में कटौती के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या इससे कैंसर के पूरे इलाज का खर्च कम होगा। अस्पतालों में दवाओं के अलावा जांच, डॉक्टरों की फीस, कीमोथेरेपी देने के शुल्क, भर्ती और अन्य सेवाओं पर भी खर्च होता है। ऐसे में दवाओं के सस्ते होने से कुल इलाज का खर्च कितना घटेगा, यह अस्पताल और उपचार की प्रकृति पर निर्भर करेगा। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट दवाओं की कीमतों पर व्यापक नियंत्रण से जुड़े मुद्दे पर विचार कर रहा है।


