Cab Strike: ओला-उबर-रैपिडो ड्राइवरों की देशव्यापी हड़ताल आज, यात्रियों को हो सकती है भारी दिक्कत

ड्राइवरों का आरोप
हड़ताल कर रहे ड्राइवरों का कहना है कि ऐप आधारित कंपनियों में न तो न्यूनतम किराया तय है और न ही कमीशन को लेकर स्पष्ट नियम। उनका आरोप है कि कंपनियां मनमाने तरीके से कमीशन काटती हैं और इंसेंटिव की शर्तें बार-बार बदलती रहती हैं। ड्राइवरों के मुताबिक, बढ़ती ईंधन कीमतों, वाहन मेंटेनेंस और दैनिक खर्चों के बीच उनकी आमदनी अस्थिर हो गई है। एक यूनियन प्रतिनिधि ने कहा, “कमाई का कोई भरोसा नहीं है। कभी अच्छा भाड़ा मिलता है तो कभी दिनभर में खर्च भी नहीं निकलता,” ।
केंद्रीय मंत्री को पत्र, हस्तक्षेप की मांग
यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं रखी हैं। पत्र में कहा गया है कि चूंकि सरकार की ओर से कोई न्यूनतम किराया तय नहीं है, इसलिए कंपनियां अपनी शर्तों पर भुगतान तय करती हैं। ड्राइवरों का कहना है कि यदि न्यूनतम किराया और पारदर्शी कमीशन ढांचा तय नहीं किया गया तो उनका आर्थिक संकट और गहरा जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।सरकार से प्रमुख मांगें
यूनियन ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: न्यूनतम किराया निर्धारण: ऑटो, टैक्सी और बाइक टैक्सी के लिए तत्काल न्यूनतम किराया तय किया जाए। ड्राइवरों से परामर्श: किसी भी नीति या किराया ढांचे पर निर्णय लेने से पहले ड्राइवर प्रतिनिधियों से बातचीत की जाए। निजी वाहनों के कमर्शियल उपयोग पर रोक: सफेद नंबर प्लेट वाली निजी गाड़ियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए या उन्हें कमर्शियल श्रेणी में परिवर्तित किया जाए। कंपनियों पर निगरानी: ऐप आधारित कंपनियों के संचालन और कमीशन संरचना पर सख्त सरकारी निगरानी सुनिश्चित की जाए। यूनियन का कहना है कि यदि इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में और व्यापक आंदोलन किया जाएगा।यात्रियों पर संभावित असर
यात्रियों के लिए सुझाव
संभावित असुविधा को देखते हुए यात्रियों को पहले से योजना बनाने की सलाह दी जा रही है। मेट्रो, बस या लोकल ट्रेन जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग प्राथमिकता से करें। जरूरी यात्रा के लिए निजी वाहन का विकल्प चुनें। एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन जाने वालों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐप आधारित सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता के बीच इस तरह की हड़तालें शहरी परिवहन व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती हैं। गिग वर्कर्स की स्थिति पर बहस


