Budget 2026-27: बजट में डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण पर फोकस
इस बजट में सरकार ने डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सामाजिक कल्याण को केंद्र में रखते हुए कई बड़े एलान किए। वित्तीय अनुशासन के साथ विकास को गति देने की रणनीति स्पष्ट दिखी।

शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा निवेश
स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। दो राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए जाएंगे। मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘विमहैंस-2’ का गठन। 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाए जाएंगे। 1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा। आयुर्वेद के 3 अखिल भारतीय संस्थान स्थापित होंगे। पारंपरिक दवाओं पर शोध के लिए जामनगर में संस्थान। आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की पहल। शिक्षा, कौशल और महिला सशक्तिकरण। हर जिले में एक महिला छात्रावास बनाया जाएगा। 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित होंगी। पूर्वी भारत में एक नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान। वेटनरी और पैरा-वेटनरी संस्थानों को सहायता। शिक्षा और रोजगार के लिए हाई पावर स्टैंडिंग कमेटी का गठन। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों को नई वित्तीय मदद। दिव्यांग सहारा योजना के तहत तकनीकी सहयोग और कौशल कार्यक्रम।
उद्योग, एमएसएमई और विनिर्माण
सरकार ने विनिर्माण और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ रुपये का फंड। माइक्रो उद्यमों के लिए 2,000 करोड़ रुपये का अलग फंड। भविष्य के एसएमई चैंपियन के लिए विशेष फंड। इलेक्ट्रॉनिक निर्माण के लिए 40,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव। सेमीकंडक्टर मिशन के तहत ISM 2.0 लॉन्च। कंटेनर निर्माण के लिए 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर। कई मेगा टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना। खादी को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी स्वराज्य पहल।
कृषि, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए नए अवसरों की घोषणा। सूखे फल और मेवों की पैदावार को प्रोत्साहन। भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड बनाने की योजना। कोकोनट प्रमोशन स्कीम और नारियल, चंदन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा। मत्स्यपालन और पशुपालन क्षेत्रों में कई अहम कदम। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करना है।
डिजिटल और क्लाउड सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने वालों को 6 महीने तक टैक्स में छूट दी जाएगी। क्लाउड सर्विस दे रही विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलीडे दिया जाएगा। डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्थापना की जाएगी। ‘भारत विस्तार’ नामक बहुभाषी डिजिटल टूल को बढ़ावा दिया जाएगा। यह कदम भारत को वैश्विक डिजिटल हब बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
वित्तीय घाटा और राज्यों को मदद
सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। 2026-27 में वित्तीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 2025-26 के लिए यह अनुमान 4.4 प्रतिशत रखा गया है। राज्यों को इस वर्ष 1.4 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि विकास खर्च बढ़ाते हुए राजकोषीय संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता है।
टैक्स और कस्टम ड्यूटी में राहत
इस बजट में कई क्षेत्रों को कर राहत दी गई है। 17 दवाओं के आयात पर कस्टम ड्यूटी में छूट दी गई है, जिससे गंभीर बीमारियों के इलाज सस्ते हो सकते हैं। निजी इस्तेमाल के सामान के आयात पर ड्यूटी 20% से घटाकर 10% कर दी गई है। माइक्रोवेव ओवन के कुछ पार्ट्स और नागरिक प्रशिक्षण विमानों के कलपुर्जों पर भी टैक्स में छूट दी गई है। मोटर हादसे में मिलने वाली बीमा राशि के ब्याज को आयकर से बाहर रखा गया है। स्वास्थ्य और शिक्षा पर टीडीएस 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है।विदेश निवेश और प्रवासी भारतीय
पर्यटन, संस्कृति और खेल पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए कई प्रस्ताव रखे गए। पूर्वोत्तर में बौद्ध सर्किट को बढ़ावा। ओडिशा, केरल और कर्नाटक के तटों पर ‘टर्टल ट्रेल’। 15 पुरातात्विक क्षेत्रों का विकास। भारत में पहली ग्लोबल बिग कैट समिट का आयोजन। विश्वस्तरीय हाइकिंग-ट्रेकिंग को बढ़ावा। 10,000 टूर गाइड्स को प्रशिक्षण। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना। खेलो इंडिया मिशन के तहत खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन।
बुनियादी ढांचा और शहरी विकास
टीयर-2 और टीयर-3 शहरों पर विशेष फोकस। निजी डेवलपर्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड। 1000 करोड़ के सिंगल बॉन्ड पर 100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि। बैंकिंग सुधारों के लिए उच्च स्तरीय कमेटी।
सामाजिक सुरक्षा और समावेशन
सरकार के अनुसार पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। दिव्यांगजनों, महिला उद्यमियों, किसानों और युवाओं के लिए लक्षित योजनाएं समावेशी विकास की दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाती हैं।


