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Budget 2026-27: बायोफार्मा ‘शक्ति’ से हाई-स्पीड रेल तक, विकास और आयकर सरलीकरण पर जोर
सरकार ने बायोफार्मा सेक्टर को मजबूती देने के लिए ‘शक्ति’ नामक नई योजना का ऐलान किया है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य घरेलू दवा निर्माण, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), और उभरती जैव-प्रौद्योगिकी कंपनियों को समर्थन देना है।

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। करीब एक दशक में यह पहला अवसर है जब संसद में बजट रविवार को प्रस्तुत किया गया। सरकार ने इस बजट में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, विनिर्माण और कर सुधारों पर विशेष फोकस रखा है। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ बायोफार्मा ‘शक्ति’ योजना का प्रस्ताव रखा, वहीं आयकर प्रणाली को सरल और मुकदमेबाजी रहित बनाने के लिए नए इनकम टैक्स एक्ट को इसी वर्ष लागू करने की घोषणा की।
बायोफार्मा ‘शक्ति’: अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा
सरकार ने बायोफार्मा सेक्टर को मजबूती देने के लिए ‘शक्ति’ नामक नई योजना का ऐलान किया है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य घरेलू दवा निर्माण, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), और उभरती जैव-प्रौद्योगिकी कंपनियों को समर्थन देना है। विशेष रूप से शुगर (डायबिटीज) और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को वैश्विक फार्मा हब के रूप में और मजबूत कर सकता है।
नया इनकम टैक्स एक्ट: सरलीकरण और राहत
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि नया इनकम टैक्स एक्ट इसी वर्ष लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और विवादों को कम करना है। उन्होंने कहा कि टैक्स फॉर्म को आसान बनाया जाएगा और कुछ मामलों में दंड की जगह कर भुगतान कर राहत पाने का विकल्प दिया जाएगा। मुकदमेबाजी को कम करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। अघोषित आय की सीमा बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा करदाताओं को 31 जुलाई तक आयकर रिटर्न दाखिल करने की सुविधा दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इन सुधारों से करदाताओं पर अनुपालन का बोझ कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
बुनियादी ढांचे पर बड़ा दांव
बजट में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा की गई है।
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इससे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय में कमी आएगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
ये हैं सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के प्रस्तावित रूट
मुंबई-पुणे
पुणे-हैदराबाद
हैदराबाद-बेंगलुरु
हैदराबाद-चेन्नई
चेन्नई-बेंगलुरु
दिल्ली-वाराणसी
वाराणसी-सिलीगुड़ी
20 नए जल मार्ग
आंतरिक जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए 20 नए जल मार्ग विकसित करने की योजना है। इससे माल परिवहन सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल बनेगा।
खनिज और केमिकल कॉरिडोर
चार राज्यों में खनिज कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिससे खनन और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी। इसके अलावा तीन नए केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे, जिससे रासायनिक उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा।
शहरी और औद्योगिक विकास पर फोकस
सरकार ने शहरी आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिए प्रति वर्ष 5,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य शहरी बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है। टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़े टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जाएंगे। इससे निर्यात में वृद्धि और लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
एसएमई और स्वरोजगार को प्रोत्साहन
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए 10,000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है। इससे छोटे उद्योगों को वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन और बाजार तक पहुंच में मदद मिलेगी। इसके अलावा सरकार ने महात्मा गांधी स्वरोजगार योजना की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र
बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को भी प्राथमिकता दी गई है। शुगर और कैंसर की दवाओं को सस्ता करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे आम जनता को राहत मिलेगी और गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च कम होगा।
आर्थिक गतिविधियों को नई गति
वित्त वर्ष 2026-27 का बजट बुनियादी ढांचे के विस्तार, औद्योगिक विकास, कर सुधार और स्वास्थ्य क्षेत्र में राहत पर केंद्रित दिखाई देता है। बायोफार्मा ‘शक्ति’ जैसी योजनाएं अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देंगी, वहीं हाई-स्पीड रेल और जल मार्ग जैसे प्रोजेक्ट्स आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे सकते हैं। नए इनकम टैक्स एक्ट और सरलीकरण के प्रयास करदाताओं को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि इन घोषणाओं का क्रियान्वयन कितनी प्रभावी ढंग से किया जाता है और उनका जमीनी असर कितना दिखाई देता है।
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