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MLC चुनाव में बीजेपी को अपने ही गढ़ों में झटका, पटना से काशी और लखनऊ से नागपुर तक हार की चर्चा

चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजेपी ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसके सहयोगी दलों को तीन सीटें मिलीं। इस तरह एनडीए के खाते में कुल 15 सीटें आईं।

MLC चुनाव में बीजेपी को अपने ही गढ़ों में झटका, पटना से काशी और लखनऊ से नागपुर तक हार की चर्चा
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नई दिल्ली: चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजेपी ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसके सहयोगी दलों को तीन सीटें मिलीं। इस तरह एनडीए के खाते में कुल 15 सीटें आईं। इसके बावजूद चुनाव परिणामों में बीजेपी की हार ज्यादा चर्चा में है। इसकी प्रमुख वजह पटना, दरभंगा, वाराणसी, लखनऊ और नागपुर जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पार्टी को मिली शिकस्त है। इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक मतदाताओं ने मतदान किया, इसलिए नतीजों को शिक्षित और जागरूक मतदाताओं के रुझान के लिहाज से भी देखा जा रहा है।

बिहार में पटना और दरभंगा की सीटों पर बीजेपी को झटका

बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी को पटना शिक्षक और दरभंगा स्नातक सीट पर हार का सामना करना पड़ा। पटना शिक्षक सीट पर बीजेपी के नवल किशोर यादव करीब तीन दशक से काबिज थे। इस बार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के संजीव कुमार ने उन्हें हरा दिया। दरभंगा स्नातक सीट पर भी बीजेपी के उम्मीदवार सर्वेश कुमार अपनी सीट नहीं बचा सके। वह 2020 में चुनाव जीतकर विधान परिषद पहुंचे थे। इन दोनों सीटों पर हार इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का संबंध पटना से है, जबकि बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी दरभंगा से आते हैं। बिहार की आठ सीटों में बीजेपी और आरजेडी को दो-दो सीटें मिलीं। दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि जन सुराज और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के खाते में एक-एक सीट आई। बीजेपी ने कोसी और तिरहुत में जीत हासिल की, जबकि पटना स्नातक सीट जेडीयू के खाते में गई।

उत्तर प्रदेश में काशी और लखनऊ की हार बनी चर्चा का विषय

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजों में बीजेपी ने छह और समाजवादी पार्टी (सपा) ने पांच सीटें जीतीं। संख्या के लिहाज से बीजेपी आगे रही, लेकिन वाराणसी और लखनऊ में मिली हार ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी। वाराणसी की शिक्षक और स्नातक, दोनों सीटों पर बीजेपी को शिकस्त मिली। वहीं, लखनऊ की दो सीटों में से एक पर पार्टी हार गई। लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की कांति पटेल ने जीत दर्ज की। आगरा शिक्षक सीट और इलाहाबाद क्षेत्र में भी बीजेपी को झटका लगा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि वाराणसी की जनता ने ‘डबल इंजन’ सरकार को ‘डबल जीरो’ दिया है। सपा इन नतीजों को अपनी राजनीतिक रणनीति और स्थानीय मुद्दों के समर्थन के तौर पर पेश कर रही है।

नागपुर में कांग्रेस की जीत से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ीं

महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में इंडिया गठबंधन ने तीन सीटें जीतीं, जबकि एनडीए को दो सीटें मिलीं। सबसे ज्यादा चर्चा नागपुर स्नातक सीट की रही, जहां कांग्रेस ने जीत दर्ज की। नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह नगर है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का भी इस शहर से संबंध है। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय भी नागपुर में स्थित है। ऐसे में इस सीट पर बीजेपी की हार को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, पार्टी को 2020 के चुनाव में भी यहां हार का सामना करना पड़ा था।

कर्नाटक में एनडीए का शानदार प्रदर्शन

कर्नाटक में नतीजे बाकी राज्यों से अलग रहे। यहां विधान परिषद की चार सीटों में से बीजेपी ने तीन और उसके सहयोगी जेडीएस ने एक सीट जीती। इस तरह एनडीए ने सभी चार सीटों पर कब्जा कर लिया, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस को किसी सीट पर जीत नहीं मिली।

क्या शिक्षित मतदाताओं के बीच बदल रहा है रुझान?

इन चुनावों के नतीजों ने बीजेपी के लिए एक राजनीतिक संदेश दिया है। बिहार और उत्तर प्रदेश में पार्टी को उन क्षेत्रों में हार मिली, जिन्हें उसका मजबूत आधार माना जाता रहा है। महाराष्ट्र में नागपुर की हार ने भी ध्यान खींचा है। वहीं, कर्नाटक में एनडीए के प्रदर्शन ने गठबंधन को राहत दी। हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों को सीधे पूरे राज्य या आम मतदाताओं के रुझान का संकेत नहीं माना जा सकता। फिर भी, अपने मजबूत क्षेत्रों में मिली हार बीजेपी के लिए स्थानीय संगठन, उम्मीदवारों के चयन और मतदाताओं से जुड़ाव की समीक्षा करने का कारण बन सकती है।


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