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अजीत पवार से पहले हवाई दुर्घटना में जान गवां चुकी हैं ये हस्तियां, फिर याद आईं वे त्रासद घटनाएं

सत्ता के शीर्ष पर बैठे एक कद्दावर नेता की इस तरह अचानक हुई मौत ने न सिर्फ महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर दिया, बल्कि एक बार फिर भारत के इतिहास में हुई उन विमान और हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं की याद ताजा कर दी, जिनमें देश ने अपने कई बड़े राजनेता, वैज्ञानिक, सैन्य अधिकारी और प्रभावशाली हस्तियां खो दीं।

अजीत पवार से पहले हवाई दुर्घटना में जान गवां चुकी हैं ये हस्तियां, फिर याद आईं वे त्रासद घटनाएं
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मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और चार अन्य लोगों की बुधवार सुबह एक विमान दुर्घटना में मौत ने देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। सत्ता के शीर्ष पर बैठे एक कद्दावर नेता की इस तरह अचानक हुई मौत ने न सिर्फ महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर दिया, बल्कि एक बार फिर भारत के इतिहास में हुई उन विमान और हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं की याद ताजा कर दी, जिनमें देश ने अपने कई बड़े राजनेता, वैज्ञानिक, सैन्य अधिकारी और प्रभावशाली हस्तियां खो दीं। भारत में हवाई यात्रा को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन समय-समय पर हुई कुछ भयावह दुर्घटनाओं ने यह भी दिखाया है कि जब तकनीकी खामी, मौसम या मानवीय भूल एक साथ जुड़ जाती है, तो परिणाम कितना विनाशकारी हो सकता है।

अजीत पवार की मौत

अजीत पवार लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते थे। कई बार उपमुख्यमंत्री रह चुके पवार अपनी तेज निर्णय क्षमता और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते थे। उनके अचानक निधन से न सिर्फ पवार परिवार, बल्कि राज्य की सत्तारूढ़ राजनीति में भी गहरा शून्य पैदा हो गया है।

होमी जहांगीर भाभा (1966)

भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले होमी जहांगीर भाभा की मौत देश के लिए सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भविष्य को लगा गहरा आघात थी। 24 जनवरी 1966 को एयर इंडिया की फ्लाइट 101 जिनेवा से न्यूयॉर्क जा रही थी। खराब मौसम और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ गलतफहमी के कारण विमान स्विस आल्प्स की मोंट ब्लैंक चोटी से टकरा गया। इस हादसे में विमान में सवार सभी यात्रियों की मौत हो गई। भाभा की असामयिक मृत्यु ने भारत के परमाणु कार्यक्रम की गति को कुछ समय के लिए धीमा कर दिया।

मोहन कुमारमंगलम (1973)


पूर्व केंद्रीय इस्पात मंत्री और कांग्रेस के जाने-माने नेता मोहन कुमारमंगलम की 30 मई, 1973 को मौत हो गई थी, जब वह जिस इंडियन एयरलाइंस के प्लेन में यात्रा कर रहे थे, वह नई दिल्ली के पास क्रैश हो गया था। उनकी अचानक मौत से भारत में एविएशन सेफ्टी के बारे में जागरूकता बढ़ी।

संजय गांधी (1980)

23 जून 1980 को कांग्रेस नेता संजय गांधी, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र थे, एक निजी विमान उड़ा रहे थे। दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट के पास टेकऑफ के कुछ ही देर बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में संजय गांधी की मौके पर ही मौत हो गई। संजय गांधी को उस समय कांग्रेस की युवा और भविष्य की धुरी माना जा रहा था। उनकी मौत ने देश की राजनीति की दिशा ही बदल दी।

माधवराव सिंधिया (2001)

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री माधवराव सिंधिया की 30 सितंबर 2001 को विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वे कानपुर में एक राजनीतिक रैली में शामिल होने जा रहे थे, तभी उनका विमान मैनपुरी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। एक ऐसे नेता, जिन्होंने खुद नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभाला हो, उनकी मौत इसी क्षेत्र से जुड़ी दुर्घटना में होना देश के लिए बेहद विडंबनापूर्ण रहा।

जीएमसी बालयोगी (2002)

लोकसभा अध्यक्ष और तेलुगु देशम पार्टी के वरिष्ठ नेता जीएमसी बालयोगी की 3 मार्च 2002 को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई। आंध्र प्रदेश में खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। बालयोगी को एक निष्पक्ष और मर्यादित लोकसभा अध्यक्ष के रूप में याद किया जाता है। उनकी मृत्यु ने संसदीय राजनीति को गहरा झटका दिया।

सौंदर्या (2004)

17 अप्रैल, 2004 को दक्षिण भारतीय अभिनेत्री सौंदर्या की एक प्राइवेट जेट दुर्घटना में मौत हो गई। वह अम्मोरो, पवित्रा बंधम, राजा और सूर्यवंशम जैसी फिल्मों में अपने आइकॉनिक किरदारों के लिए जानी जाती थीं।बेंगलुरु के जक्कूर एयरस्ट्रिप से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद, जिस सेसना विमान में वह सफ़र कर रही थीं, वह क्रैश हो गया। दुख की बात है कि वह और विमान में सवार सभी लोग मारे गए, जबकि वह सात महीने की प्रेग्नेंट थीं। सिर्फ़ 31 साल की उम्र में सौंदर्या की मौत ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया, और एक ऐसा करियर खत्म हो गया जो अभी अपने चरम पर था।

ओपी जिंदल और सुरेंद्र सिंह (2005)

हरियाणा के उद्योगपति और मंत्री ओम प्रकाश जिंदल (ओपी जिंदल) और राज्य के कृषि मंत्री सुरेंद्र सिंह की 2005 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई। जब वह दिल्ली से चंडीगढ़ जा रहे थे, तभी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। इस दुर्घटना ने राजनीति और उद्योग जगत दोनों को एक साथ झकझोर दिया।

वाईएस राजशेखर रेड्डी (2009)

आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की 2 सितंबर 2009 को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई। उनका बेल 430 हेलीकॉप्टर खराब मौसम के कारण नल्लामाला जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रेड्डी की लोकप्रियता और जनकल्याणकारी योजनाओं के चलते उनकी मौत के बाद पूरे आंध्र प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई थी।

दोरजी खांडू (2011)

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू और चार अन्य लोग 30 अप्रैल 2011 को मारे गए। वे तवांग से ईटानगर जा रहे थे, तभी पश्चिम कामेंग जिले में उनका हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पहाड़ी राज्यों में खराब मौसम और दुर्गम भूगोल को हवाई हादसों का बड़ा कारण माना जाता है।

सीडीएस जनरल बिपिन रावत (2021)

8 दिसंबर 2021 को भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य सैन्य अधिकारी तमिलनाडु के कुन्नूर के पास हुए हेलीकॉप्टर हादसे में मारे गए। यह दुर्घटना आधुनिक भारत के सैन्य इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिनी जाती है। जनरल रावत को भारतीय सेना के आधुनिकीकरण का प्रमुख चेहरा माना जाता था।

विजय रूपाणी (2025)

12 जून 2025 को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया के एक विमान हादसे में मौत हो गई। इस विमान हादसे में 200 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई थी और सिर्फ़ एक यात्री ज़िंदा बचा था। यह हादसा हाल के वर्षों की सबसे चर्चित राजनीतिक दुर्घटनाओं में शामिल हो गया और हवाई सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे।

एक के बाद एक त्रासदी, लेकिन सबक अधूरे

इतिहास गवाह है कि हर बड़ी दुर्घटना के बाद जांच होती है, रिपोर्ट आती है और सुधारों की बात होती है। लेकिन समय बीतते ही ये सबक अक्सर कागजों तक सिमट जाते हैं। अजीत पवार की मौत के साथ यह सवाल फिर खड़ा है—क्या यह हादसा भी सिर्फ एक और आंकड़ा बनकर रह जाएगा, या इससे हवाई सुरक्षा को लेकर ठोस बदलाव होंगे? देश आज अपने एक और बड़े नेता को खो चुका है, और आसमान से गिरती ये त्रासदियां बार-बार हमें चेतावनी दे रही हैं।


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