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अश्विनी वैष्णव का कांग्रेस पर हमला, बोले- 1950 से 1990 के बीच देश के चार दशक बर्बाद हो गए

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उस दौर में उद्योग स्थापित करना या उत्पादन बढ़ाना बेहद कठिन प्रक्रिया थी। उनके मुताबिक, उद्यमियों को बार-बार सरकारी दफ्तरों और दिल्ली के अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे।

अश्विनी वैष्णव का कांग्रेस पर हमला, बोले- 1950 से 1990 के बीच देश के चार दशक बर्बाद हो गए
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नई दिल्ली: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश की आर्थिक विकास दर को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद 1950 से 1990 के बीच का लगभग चार दशक का समय भारत के आर्थिक विकास के लिए “खोया हुआ युग” साबित हुआ। उनके अनुसार, इस दौरान लागू लाइसेंस-परमिट राज ने उद्यमिता को बाधित किया और देश की आर्थिक क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो सका।

उद्यमियों पर प्रतिबंध और प्रशासनिक बाधाओं का जिक्र

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उस दौर में उद्योग स्थापित करना या उत्पादन बढ़ाना बेहद कठिन प्रक्रिया थी। उनके मुताबिक, उद्यमियों को बार-बार सरकारी दफ्तरों और दिल्ली के अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। वैष्णव ने कहा कि नीतिगत प्रतिबंधों के कारण व्यवसायियों को प्रोत्साहन मिलने के बजाय कई बार उन्हें संदिग्ध या परेशान करने योग्य माना जाता था, जिससे औद्योगिक विकास की गति काफी धीमी रही।

1990 के बाद आर्थिक सुधारों का असर

वैष्णव ने कहा कि 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत की अर्थव्यवस्था में बदलाव की एक नई शुरुआत हुई। उन्होंने बताया कि इसके बाद के वर्षों में कई क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोला गया और बाजार आधारित नीतियों को अपनाया गया। उनके अनुसार, शुरुआती सुधारों ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी, लेकिन इस गति को लगातार बनाए रखने की जरूरत थी।

2004 से 2014 के दशक पर भी उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि 2004 से 2014 के बीच का समय भी अपेक्षित आर्थिक गति हासिल करने में विफल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवधि में विकास की रफ्तार उस स्तर पर नहीं पहुंच सकी, जिसकी देश को आवश्यकता थी। वैष्णव के अनुसार, इस दौरान नीति-निर्माण में पुरानी सोच का प्रभाव बना रहा, जिससे निवेश और रोजगार सृजन की संभावनाएं सीमित हो गईं।

‘वामपंथी मानसिकता’ का उल्लेख कर साधा निशाना

अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि कुछ वर्षों के दौरान नीति-निर्माण में ऐसी मानसिकता हावी रही, जिसमें उद्यमिता और निजी क्षेत्र की भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने इसे “वामपंथी सोच” करार देते हुए कहा कि इससे देश में नए उद्यमों और रोजगार सृजन की गति प्रभावित हुई। हालांकि, उनके इन बयानों पर राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है।

मोदी सरकार के आर्थिक प्रदर्शन की सराहना

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए आर्थिक सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए नीतिगत बदलावों और सुधारों के चलते भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। वैष्णव के अनुसार, देश की विकास दर अब स्थिर रूप से 6 से 8 प्रतिशत के बीच बनी हुई है, जो वैश्विक स्तर पर भारत को सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करती है।

भारत की वैश्विक स्थिति में सुधार का दावा

वैष्णव ने कहा कि भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और कई क्षेत्रों में निवेश तथा तकनीकी विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान आर्थिक नीतियों के कारण देश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है और औद्योगिक विस्तार को नई गति मिली है।


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