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अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सैनिकों के बीच फिर तनाव, ITBP प्रमुख के बयान पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को कहा कि पिछले कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिक कई बार आमने-सामने आए हैं। उनके मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में भी कई स्थानों पर टकराव जैसी स्थिति बनी और तनाव अब भी जारी है।

अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सैनिकों के बीच फिर तनाव, ITBP प्रमुख के बयान पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा
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नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को कहा कि पिछले कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिक कई बार आमने-सामने आए हैं। उनके मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में भी कई स्थानों पर टकराव जैसी स्थिति बनी और तनाव अब भी जारी है। इस बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार सीमा पर चीन की गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाने में विफल रही है।

असाफिला और तक्षिंग में कई महीनों से तनाव

शत्रुजीत कपूर ने राजस्थान के अलवर स्थित सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में आयोजित हिमवीर सम्मान समारोह के दौरान सीमा पर मौजूदा परिस्थितियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के असाफिला और माजा क्षेत्र में जुलाई के अंत से तनाव बना हुआ है। भारत ने भी सीमा पर अपनी तैनाती बढ़ाई है। मीडिया रिपोर्टों में सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने तक्षिंग क्षेत्र में माजा कंपनी के संचालन क्षेत्र के पास ऊंचाई वाले इलाके में टेंट लगाए हैं। सूत्रों के अनुसार, ये टेंट वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से लगभग 6 से 7 किलोमीटर अंदर बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में नियमित गश्त के दौरान भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आ गए थे। शुरुआती घटनाक्रम के बाद दोनों पक्ष पीछे हटे, लेकिन कुछ दिनों बाद चीनी सैनिकों की दोबारा मौजूदगी और टेंट लगाए जाने की खबरें सामने आईं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

तीन उच्चस्तरीय बैठकों के बाद भी नहीं सुलझा मामला

ITBP प्रमुख ने कहा कि भारत और चीन के बीच जुलाई के बाद तीन उच्चस्तरीय स्तरों पर बातचीत हुई। इनमें कार्यकारी तंत्र (WMCC), विशेष प्रतिनिधि वार्ता और कोर कमांडर स्तर की बातचीत शामिल हैं। इसके बावजूद सीमा पर तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कपूर ने ड्रोन को आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि ITBP ड्रोन निर्माण और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। बल वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट अपने संसाधनों की सुरक्षा के लिए भूमिगत शेल्टर भी तैयार कर रहा है। उन्होंने ITBP की नवगठित शौर्य कमांडो बटालियन की भूमिका की सराहना की। उनके अनुसार, मौजूदा सीमा तनाव के दौरान कमांडो ने प्रभावी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में काम करने का अनुभव ITBP की बड़ी ताकत है।

जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 19 जून 2020 के बयान का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि चीन के प्रति सरकार के रुख की कीमत देश को चुकानी पड़ रही है। रमेश ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में हालिया घटनाक्रम और स्थानीय लोगों की गश्त से जुड़े बिंदुओं तक पहुंच प्रभावित होने की शिकायतें गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने इन परिस्थितियों की तुलना पूर्वी लद्दाख में पहले सामने आए सीमा विवाद से की। कांग्रेस नेता ने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों और ब्रह्मपुत्र नदी पर प्रस्तावित विशाल बांध परियोजना का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, ये गतिविधियां भारत की क्षेत्रीय अखंडता, पर्यावरण और जल सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करती हैं।

चीन के साथ व्यापार घाटा भी बना राजनीतिक मुद्दा

जयराम रमेश ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान भारत ने चीन को लगभग 19.47 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि आयात करीब 131.63 अरब डॉलर रहा। कांग्रेस का आरोप है कि चीन से बढ़ते आयात का दबाव भारतीय उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) पर पड़ रहा है। रमेश ने सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की निर्भरता चीनी आयात पर बढ़ती जा रही है।

गलवान के बाद के बयान पर फिर बहस

कांग्रेस ने गलवान घाटी में 2020 में हुई हिंसक झड़प के बाद प्रधानमंत्री के बयान को भी मुद्दा बनाया। रमेश ने उस समय प्रधानमंत्री के इस कथन का हवाला दिया था कि भारतीय क्षेत्र में कोई घुसपैठ नहीं हुई और किसी भारतीय चौकी पर कब्जा नहीं किया गया। इस तरह अरुणाचल प्रदेश में सीमा तनाव की खबरों ने भारत-चीन संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। जहां ITBP प्रमुख ने सीमा पर चुनौतियों और सुरक्षा तैयारियों की बात कही है, वहीं कांग्रेस ने सरकार से चीन के प्रति अपनी नीति और सीमा की स्थिति पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।


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