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देशभर में ईद के बीच जंग का साया, शिया समुदाय ने कई शहरों में ‘काली ईद’ मनाकर जताया विरोध

श्रीनगर, भोपाल, जयपुर, अजमेर, सीकर, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और उत्तर प्रदेश के संभल समेत कई स्थानों पर शिया समुदाय के लोग नमाज के दौरान काली पट्टी बांधकर पहुंचे। इसे अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के खिलाफ विरोध और शोक के प्रतीक के रूप में देखा गया।

देशभर में ईद के बीच जंग का साया, शिया समुदाय ने कई शहरों में ‘काली ईद’ मनाकर जताया विरोध
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नई दिल्‍ली: देशभर में शनिवार को ईद-उल-फितर का पर्व मनाया गया, लेकिन इस बार जश्न के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष का असर भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला। खासकर शिया समुदाय ने कई राज्यों में विरोध के प्रतीक के रूप में ‘काली ईद’ मनाई और नमाज के दौरान काली पट्टी बांधकर एकजुटता जताई।

कई राज्यों में काली पट्टी बांधकर नमाज

श्रीनगर, भोपाल, जयपुर, अजमेर, सीकर, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और उत्तर प्रदेश के संभल समेत कई स्थानों पर शिया समुदाय के लोग नमाज के दौरान काली पट्टी बांधकर पहुंचे। इसे अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के खिलाफ विरोध और शोक के प्रतीक के रूप में देखा गया। श्रीनगर में शिया मुसलमानों ने ईरान के समर्थन में जुलूस निकाला और इजराइल व अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की निंदा की।


भोपाल में श्रद्धांजलि और नारेबाजी

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इमामबाड़ा परिसर में अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान मौलाना राजी उल हसन ने अपने संबोधन में जुल्म के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया। फतेहगढ़ इमामबाड़ा में समुदाय ने ‘काली ईद’ मनाई। नमाज के बाद कुछ स्थानों पर अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।

संभल में प्रदर्शन, पुलिस से बहस

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की नगर पंचायत सिरसी में ईद-उल-फितर की नमाज काली पट्टी बांधकर अदा की गई। नमाज के बाद प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की, जिसके दौरान पुलिस के साथ उनकी बहस भी हुई। यह प्रदर्शन ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष में मारे गए लोगों के विरोध में किया गया।

राजस्थान में सादगी से मनाई ईद

राजस्थान के जयपुर, सीकर और अजमेर सहित कई जिलों में भी काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की गई। कई मस्जिदों पर काले झंडे लगाए गए थे। विरोध के तौर पर शिया समुदाय के लोगों ने नए कपड़े नहीं पहने और घरों में पारंपरिक व्यंजन जैसे खीर और सेवइयां भी नहीं बनाई गईं। अजमेर स्थित ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह शरीफ में सुबह 5 बजे ‘जन्नती दरवाजा’ खोला गया, जहां बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे।

कश्मीर में ईद, लेकिन जामा मस्जिद में नमाज नहीं

कश्मीर में भी ईद मनाई गई, जहां डल झील के किनारे स्थित हजरतबल दरगाह पर सबसे बड़ी भीड़ देखी गई। करीब 50,000 लोगों ने यहां नमाज अदा की। हालांकि, प्रशासन ने पुराने श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में नमाज की अनुमति नहीं दी। यह लगातार सातवां साल है जब जामा मस्जिद में ईद की नमाज नहीं हुई। इलाके में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी।

नेताओं ने शांति और अमन की अपील की

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बडगाम में नमाज अदा करने के बाद कहा कि सभी को दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए दुआ करनी चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां संघर्ष जारी है, जैसे फिलिस्तीन, लेबनान और ईरान। वहीं, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के चेयरमैन गुलाम नबी आजाद ने भी ईद के मौके पर पश्चिम एशिया में शांति की कामना की। उन्होंने कहा कि वहां काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और स्थिरता भी बेहद महत्वपूर्ण है।

वैश्विक संघर्षों की छाया


ईद-उल-फितर का त्योहार जहां एक ओर खुशियों का प्रतीक रहा, वहीं दूसरी ओर वैश्विक संघर्षों की छाया भी उस पर स्पष्ट रूप से दिखाई दी। देश के विभिन्न हिस्सों में शिया समुदाय द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों ने यह दर्शाया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाएं स्थानीय भावनाओं को भी प्रभावित करती हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव कब कम होगा और दुनिया भर में शांति और स्थिरता कब बहाल हो पाएगी।


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