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रक्षा उत्पादन और शिक्षा जगत की बड़ी साझेदारी: IIT-NIT रिसर्च अब बनेगा रक्षा तकनीक

रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने आईआईटी, एनआईटी और आईआईएससी जैसे बड़े शैक्षणिक संस्थानों के डायरेक्टर और डीन के साथ एक ऑनलाइन बैठक की। इस बातचीत में डिफेंस पीएसयू और दूसरे संबंधित पक्ष भी शामिल रहे।

रक्षा उत्पादन और शिक्षा जगत की बड़ी साझेदारी: IIT-NIT रिसर्च अब बनेगा रक्षा तकनीक
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संजीव कुमार की पहल– विश्वविद्यालयों का रिसर्च सीधे जोड़ेगा देश की सुरक्षा से

  • 24 शीर्ष संस्थानों के प्रोफेसरों संग बैठक, रक्षा मंत्रालय ने बढ़ाया सहयोग का दायरा
  • IIT से डिफेंस तक: आत्मनिर्भर भारत के लिए नई तकनीक पर फोकस

नई दिल्ली। रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने मंगलवार को आईआईटी, एनआईटी और आईआईएससी जैसे बड़े शैक्षणिक संस्थानों के डायरेक्टर और डीन के साथ एक ऑनलाइन बैठक की। इस बातचीत में डिफेंस पीएसयू और दूसरे संबंधित पक्ष भी शामिल रहे।

बैठक का मकसद विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में हो रहे रिसर्च को रक्षा उत्पादन की जरूरतों से जोड़ना था। साथ ही एक ऐसा सिस्टम बनाने पर जोर दिया गया, जिससे लंबे समय तक लगातार सहयोग बना रहे।

इस दौरान जिन विषयों पर खास तौर पर चर्चा हुई उनमें छात्रों को इस प्रक्रिया से जोड़कर लॉन्ग-टर्म रिसर्च को बढ़ावा देना, अकादमिक संस्थानों और डिफेंस पीएसयू के बीच सहयोग को सिर्फ छोटे प्रोजेक्ट तक सीमित न रख कर इसका विस्तार करना व भविष्य की नई और उभरती तकनीकों पर मिलकर काम करने के लिए पक्की व्यवस्था बनाना था।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे यह फायदा होगा कि कॉलेजों में होने वाला रिसर्च वर्क सीधे काम आने वाली रक्षा तकनीक में बदला जा सकेगा। इस दौरान संजीव कुमार ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसी बातचीत से मंत्रालय को अकादमिक संस्थानों की क्षमताओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है।

उन्होंने शिक्षा जगत से अपील की कि वे रक्षा उत्पादन विभाग के साथ सलाह-मशवरे के जरिए लंबे समय तक देश की ताकत बढ़ाने पर काम करें।

बता दें कि इस बैठक में आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी तिरुपति, आईआईटी गुवाहाटी सहित देश के 24 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल हुए। इस बातचीत के जरिए यह भी स्पष्ट हुआ कि रक्षा मंत्रालय देश की टॉप शिक्षण संस्थाओं और उद्योगों के साथ मिलकर आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा तकनीक विकसित करने के लिए प्रयासरत है।


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